Budget 2024 : वित्तमंत्री पूंजीगत खर्च का टारगेट ज्यादा नहीं बढ़ाएंगी, इकोनॉमिस्ट्स की राय

Interim Budget 2024 : इकोनॉमिस्ट्स का मानना है कि कैपिटल एक्सपेंडिचर का टारगेट ज्यादा बढ़ाने से सरकार को फिस्कल डेफिसिट के अपने टारगेट को हासिल करने में दिक्कत आएगी। सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 तक फिस्कल डेफिसिट को घटाकर जीडीपी के 4.5 फीसदी तक लाने का टारगेट तय किया है

अपडेटेड Jan 29, 2024 पर 10:16 AM
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Union Budget 2024 : सर्वे में शामिल ज्यादातर इकोनॉमिस्ट्स का मानना है कि सरकार अगले वित्त वर्ष के लिए फिस्कल डेफिसिट का 5.3 फीसदी टारगेट तय कर सकती है। इस वित्त वर्ष के लिए सरकार ने फिस्कल डेफिसिट का 5.9 फीसदी टारगेट तय किया था।

Union Budget 2024 : सरकार अगले वित्त वर्ष के लिए अपने पूंजीगत खर्च में ज्यादा वृद्धि नहीं करेगी। इकोनॉमिस्ट्स के बीच हुए सर्वे से यह जानकारी मिली है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को यूनियन बजट (Union Budget) पेश करेंगी। वह इसमें पूंजीगत खर्च के अगले वित्त वर्ष के टारगेट का ऐलान करेंगी। सर्वे में शामिल इकोनॉमिस्ट्स का मानना है कि अगले वित्त वर्ष के लिए सरकार पूंजीगत खर्च के लिए 11 लाख करोड़ रुपये का टारगेट तय कर सकती है। यह इस वित्त वर्ष के पूंजीगत खर्च के मुकाबले सिर्फ 10.3 फीसदी ज्यादा होगा। फिर भी यह कैपिटल एक्सपेंडिचर का रिकॉर्ड टारगेट होगा। इस वित्त वर्ष के लिए सरकार ने पूंजीगत खर्च का 10 लाख करोड़ रुपये का टारगेट तय किया था। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी को अंतरिम बजट (Interim Budget) पेश करेंगी। अप्रैल-मई में लोकसभा चुनाव होने वाले हैं। चुनाव के नतीजों के बाद केंद्र में जो नई सरकार बनेगी वह पूर्ण बजट पेश करेगी।

बजट 2024 में कैपिटल एक्सपेंडिचर का 11 लाख करोड़ का टारगेट तय हो सकता है

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी, 2023 को पेश बजट में पूंजीगत खर्च का टारगेट 33.4 फीसदी बढ़ाया था। सर्वे में शामिल इकोनॉमिस्ट्स का मानना है कि पूंजीगत खर्च में ज्यादा वृद्धि नहीं होने की वजह फिस्कल कंसॉलिडेशन पर सरकार का ज्यादा फोकस हो सकता है। सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 तक पूंजीगत खर्च को घटाकर जीडीपी के 4.5 फीसदी तक लाने का टारगेट तय किया है। इकोनॉमिस्ट्स का यह भी मानना है कि सरकार इस वित्त वर्ष के लिए 10 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत खर्च के टारगेट को करीब 30,000 करोड़ रुपये घटाकर 9.7 लाख करोड़ रुपये कर सकती है। ऐसा होने पर अगले वित्त वर्ष के लिए 11 लाख करोड़ रुपये का टारगेट इस वित्त वर्ष से संशोधित अनुमान से 13.4 फीसदी ज्यादा होगा।


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10 फीसदी बढ़ सकता है कैपिटल एक्सपेंडिचर

रेटिंग एजेंसी इक्रा के एनालिस्ट्स ने कहा, "रिसीट और रेवेन्यू एक्सपेंडिचर के हमारे अनुमान के आधार पर ऐसा लगता है कि वित्त वर्ष 2024-25 के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर का 10.2 लाख करोड़ रुपये का टारगेट तय किया जा सकता है। यह साल दर साल आधार पर करीब 10 फीसदी का इजाफा होगा। कोरोनों की महामारी के बाद के सालों में सरकार ने पूंजीगत खर्च में हर साल 20 फीसदी से ज्यादा वृद्धि की है।" इक्रा के इकोनॉमिस्ट्स का यह भी कहना है कि कैपिटल एक्सपेंडिचर का टारगेट बढ़ाने का असर 2025-26 के सरकार के फिस्कल डेफिसिट के टारगेट पर पड़ेगा।

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फिस्कल डेफिसिट का टारगेट 5.3 फीसदी तय होने की उम्मीद

सर्वे में शामिल ज्यादातर इकोनॉमिस्ट्स का मानना था कि सरकार अगले वित्त वर्ष के लिए फिस्कल डेफिसिट का 5.3 फीसदी टारगेट तय कर सकती है। इस वित्त वर्ष के लिए सरकार ने फिस्कल डेफिसिट का 5.9 फीसदी का टारगेट तय किया था। चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर वी अनंत नागेश्वरन ने पिछले साल के बजट से पहले कहा था कि कैपिटल एक्सपेंडिचर में हाल के सालों जितनी वृद्धि लंबे समय तक नहीं की जा सकती।

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