सरकार ने फाइनेंशियल ईयर 2015-16 में नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) में एक अतिरिक्त डिडक्शन की इजाजत दी थी। इसके तहत एनपीएस टियर 1 अकाउंट में 50,000 रुपये तक के निवेश पर अतिरिक्त डिडक्शन क्लेम किया जा सकता है। यह डिडक्शन इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80सीसीडी(1बी) के तहत मिलता है। यह डिडक्शन एनपीएस को खास बनाता है, क्योंकि बाकी इनवेस्टमेंट के ऑप्शंस में सेक्शन 80सी के तहत डिडक्शन मिलता है। हालांकि, फाइनेंशियल प्लैनर्स का मानना है कि एनपीएस में मिलने वाले डिडक्शन को बढ़ाने की जरूरत है। इससे रिटायरमेंट के लिए सेविंग्स में लोगों की दिलचस्पी बढ़ेगी।
सरकार ने लोगों की पेंशन इनकम के लिए एनपीएस (NPS) की शुरुआत की थी। पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) एनपीएस का रेगुलेटर है। एनपीएस एक मार्केट लिंक्ड डिफाइंड कंट्रिब्यूशन स्कीम है, जो सभी के लिए उपलब्ध है। 1 जनवरी, 2004 या उसके बाद केंद्र सरकार में नौकरी शुरू करने वाले लोगों के लिए एनपीएस में कंट्रिब्यूट करना अनिवार्य है। सिर्फ आर्म्ड फोर्सेज के लिए यह अनिवार्य नहीं है। राज्य सरकार के एंप्लॉयीज के लिए भी यह उपलब्ध है।
कंपनियां अपनी इच्छा से अपने एंप्लॉयीज को एनपीएस की सुविधा दे सकती हैं। एनपीएस का वॉलेंटरी मॉडल सभी लोगों के लिए उपलब्ध है। विदेश में रहने वाले भारतीय भी इसमें कंट्रिब्यूट कर सकते हैं। इसके लिए न्यूनतम उम्र 18 साल और अधिकतम उम्र 70 साल है। एनपीएस में निवेश करने के कई फायदें हैं। लैडर 7 फाइनेंशियल एडवाइजर्स के फाउंडर सुरेश सदगोपन ने कहा, "रिटायरमेंट के बाद की इनकम के लिए एनपीएस इनवेस्टमेंट का शानदार विकल्प है।"
अभी कितनी मिलती है टैक्स-छूट?
इनवेस्टमेंट का अच्छा विकल्प होने के साथ ही एनपीएस में मिलने वाली टैक्स-छूट इसे काफी अट्रैक्टिव बना देती है। एंप्लॉयीज अपनी बेसिक सैलरी (प्लस डीए) के 10 फीसदी तक के कंट्रिब्यूशन पर टैक्स डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं। यह क्लेम 80सीसीडी(1) के तहत होता है, जो सेक्शन 80सी की कुल 1.5 लाख रुपये तक की निवेश की सीमा के तहत आता है। इसके अलावा सेक्शन 80सीसीडी(1बी) के तहत अतिरिक्त 50,000 रुपये का डिडक्शन किया जा सकता है। कोई सब्सक्राइबर अपनी मर्जी से ज्यादा कंट्रिब्यूशन कर सकता है, लेकिन उसे डिडक्शन 50,000 रुयये तक ही मिलेगा।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि 50,000 रुपये के अतिरिक्त डिडक्शन की लिमिट के बढ़ाने की जरूरत है। उनका कहना है कि यह लिमिट बहुत कम है और इसे बढ़ाने से रिटायरमेंट के लिए सेविंग्स में लोगों की दिलचस्पी बढ़ेगी। एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि बढ़ते लिविंग कॉस्ट को देखते हुए यह लिमिट कम है। साथ ही अगर इससे होने वाली टैक्स सेविंग्स को देखा जाए तो सबसे ज्यादा टैक्स ब्रैकेट में भी यह हर महीने सिर्फ 1,250 रुपये आता है। इसे बढ़ाकर 1 लाख रुपये तक करने की जरूरत है।