Budget 2024 poetry: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) लंबे बजट भाषणों (Budget 2024 Speech) के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने दशकों के कई रिकॉर्ड तोड़ते हुए लगभग 2 और ढाई घंटों लंबे भाषण दिए हैं। इतने लंबे भाषणों में आंकड़े और डेटा की भरमार रहती है। ऐसे में बजट सत्र को थोड़ा रोमांच से भरने के लिए बीच-बीच में वित्त मंत्री शायराना हो जाते हैं। सिर्फ निर्मला सीतारमण ही नहीं बल्कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली का नाम भी इस लिस्ट में आता है। खैर बीते वर्ष की भांति इस साल भी सदन में किसी भी तरह की कविता सुनने को नहीं मिली। आइए बजट को डिकोड करने की इस होड़ से एक पल विराम का लीजिए और देखिए मंत्रियों का शायराना अंदाज-
मनमोहन सिंह को सीरियस लेने की ना करें भूल, सदन में शायरियों से बटोरते थे वाहवाही
पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को सभी काफी शांत और सौम्य किस्म का इंसान के तौर पर जानते हैं। वो अपनी दूरदर्शिता से लोगों को हमेशा हैरानी में डालते थे। जब डॉ. मनमोहन सिंह देश के वित्त मंत्री थे तो साल 1991-92 में बजट पेश करने के दौरान उन्होंने एक शेर पेश किया। इस शेर के जरिए उन्होंने भारत की ऐतिहासिकता और उसकी किसी भी परिस्थति का डटकर मुकाबला करने की भावना को बताया। कहते हैं कि 'यूनान-ओ-मिस्र-ओ-रोमा सब मिट गए जहां से, अब तक मगर है बाकी नामोनिशान हमारा।’ ये मुहम्मद इकबाल की काफी प्रसिद्ध कविता ‘सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा’ से ली गई पंक्तियां हैं।
इसके बाद साल1 992-93 में उन्होंने सदन में फिर शेर पढ़ा - 'तारीखों में ऐसे भी मंजर हमने देखे हैं, कि लम्हों ने खता की थी और सदियों ने सजा पाई।’ ये शेर प्रसिद्ध शायर मुजफ्फर रज्मी ने लिखा है।
यशवंत सिन्हा भी शेयर के जरिए काफी गहरी बात कह देते हैं
अरुण जेटली ने बांधा शायरी से समां
साल 2016 के बजट के दौरान अरूण जेटली ने अपने बजट भाषण में एक उर्दू की नज्म पढ़ी थी। इस नज्म के जरिए विपक्षियों पर करारा हमला किया था। इसके साथ ही भाजपा के सामने पेश मुसीबतों के बारे में भी सदन में बताया। कहते हैं कि ‘कश्ती चलाने वालों ने जब हार कर दी पतवार हमें, लहर लहर तूफान मिलें और मौज-मौज मझधार हमें, फिर भी दिखाया है हमने और फिर ये दिखा देंगे सबको, इन हालातों में आता है दरिया करना पार हमें।’
निर्मला सीतारमण ने भी बजट सत्र के दौरान जब शेयरो शायरी से किया विपक्ष पर हमला
2019 के बजट सत्र के दौरान केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उर्दू लेखिका मंजूर हाशमी की लाइनें पढ़ी थीं। 'यकीन हो तो कोई रास्ता निकलता है, हवा की ओट भी ले कर चिराग जलता है।' ये तंज विपक्ष पर था। साथ ही वो भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास को लेकर भी आश्वासन दिलाया था।
2020 में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कश्मीरी कवि और साहित्य अकादमी विजेता पंडित दीनानाथ कौल की लिखी गई एक कविता का पाठ किया था। 'हमारा वतन शालीमार बाग जैसा, हमारा वतन डल झील में खिलते कमल जैसा, हम वतन नौजवानों के गर्म खून जैसा, हमारा वतन दुनिया का सबसे प्यारा वतन...।' वित्त वर्ष 2023-24 का बजट पेश करते समय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कोई भी शायरी या कविता नहीं पढ़ी थी। यही 2024 के अंतरिम बजट में भी देखा गया।