Budget 2024 : केंद्रीय बजट से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल सकता है बड़ा बूस्टर डोज - एक्सपर्ट्स

उपभोग या निवेश के दो तरीकों के बीच निवेश का तरीका इकोनॉमी को बूस्ट देने के लिए इस समय भारत के लिए ज्यादा बेहतर है। बजट में उपभोग व्यय को बढ़ावा देने के बजाय निवेश को वरीयता देकर विकास पर फोकस करना होगा

अपडेटेड Jan 31, 2024 पर 7:03 PM
ईवाई इंडिया के चीफ पॉलिसी एडवाइजर डीके श्रीवास्तव ने कहा कि बजट में उपभोग व्यय को बढ़ावा देने के बजाय निवेश को वरीयता देकर विकास पर फोकस करना होगा

Budget 2024 : एक्सपर्ट्स का कहना है कि आगामी केंद्रीय बजट में डायरेक्ट कैश ट्रांसफर या सोशल सेफ्टी नेट के रूप में ग्रामीण अर्थव्यवस्था की कल्याणकारी योजनाओं के लिए कुछ एलान हो सकते हैं। लेकिन सीधे खपत को बढ़ावा देने के लिए किसी बड़े एलान की उम्मीद नहीं हैं। क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी ने मनीकंट्रोल के प्री-बजट पैनल डिस्कशन में कहा “मुझे नहीं लगता कि सरकार बजट में खपत को बढ़ावा देने के लिए कोई एलान करेगी। सरकार की फिस्कल पॉलिसी अर्थव्यवस्था में प्रत्यक्ष उपभोग को बढ़ावा देने के बजाय पूंजीगत व्यय बढ़ाने के पक्ष में है। क्या सरकार पिछले साल की तरह ही पूंजीगत व्यय बढ़ाने में सक्षम होगी, यह एक अहम सवाल है। राजकोषीय घाटे में कमी के पीछे का गणित कुछ हद तक पूंजीगत व्यय में कमी पर निर्भर करता है। हालांकि मेरा मानना ​​है कि पूंजीगत व्यय अभी भी जीडीपी की तुलना में तेजी से बढ़ेगा”।

उन्होंने आगे कहा कि जहां तक कुछ कल्याणकारी योजनाओं की जरूरत का सवाल है तो ग्रामीण इलाकों में इसकी जरूरत ज्यादा है क्योंकि खेती-किसानी का हाल अच्छा नहीं रहा है। ऐसे में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को कुछ सपोर्ट मिलने की संभावना है। यह सपोर्ट डायरेक्ट ट्रांसफर के रूप में या सोशल सेफ्टी नेट के रूप में आ सकती है क्योंकि दोनों के अलग-अलग असर होते हैं। जोशी ने कहा, "सरकार अर्थव्यवस्था की उत्पादक क्षमता बढ़ाने पर अपना जोर बनाए रखेगी, जो निवेश पर केंद्रित है।"

ईवाई इंडिया (EY India) के चीफ पॉलिसी एडवाइजर डीके श्रीवास्तव ने कहा कि बजट में उपभोग व्यय को बढ़ावा देने के बजाय निवेश को वरीयता देकर विकास पर फोकस करना होगा। उपभोग या निवेश के दो तरीकों के बीच निवेश का तरीका इकोनॉमी को बूस्ट देने के लिए इस समय भारत के लिए ज्यादा बेहतर है। जहां तक बड़े लक्ष्य की बात है तो इसका उद्देश्य प्रति व्यक्ति आय बढ़ाना और फिर एक विकसित देश बनना है।


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वहीं, सिटीग्रुप के अर्थशास्त्री, समीरन चक्रवर्ती का कहना है कि भारत के इकोनॉमिक साइकिल में आमतौर पर डिमांड साइड पहले आगे बढ़ता है और फिर सप्लाई साइड के उच्चतम बिंदु तक पहुंच जाता है। अब क्योंकि सप्लाई साइड का उतना विस्तार नहीं होता है जिसके चलते उच्च महंगाई दर, उच्च चालू खाता घाटा जैसी कमजोरियां देखने को मिलती हैं। लेकिन “इस बार, हम उलटा देख रहे हैं जहां सप्लाई साइड बहुत तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन डिमांड में कमजोरी दिख रही है। मुख्य चुनौती यह है कि हम इस डिमांड को सप्लाई के मुताबिक कैसे बढ़ाएं। ऐसा होने पर हमारे पास अधिक विश्वसनीय और स्थिर संतुलन होगा जो यह सुनिश्चित करेगा कि हमारे पास अधिक टिकाऊ दीर्घकालिक विकास रणनीति है”।

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