Budget 2024 : अंतरिम बजट आने में एक महीना से कम समय रह गया है। वित्तमंत्री Nirmala Sitharaman 1 फरवरी को अपना छठा बजट पेश करेंगी। यह वोट-ऑन-अकाउंट होगा। पूर्ण बजट (Union Budget 2024) लोकसभा चुनावों के बाद पेश होगा। अप्रैल और मई में लोकसभा चुनाव होने वाले हैं। इसके बाद जो नई सरकार बनेगी, वह वित्त वर्ष 2024-25 का पूर्ण बजट पेश करेगी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार अंतरिम बजट में बड़े ऐलान नहीं करेगी। वह इनकम टैक्स के नियमों में बड़ा बदलाव करने से बचेगी। लेकिन, इस बजट में इकोनॉमी से जुड़े अहम डेटा होंगे। चूंकि बजट में काफी ज्यादा डेटा होते हैं, जिससे सभी पर नजर रखना मुमकिन नहीं है। हम आपको ऐसे कुछ आंकड़ों के बारे में बता रहे हैं, जिन पर आपको नजर रखनी चाहिए।
2. जीडीपी ग्रोथ का अनुमान
सरकार यूनियन बजट में जीडीपी के नॉमिनल ग्रोथ का ऐलान करती है। यह अगले वित्त वर्ष के लिए होता है। इससे पता चलता है कि इकोनॉमी को लेकर सरकार का आंकलन क्या है। सरकार जीडीपी के नॉमिनल ग्रोथ का अनुमान व्यक्त करती है। इसकी वजह यह है कि जीडीपी के डेटा को इनफ्लेशन के साथ एडजस्ट नहीं किया जाता है। इनफ्लेशन के साथ एडजस्ट करने पर जीडीपी की असल ग्रोथ का पता चलता है। 1 फरवरी, 2023 को पेश बजट में सरकार ने जीडीपी की नॉमिनल ग्रोथ 10 फीसदी रहने का अनुमान व्यक्त किया था।
अप्रैल और मई में लोकसभा चुनाव की वजह से इस बार बजट का आकार बड़ा रहने की उम्मीद है। सरकार सामाजिक योजनाओं पर खर्च बढ़ाने का ऐलान कर सकती है। सरकार नई स्कीम का ऐलान कर सकती है। ऐसा करने से बजट का आकार बढ़ जाएगा। 2019 के अंतरिम बजट में सरकार ने पीएम किसान सम्मान निधि योजना का ऐलान किया था। 1 फरवरी, 2023 को पेश यूनियन बजट का आकार 45 लाख करोड़ रुपये था। इस बार यह आंकड़ा 50 लाख करोड़ रुयये को पार कर सकता है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार का पूंजीगत खर्च अगले वित्त वर्ष में ज्यादा रहेगा। इसकी वजह यह है कि सरकार इकोनॉमी की रफ्तार बढ़ाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने पर फोकस कर रही है। इस वित्त वर्ष में सरकार का पूंजीगत खर्च 10 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा रहा है। इसका असर इकोनॉमिक ग्रोथ पर पड़ा है। सरकार ने वित्त वर्ष 2022-23 पूंजीगत खर्च के लिए सात लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का लक्ष्य तय किया था। वित्त वर्ष 2024-25 के यूनियन बजट में नजरें सरकार के पूंजीगकत खर्च के डेटा पर रहेगी।
इस वित्त वर्ष में सरकार ने विनिवेश से 51,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा था। लेकिन अब तक सिर्फ 10,051 करोड़ रुपये मिले हैं। डिसइनवेस्टमेंट टारगेट का पूरा नहीं होना इकोनॉमी के लिए अच्छा नहीं है। यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट में डिसइनवेस्टमेंट का कितना टारगेट तय करती है।