इंडिया एसएमई फोरम ने एमएसएमई के लिए 5,000 करोड़ रुपये का फंड बनाने की मांग सरकार से की है। इस फंड का इस्तेमाल एमएसएमई के ग्लोबल मार्केट के डेवलपमेंट और प्रमोशन के लिए होगा। इस फोरम के 98,000 से ज्यादा मेंबर्स हैं। फोरम ने कहा है कि निर्यात बढ़ाने के लिए एक्टिव एक्सपोर्ट्स की संख्या बढ़ाना जरूरी है। साथ ही दुनियाभर में इंडियन प्रोडक्ट्स को बढ़ावा देने के लिए कम से कम 3-4 लाख नए एमएसएमई को निर्यात शुरू करने के लिए प्रेरित करने की जरूरत है। फोरम ने एक एक्सपोर्ट प्रमोशन एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन बनाने की भी सलाह दी है।
पहली बार एक्सपोर्ट करने वाले MSME को प्रोत्साहन की जरूरत
यह ऑर्गेनाइजेशन एमएसएमई (MSME) को मार्केट इंटेलिजेंस, ट्रेड अपॉर्चुनिटीज और बिजनेस-टू-बिजनेस कनेक्शंस उपलब्ध कराएगा। इंडिया में भी यूएस कमर्शियल सर्विस और जापान के JETRO की तर्ज पर विदेशी बाजार में इंडियन प्रोडक्ट्स को बढ़ावा देने की जरूरत है। फोरम के प्रेसिडेंट विनोद कुमार ने एक कम्प्रिहेंसिव एक्सपोर्ट फैमिलियराइजेशन प्रोग्राम शुरू करने की मांग की। इसके तहत पहली बार एक्सपोर्ट करने वाले एमएसएमई को चीन, ताइवान, वियतनाम और दक्षिण कोरिया जैसे बाजारों में B2B एग्जिबिशंस में हिस्सा लेने का मौका मिलेगा।
एमएसएमई के लिए यूनिवर्सिटी बनाने की सलाह
प्रमुख उद्योग चैंबर PHDCCI ने ट्रेड रिसीवएबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (TReDS) का हिस्सा बनने वाली सरकारी कंपनियों को रियायत की मांग की। RBI ने 2024 में यह सिस्टम लॉन्च किया था। यह सिस्टम एमएसएमई इनवॉयसेज और बिल्स की डिस्काउंटिंग के लिए है। उधर, एसोचैम प्रेसिडेंट संजय नायर ने एक स्पेशियलाइज्ड एमएसएमई यूनिवर्सिटी बनाने की सलाह दी । इस यूनिवर्सिटी में खास कोर्स र प्रोग्राम चलाए जा सकते हैं। इससे ग्लोबल लेवल पर एसएमई की प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
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सभी एंटरप्राइजेज को जीएसटी के तहत लाने की सलाह
नायर ने सभी एंटरप्राइजेज को गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) के तहत लाने की मांग की। उनका कहना था कि इससे क्रेडिटवर्दिनेस में इम्प्रूवमेंट होगा साथ ही फाइनेंस तक एक्सेस होने से फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन का डिजिटल फुटप्रिंट बनेगा। एसएमई इंडस्ट्री बॉडीज ने ज्योग्राफिकल इंडिकेशन (GI) प्रोडक्ट्स को बढ़ावा देने के लिए 500 करोड़ रुपये का फंड बनाने पर जोर दिया।