Budget 2024 expectations: सरकार आर्थिक सुधार पर फोकस करेगी या आम लोगों को राहत देने की कोशिश करेगी?

India Budget 2024: केंद्र की नई एनडीए सरकार का पहला बजट ऐसे वक्त आ रहा है, जब राजनीति का परिदृश्य बदल गया है। हाल में हुए लोकसभा चुनावों में BJP को उन राज्यों में हार का सामना करना पड़ा है, जिनमें उसकी सरकार है। ऐसे में सरकार को यह चुनना होगा कि वह रिफॉर्म पर फोकस करेगी या आम आदमी को राहत देगी

अपडेटेड Jul 12, 2024 पर 10:36 AM
Budget 2024-25: निर्मला सीतारमण पर यह आरोप लगता रहा है कि उन्होंने टैक्स चुकाने वाले मिडिल क्लास को राहत नहीं दी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार 23 जुलाई को पेश होने वाले बजट में ऐसे ऐलान से बचने की कोशिश करेगी, जिससे बाद में उसे अपना बचाव करने को मजबूर होना पड़े। इस सरकार पर 'सूट बूट की सरकार' के आरोप लगते रहे हैं। इसका मतलब यह है कि सरकार का रुख बड़े बिजनेसेज को लेकर मुलायम रहा है। 2024 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी को उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, कर्नाटक और राजस्थान में हार का सामना करना पड़ा। खास बात यह है कि सिर्फ पश्चिम बंगाल को छोड़ इन सभी राज्यों में बीजेपी की सरकार है। यह हार बताती है कि कि बुनियादी अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की जरूरत है। स्कीमों पर फोकस बढ़ाकर यह काम किया जा सकता है। बीजेपी जानती है कि ऐसा करना चैलेंजिंग है। सरकार की चर्चा में शामिल एक सूत्र ने बताया कि सरकार को इस बात का भरोसा नहीं है कि इकोनॉमी पूरी तरह से मजबूत स्थिति में है।

सरकार के पास खर्च करने के लिए पैसे हैं

सरकार के पास खर्च करने की क्षमता है। उसे RBI से 2.1 लाख करोड़ रुपये मिले हैं, जो उम्मीद से ज्यादा है। यह एनालिस्ट्स के 1 लाख करोड़ के अनुमान से ज्यादा है। यह FY23 में मिले 87,419 करोड़ रुपये के डिविडेंड से भी ज्यादा है। एक सूत्र ने कहा कि अगर उनके (सरकार) पास खर्च करने की गुंजाइश है तो वे बाद में अफसोस करने की जगह इसे खर्च कर सकते हैं। उम्मीद है कि सरकार फिस्कल कंसॉलिडेशन (Fiscal Consolidation) पर फोकस बनाए रखेगी। उसका टारगेट फाइनेंशियल ईयर 2025-26 तक फिस्कल डेफिसिट 4.5 फीसदी लाने पर होगा।


5 से 15 लाख तक इनकम वाले लोगों को टैक्स में राहत

बजट की प्राथमिकताओं से जुड़े एक सूत्र ने बताया, "रेटिंग एजेंसियों जो कह रही हैं वह सरकार के लिए अहम है और लोगों को पसंद आने वाले काम (Populism) राज्यों के जरिए हो सकते हैं।" इनकम टैक्स में कमी का असर एक वर्ग पर पड़ेगा, लेकिन यह वर्ग ऐसे लोगों का है जो सबसे ज्यादा शोर मचाते हैं। उपभोक्ता खर्च (Consumer Spending) बढ़ाने के लिए सरकार 5 लाख से 15 लाख रुपये तक कमाने वाले लोगों के लिए इनकम टैक्स घटाने पर विचार कर रही है। वित्तमंत्री बनने के बाद से निर्मला सीतारमण सोशल मीडिया पर काफी ट्रोल हुई हैं। उन पर यह एक बड़ा आरोप लगता रहा है कि सरकार ने टैक्स चुकाने वाले मिडिल क्लास के लिए पर्याप्त नहीं किया है।

सहयोगी दलों की मांग का भी रखना होगा ध्यान

इस बार सरकार के सामने सहयोगी दलों खासकर TDP और JDU की तरफ से कई गई मांग भी हैं। बिहार और आंध्र प्रदेश को स्पेशल पैकेज या विशेष दर्जा देने से भानुमती का पिटारा खुल जाएगा। स्पेशल स्टेटस की परिभाषा को लेकर काफी चर्चा हो चुकी है। स्पेशल पैकेज से एक खराब नजीर बनेगी। इसलिए सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर क्रिएशन पर फोकस करते हुए राज्यों से जुड़ी कुछ स्कीम के लिए ऐलोकेशन बढ़ा सकती है।

उत्पाद शुल्क में कमी से बड़ा रेवेन्यू लॉस

उत्पाद शुल्क (Excise Duty) में कमी की भी संभावना है। पेट्रोलियम मिनिस्टर हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि सरकार ने नवंबर 2021 और मई 2022 के बीच पेट्रोल पर 13 रुपये और डीजल पर 16 रुपये प्रति लीटर की कमी उत्पाद शुल्क में की है। एक अनुमान के मुताबिक, अगर सरकार फ्यूल पर एक्साइज ड्यूटी एक रुपये घटाती है तो इससे 124-140 अरब रुपये का रेवेन्यू लॉस हो सकता है। हालांकि, एक्साइज ड्यूटी में कमी से कंजम्प्शन को बढ़ावा मिलेगा।

संरक्षण के उपायों से इंडस्ट्री की प्रतिस्पर्धी क्षमता घटेगी

एक्सपर्ट्स ने मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर वापस लेने की सलाह दी है। इसे देश में सप्लाई चेन ईकोसिस्टम बनाने के लिए शुरू किया गया था। हालांकि, इंडस्ट्री एसोसिएशंस ने अपील की है कि संरक्षण की ऐसी कोशिश इंडियन इंडस्ट्री की प्रतिस्पर्धी क्षमता के लिए नुकसानदायक है। सरकार ने कस्टम ड्यूटी में पहले जो बदलाव किए थे, उसे पलट सकती है। यह सच्चाई है कि वियतनाम जैसे देश लोकल सोर्सिंग के आसान नियम की बदौलत इंडिया से काफी आगे निकल गए है। यह इंडिया में पॉलिसी बनाने वाले लोगों के लिए एक सबक है।

अग्निवीर स्कीम ने बढ़ाया सिरदर्द

सरकार की अग्निवीर स्कीम को लेकर भी कई तरह के सवाल उठाए जाते रहे हैं। इसे डिफेंस फोर्सेज के बढ़ते पेंशन बिल को कम करने के लिए लाया गया था। लेकिन, यह लोगों को पसंद नहीं आई है। सहयोगी दलों ने इसे खत्म करने की मांग की है। अगर सरकार इस स्कीम को खत्म करती है तो इसका मतलब एक बड़े फिस्कल रिफॉर्म से पीछे हटना होगा। उधर, हर घर नल और पीएम आवास योजना काफी सफल रही हैं। इन पर सरकार का फोकस जारी रहेगा।

पीएम किसान सम्मान निधि जैसी स्कीम के लिए ज्यादा ऐलोकेशन

सरकार व्यापक असर वाली पीएम किसान सम्मान निधि जैसी बुनियादी स्कीमों के लिए ऐलोकेशन बढ़ा सकती है। एक सूत्र ने बताया, "स्कीम के साथ एक खास बात यह है कि अगर एक बार आप इसे शुरू कर देते हैं तो इसे वापस नहीं ले सकते। और आरबीआई का डिविडेंड अगले साल नहीं होगा। ऐसे में यह उम्मीद लगती है कि सरकार लोगों से जुड़ी स्कीमों की जिम्मेदारी राज्य सरकार पर छोड़ सकती है।"

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शेयरों पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स बढ़ाने की चर्चा

एक दूसरे सूत्र ने बताया है कि सरकार शेयरों पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स बढ़ा सकती है। यह फैसला आर्थिक से ज्यादा राजनीतिक होगा। यह एक ऐसे समुदाय के खिलाफ होगा, जो सरकार को सपोर्ट करता है। लेकिन, इससे सूट बूट की सरकार जैसे आरोप कमजोर पड़ेंगे। गणित यह बताता है कि इस समय सरकार के पास पैसा है। फिस्कल प्रूडेंस के रास्ते पर आगे कदम बढ़ाने के लिए सरकार के पास आरबीआई का डिविडेंड है। इकोनॉमिस्ट्स का मानना है कि फिस्कल डेफिसिट को 5.1 फीसदी के टारगेट से कम करने की कोई वजह नहीं है।

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इस बार फोकस बड़ी चीजों की जगह छोटी चीजों पर होगा

सरकार की इच्छा कई सेक्टर खासकर किसान, एमएसएमई पर खर्च बढ़ाने और उन्हें मदद करने की है। रेलवे, पावर और वाटर जैसे सेक्टर को भी बढ़ावा मिल सकता है। सरकार टेक्सटाइल्स के लिए पीएलआई स्कीम में बदलाव कर उसमें गारमेंट्स को शामिल कर सकती है। पर्यटन सेक्टर में रोजगार के मौके पैदा करने की क्षमता है। कुल मिलाकर यह ऐसा बजट हो सकता है जिसमें सरकार की प्राथमिकता बड़ी चीजों की जगह छोटी चीजों पर होगी।

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