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ग्रोथ पर हो फोकस, या वित्तीय घाटे पर अंकुश जरूरी!

इस बार वित्तीय घाटे को घटाने या ग्रोथ पर खर्चा बढ़ाने को लेकर चर्चा और सालों से जोरदार है।

MoneyControl Newsअपडेटेड Feb 24, 2016 पर 12:44 PM
ग्रोथ पर हो फोकस, या वित्तीय घाटे पर अंकुश जरूरी!

संतोष नायर
Editor, moneycontrol.com

हर बार केंद्रीय बजट आर्थिक समझदारी और ग्रोथ को बढ़ाने वाले खर्चों के बीच सामंजस्य बिठाने वाला संतुलित लेखाजोखा होता है। लेकिन इस बार वित्तीय घाटे को घटाने या ग्रोथ पर खर्चा बढ़ाने को लेकर विचार और चर्चा और सालों से जोरदार तरीके से चल रही है।

अब तक की गई कोशिशों के बावजूद देश की आर्थिक रिकवरी की डगर ऊबड़-खाबड़ और असमान रही है लिहाजा वित्त मंत्री अरुण जेटली पर दबाव है कि वो अर्थव्यवस्था में निवेश की प्रक्रिया को बढ़ाने के लिए सरकारी खर्चों में इजाफा करें। ग्रोथ की पैरवी करने वाले तबके का मानना है कि खर्च बढ़ाने से भले ही ग्रोथ की अपेक्षित रफ्तार हासिल ना की जा सके लेकिन वित्तीय घाटा घटाने की पॉलिसी पर जोर देने से हमें कुछ हासिल नहीं होगा।  

वहीं वित्तीय अनुशासन पर जोर देने वाली आवाजों में सबसे मुखर और प्रभावी आवाज़ आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन की है। ब्राजील और रूस जैसे देश जो ग्रोथ के पीछे भागने का खामियाजा भुगत रहे हैं का उदाहरण देते हुए आरबीआई गवर्नर ने कहा है कि टिकाऊ ग्रोथ के लिए सबसे जरूरी चीज आर्थिक हालातों को स्थिर करना ही है। उन्होंने जोर देते हुए कहा है कि सरकारी खर्च बढ़ाने से अर्थव्यवस्था के अन्य हिस्सों पर गहरा असर नहीं पड़ेगा, बल्कि इस समय सरकारी खर्चे बढ़ाने के लिए अगर सरकार उधारी बढ़ाती है तो इससे देश में ब्याज दरें ही बढ़ेंगी जो आगे चलकर सरकारी खर्चों को और बढ़ाएंगी ही, कम नहीं करेंगी। इस समय सबसे आदर्श स्थिति यही होगी कि इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ाया जाए लेकिन इसके लिए बजट से अलग हटकर कुछ रास्ते खोजे जाएं।

पिछले साल के आर्थिक सर्वे में पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) करार के मौजूदा ढांचे में कुछ खामियों की ओर इशारा किया गया था और इनमें सुधार के सुझाव दिए गए थे जिससे इंफ्रा प्रोजेक्ट्स में निजी पूंजी आ सके। इन सुझावों पर तेजी से काम करते हुए जिनमें राज्यों को प्रयोग करने की आजादी देने और पेंशन इंश्योरेंस फंड जैसे लंबी अवधि के लिए पैसा लाने वाले फंड लाए जाने के फैसले लिए जाने की जरूरत है।

इस बजट में ग्रामीण इलाकों और सेक्टर के लिए कुछ अहम और बड़े पॉलिसी के कदम उठाए जाने की उम्मीद है। पिछले 2 साल से लगातार पड़े सूखे और असमान बारिश ने हालत खराब किए हैं तो इसकी काफी जरूरत भी है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में असमानता को दूर करने के लिए सरकार को बड़े पैमाने पर कृषि रिफॉर्म करने की जरूरत है। इनमें खाद्य उत्पादकता बढ़ाना, कृषि में मशीनों का उपयोग बढ़ाना, क्रेडिट तक किसानों की पहुंच बढ़ाना, फसल की उचित कीमत दिलाना और मार्केटिंग को नियमित करना जैसे कुछ अहम कदम उठाने जरूरी हैं।

वित्त मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि बजट में ऐसी पॉलिसी लाई जाएंगी जो सरकार की योजनाओं जैसे स्टार्टअप इंडिया, स्टैंडअप इंडिया, मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया और स्किल मिशन को बढ़ावा देंगी जो मुख्य तौर से रोजगार बढ़ाने में मदद करेंगी। इसके अलावा बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए भी कदम हो सकते हैं जैसे मंजूरी को जल्दी दिलाना, सरल टैक्स ढांचा और लेबर कानून रिफॉर्म पर ध्यान दिया जा सकता है।

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