Economic Survey 2023:31 जनवरी को संसद में पेश इकोनॉमिक सर्वे 2022-23 में कहा गया है कि भारतीय बाजार इस समय दुनिया के दूसरे बाजारों की तुलना में महंगे नजर आ रहे हैं। इस सर्वे में आगे कहा गया है कि भारतीय बाजारों का वैल्यूएशन MSCI के तमाम इंडेक्स जैसे MSCI World Index, MSCI Emerging Markets Index और MSCI BIC Index की तुलना में काफी महंगे नजर आ रहा हैं। निफ्टी 50 इस समय अपने पीई रेशियो (प्राइस-टू-अर्निंग रेशियो) के 21.8 गुना पर ट्रेड कर रहा है। वहीं ऊपर बताए गए MSCI इंडेक्स 17.1 गुने से लेकर 12.2 गुने पर ट्रेड कर रहे हैं।
गौरतलब है कि MSCI वर्ल्ड इंडेक्स में दुनिया के 23 विकसित बाजारों के लार्ज कैप और मिड कैप शेयर शामिल होते हैं। जबकि MSCI इमर्जिंग मार्केट इंडेक्स में 24 उभरते बाजारों के लार्ज और मिड कैप शेयर शामिल होते हैं। वहीं MSCI BIC इंडेक्स एक फ्री फ्लोट-एडजस्टेड मार्केट कैपिटलाइजेशन वेटेड इंडेक्स है। इसको ब्राजील, चीन और भारत जैसे उभरते बाजारों के प्रदर्शन को मापने के लिए डिजाइन किया गया है।
आज आए इकोनॉमिक सर्वे में यह भी कहा गया है कि दुनिया के दूसरे बाजारों की तुलना में महंगे होने के बावजूद भारतीय बाजारों का वैल्यूएशन अभी भी पिछले 5 साल के औसत से कम है। निफ्टी का पिछले 5 साल का औसत पीई यानी प्राइस टू अर्निंग रेशियो 27.4 गुना है।
बाजार में मजबूती कायम
आज आए इकोनॉमिक सर्वे में कहा गया है कि अप्रैल-दिसंबर 2022 की अवधि में भारतीय स्टॉक मार्केट ने मजबूत प्रदर्शन किया है। इस अवधि में ब्लूचिप इंडेक्स निफ्टी-50 ने 3.7 फीसदी रिटर्न दिया है। ग्लोबल स्टॉक मार्केट में जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता की वजह से आई गिरावट के बावजूद भारतीय बाजारों ने मजबूत प्रदर्शन किया है। इसी अवधि में अमेरिका का S&P 500 इंडेक्स 15.3 फीसदी टूटा है। वहीं नैस्डैक 26.4 फीसदी फिसला है।
भारत ने चीन, ब्राजील, साउथ कोरिया फ्रांस, जर्मनी, हॉन्ग कॉन्ग और यूके की तुलना में किया बेहतर प्रदर्शन
इस सर्वे में कहा गया है कि अगर बाजार का प्रदर्शन लोकल करेंसी के आधार पर देखा जाए तो भारत ने चीन, ब्राजील, साउथ कोरिया फ्रांस, जर्मनी, हॉन्ग कॉन्ग और यूके की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है। इस सर्वे में ये भी कहा गया है कि विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली के बावजूद भारतीय बाजार ने मजबूत प्रदर्शन किया है। वोलैटिलिटी इंडेक्स इंडिया विक्स भी अप्रैल-दिसंबर 2022 की अवधि में गिरा है। इसका मतलब ये है कि बाजार में वोलैटिलिटी कम हुई है। ये दोनों स्थितियां इस बात को स्पष्ट करती हैं कि विदेशी निवेशकों में भारत के मैक्रो इकोनॉमिक फंडामेंटल्स और तुलनात्मक रूप से बेहतर मांग की स्थिति को लेकर भरोसा बना हुआ है।
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