Budget 2024 expectations: 69% सीईओ ने कहा-सरकार को टैक्स के नियमों को आसान बनाना चाहिए, मनीकंट्रोल सर्वे के नतीजे

India Budget 2024: इस सर्वे में शामिल ज्यादातर सीईओ का कहना था कि एनर्जी रिफॉर्म्स पर भी सरकार का फोकस बना रहेगा। 14 फीसदी सीईओ ने कहा कि सरकार लोकलुभावन कदमों पर फोकस बढ़ा सकती है। इसका मतलब है कि सब्सिडी, कैश ट्रांसफर और वेल्फेयर प्रोग्राम पर सरकार खर्च बढ़ा सकती है

अपडेटेड Jul 16, 2024 पर 1:09 PM
Budget 2024 expectations: सर्वे में शामिल 24 फीसदी सीईओ ने कहा कि सरकार को टैक्स के नियमों को आसान बनाने को अपनी प्राथमिकता में शामिल करना चाहिए। 15 फीसदी सीईओ ने कहा कि फिस्कल कंसॉलिडेशन सरकार की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।

इंडिया इंक का कहना है कि केंद्र की नई एनडीए सरकार का फोकस बड़े रिफॉर्म्स पर बना रहेगा। मनीकंट्रोल और डेलॉयट के सर्वे से यह जानकारी मिली है। इस सर्वे में शामिल 69 फीसदी सीईओ ने कहा कि रिफॉर्म्स में सरकार का फोकस पूंजीगत खर्च, टैक्स के नियमों को आसान बनाने, रेवेन्यू बढ़ाने, गवर्नेंस और एनर्जी पर रहेगा। इस सर्वे में 78 कंपनियों के सीईओ ने हिस्सा लिया। इनमें अलग-अलग सेक्टर की कंपनियां शामिल थीं।

एनर्जी रिफॉर्म्स पर भी रहेगा फोकस

इस सर्वे में शामिल ज्यादातर सीईओ का कहना था कि एनर्जी रिफॉर्म्स पर भी सरकार का फोकस बना रहेगा। 14 फीसदी सीईओ ने कहा कि सरकार लोकलुभावन कदमों (Populist Measures) पर फोकस बढ़ा सकती है। इसका मतलब है कि सब्सिडी, कैश ट्रांसफर और वेल्फेयर प्रोग्राम पर सरकार खर्च बढ़ा सकती है। इससे पूंजीगत खर्च और इंफ्रास्ट्रक्चर पर उसका ध्यान घट सकता है। 13 फीसदी सीईओ का मानना था कि इकोनॉमिक रिफॉर्म्स की सरकार की कोशिशों में कमी आ सकती है।


इनवेस्टमेंट और ट्रेड रिफॉर्म्स पर भी फोकस रहेगा

इस साल लोकसभा चुनावों के नतीजों में BJP को अपने दम पर सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिली। केंद्र की नई एनडीए सरकार सहयोगी दलों पर निर्भर है। इनमें TDP और JDU प्रमुख हैं। यह पूछने पर ग्रोथ बढ़ाने के लिए सरकार का सबसे ज्यादा फोकस किस रिफॉर्म पर होगा, 37 फीसदी सीईओ ने कहा जवाब में इनवेस्टमेंट और ट्रेड रिफॉर्म्स कहा। उन्होंन कहा कि एक्सपोर्ट बढ़ाने और विदेशी निवेश पर भी सरकार का फोकस होना चाहिए।

मिडिल क्लास को टैक्स में मिल सकती है राहत

सर्वे में शामिल 24 फीसदी सीईओ ने कहा कि सरकार को टैक्स के नियमों को आसान बनाने को अपनी प्राथमिकता में शामिल करना चाहिए। 15 फीसदी सीईओ ने कहा कि फिस्कल कंसॉलिडेशन सरकार की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। सरकार को पूंजीगत खर्च में कमी किए बगैर फिस्कल डेफिसिट के 4.5 फीसदी लक्ष्य को हासिल करने की कोशिश करनी चाहिए। इस बार बजट से पहले यह चर्चा काफी गर्म है कि सरकार मिडिल क्लास को इनकम टैक्स में राहत दे सकती है। इससे कंज्यूमर डिमांड बढ़ाने में मदद मिलेगी।

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FY26 तक फिस्कल डेफिसिट 4.5% पर लाने पर जोर

इस साल 1 फरवरी को पेश अंतरिम बजट में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने फिस्कल डेफिसिट के लिए 5.1 फीसदी का टारगेट तय किया था। उन्होंने यह भी कहा था कि सरकार की कोशिश FY26 तक फिस्कल डेफिसिट को घटाकर 4.5 फीसदी तक लाने पर होगी। 14 फीसदी सीईओ ने कहा कि सरकार का फोकस लैंड और लेबर रिफॉर्म पर हो सकता है। सरकार ने 2020 में लेबर लॉ को आसान बनाने की कोशिश की थी। इसके लिए 44 कानूनों की जगह सिर्फ चार बड़े कानून बनाए गए थे। लेकिन, इन्हें अभी लागू नहीं किया गया है।

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