Budget 2024 : यूनियन बजट (Union Budget 2024) में सरकार डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्स में बदलाव का प्रस्ताव पेश करती है। कई बार ये बदलाव बुनियादी होते हैं तो कई बार मामूली बदलाव होते हैं। यूनियन बजट 2023 में वित्तमंत्री Nirmala Sitharaman ने इनकम टैक्स की नई रीजीम में कई बदलाव के ऐलान किए थे। यहां तक कि 2019 में पेश अंतरिम बजट में भी इनकम टैक्स के नियमों में कई बदलाव के ऐलान किए गए थे। तब केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने 1 फरवरी, 2019 को अंतरिम बजट पेश किया था। उन्होंने सालाना 5 लाख रुपये तक की इनकम पर रिबेट का ऐलान किया था, जिससे इतनी इनकम वाले लोगों की टैक्स लायबिलिटी जीरो हो गई थी। स्टैंडर्ड डिडक्शन को भी 40,000 से बढ़ाकर 50,000 रुपये सालाना कर दिया था। 1 फरवरी, 2024 को पेश होने वाला यूनियन बजट अंतरिम बजट होगा। इसकी वजह यह है कि अगले साल लोकसभा चुनाव होने वाले हैं। चुनाव के बाद जो नई सरकार बनेगी वह जुलाई में पूर्ण बजट पेश करेगी।
सरकार संसद में पेश करती है वित्त विधेयक
टैक्स के नियमों में किसी तरह का बदलाव वित्त विधेयक (Finance Bill) के जरिए होता है। इस वजह से वित्त विधेयक को बजट का अहम हिस्सा माना जाता है। सरकार Union Budget में टैक्स से जुड़े नियमों में बदलाव का ऐलान करती है। उस बदलाव को उसे वित्त विधेयक के रूप में संसद में पेश करना पड़ता है। वित्त विधेयक के प्रस्तावों पर संसद में व्यापक चर्चा होती है। चर्चा के दौरान टैक्स से जुड़े नियमों में संशोधन के प्रस्ताव आते हैं। सरकार जरूरी संशोधनों को वित्त विधेयक का हिस्सा बना सकती है।
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद वित्त विधेयक फाइनेंस एक्ट बन जाता है
संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा में चर्चा के बाद वित्त विधेयक को पारित कर दिया जाता है। पूर्ण बजट पेश होने के बाद सरकार आम तौर पर फरवरी के अंतिम हफ्ते में वित्त विधेयक को संसद में पेश करती है। इसे वित्त मंत्री की तरफ से पेश किया जाता है। संसद के दोनों सदनों में पारित होने के बाद इसे राष्ट्रपति के पास भेज दिया जाता है। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद फाइनेंस बिल फाइनेंस एक्ट बन जाता है। फिर यह नए वित्त वर्ष से लागू हो जाता है।
यूनियन बजट में टैक्स से जुड़े ऐलान पर होती है सबसे ज्यादा नजर
हर यूनियन बजट में लोगों की सबसे ज्यादा निगाहें टैक्स खासकर इनकम टैक्स में होने वाले बदलाव पर होती हैं। इसकी वजह है कि इनकम टैक्स में होने वाले बदलाव का सीधा असर लोगों की जेब पर पड़ता है। पिछले कुछ सालों में सरकार इनकम टैक्स सिस्टम को आसान बनाने की कोशिश कर रही है। इसी मकसद को ध्यान में रख सरकार ने इनकम टैक्स की नई रीजीम की शुरुआत की है। यह उन टैक्सपेयर्स के लिए फायदेमंद हैं, जो टैक्स सेविंग्स के लिए सेक्शन 80सी के तहत आने वाले इंस्ट्रूमेंट्स का इस्तेमाल नहीं करते हैं।