इस महीने आने वाले यूनियन बजट पर अर्थशास्त्रियों, इनवेस्टर्स, कंपनियों और बिजनेसेज सहित सभी वर्गों की नजरें लगी हैं। इसकी वजह यह है कि यह केंद्र की नई एनडीए सरकार का पहला बजट है। इससे सरकार की इकोनॉमिक पॉलिसी की दिशा का पता चलेगा। साथ ही इस पर भी नजरें लगी हैं कि सरकार फिस्कल कंसॉलिडेशन और वेल्फेयर स्कीम्स के बीच किस तरह संतुलन बैठाती है।
