Budget 2022: केंद्र सरकार आगामी बजट में वित्त वर्ष 2023 के लिए अपने विनिवेश लक्ष्य को वित्त वर्ष 2022 के लिए तय किए 1.75 लाख करोड़ के लक्ष्य से अधिक रख सकती है। लाइवमिंट ने इस मामले से वाकिफ दो सूत्रों के आधार पर यह जानकारी दी है। हालांकि सूत्रों ने यह भी कहा कि यह काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन (LIC) के आईपीओ का प्रदर्शन कैसा रहता है।
द इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने इस वित्त वर्ष में अब तक विभिन्न कंपनियों का निजीकरण करने और अपनी हिस्सेदारी बेचकर 2,300 करोड़ रुपये जुटाए हैं। इसमें से 9,329.90 करोड़ रुपये को NMDC, HUDCO और SUUTI में एक्सिस बैंक में हिस्सेदारी बेचकर जुटाया गया है।
फिलहाल केंद्र सरकार 31 मार्च से पहले एलआईसी के आईपीओ को लाकर मौजूदा वित्त वर्ष में अपने विनिवेश घाटे को पूरा करना चाहती है। ब्लूमबर्ग ने एक रिपोर्ट में बताया कि लिस्टिंग की प्रक्रिया अच्छी तरह से आगे बढ़ रही है और सरकार 31 जनवरी तक मार्केट रेगुलेटर के पास आईपीओ का ड्राफ्ट पेपर दाखिल करने की योजना बना रही है।
एक सूत्र ने बताया, "एलआईसी की यहां भूमिका काफी अहम है। अगर यह इस साल आ जाता है, तो अगले वित्त वर्ष के लिए लक्ष्य बदल सकता है।" साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगले वित्त वर्ष के लिए विनिवेश लक्ष्य इस वर्ष की तुलना में थोड़ा अधिक हो सकता है।
वहीं एक अन्य सूत्र ने बताया कि वित्त वर्ष 2023 के लिए विनिवेश लक्ष्य को बढ़ाने पर चर्चा चल रही है और इस मुद्दे पर जल्द ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
वित्त मंत्रालय और डिपार्टमेंट ऑफ इनवेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (DIPAM) ने इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की।
हालांकि कुछ अर्थशास्त्रियों का कहना है सरकार अगर इसी वित्त वर्ष में LIC को शेयर बाजार में लिस्ट करा लेती है, तो अगले साल का विनेविश लक्ष्य कम हो सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि फिर सरकार के पास अगले वित्त वर्ष में अपनी हिस्सेदारी बेचने के लिए कोई बड़ा मौका नहीं बचेगा।