'फोर बैलेंस सीट चैलेंज' का मतलब उस वित्तीय दबाव से है जिसका सामना इकोनॉमी के चार सेक्टर्स को करना पड़ रहा है। इनमें बैंक, इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियां, नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनीज (एनबीएफसी) और रियल एस्टेट कंपनियां शामिल हैं। यह चैलेंज पहले के 'ट्विन बैलेंस शीट प्रॉब्लम' से आया है। फोर बैलेंस शीट चैलेंज देश की इकोनॉमिक स्टैबिलिटी और ग्रोथ के लिए काफी अहम है। ट्विन बैलेंसशीट प्रॉब्लम की चर्चा अरविंद सुब्रमण्यन ने 2016-17 के इकोनॉमिक सर्वे में की थी। सुब्रमण्यन सरकार के चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर रह चुके हैं।
