Economic Survey 2023: संसद में पेश किए गए इकोनॉमिक सर्वे 2023 में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2024 में महंगाई वित्त वर्ष 2023 के तुलना में कम रहेगी। आज के सर्वे में महंगाई से निपटने के लिए आरबीआई और सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की प्रशंसा करते हुए कहा गया है “हमारे प्रयासों की तुलना उन्नत अर्थव्यवस्थाओं के साथ की जा सकती है जो अभी भी ऊंची महंगाई दर से जूझ रहे हैं”।
इस सर्वे में कहा गया है कि महंगाई बढ़ने की मुख्य वजह अंतर्राष्ट्रीय क्रूड ऑयल की कीमतें है। क्रूड की कीमतें अब सामान्य स्तर पर आती दिख रही हैं। इसी तरह दूसरी अहम कमोडिटीज की कीमतों में भी गिरावट हुई है। इसके अलावा विकसित देशों में मंदी की आशंका के चलते ग्लोबल कमोडिटी प्राइस में बढ़ोतरी की आशंका वित्त वर्ष 2023 की तुलना में वित्तवर्ष 2024 में काफी कम है।
वित्त वर्ष 2023 में खुदरा महंगाई दर औसतन 6.5 फीसदी के आसपास रहने की उम्मीद है। आरबीआई का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2024 की पहली तिमाही में देश की खुदरा महंगाई दर 5 फीसदी रह सकती है। उसके बाद दूसरी तिमाही में ये 5.4 फीसदी पर रह सकती है।
आज आए इकोनॉमिक सर्वे में अलर्ट जारी करते हुए ये भी कहा गया है कि की ऐसे कई कारण हैं जिनके चलते आगे महंगाई में बढ़त का भी खतरा है। अगर चीन में COVID-19 के मामले बढ़ते हैं तो सप्लाई चेन में दिक्कत हो सकती है। इसके अलावा अगर अमेरिका में मंदी बहुत नहीं गहराती है तो भी कमोडिटी की कीमतें बढ़ सकती हैं। इसकी वजह से महंगाई बढ़ने का खतरा हो सकता है।
इस सर्वे में बताया गया है कि तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, हरियाणा और आंध्र प्रदेश में 2023 में सबसे ज्यादा महंगाई देखने को मिली है। महंगाई बढ़ाने में सबसे ज्यादा योगदान ईंधन और कपड़ों का रहा है। असम, हरियाणा, मध्य प्रदेश, मणिपुर, मिजोरम, ओडिशा, उत्तराखंड,पश्चिम बंगाल और दिल्ली में ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी क्षेत्रों की तुलना में महंगाई की दर ज्यादा रही है।