Budget 2024- F&O ट्रेडर्स को राहत, अंतरिम बजट में STT में कोई बदलाव नहीं

Budget 2024- अंतरिम बजट में F&O मार्केट को राहत देते हुए securities transactions tax (STT) में कोई बदलाव नहीं किया गया है। वोट-ऑन-अकाउंट ये सरकार को चुनाव के बाद नई सरकार के कार्यभार संभालने तक भारत के कंसोलिडेटेड फंड से धन निकालने की अनुमति देता है। इसमें एसटीटी में कोई बदलाव नहीं किया

अपडेटेड Feb 01, 2024 पर 7:14 PM
तेजी से बढ़ रहे F&O बाजार को धीमा करने के लिए STT टैक्स को संशोधित किये जाने की आशंका थी। 18.24 लाख करोड़ रुपये के प्रत्यक्ष कर संग्रह के अनुमान में STT की हिस्सेदारी महज 1.5 प्रतिशत है

Budget 2024- अंतरिम बजट में फ्यूचर एंड ऑप्शंस (futures and options (F&O) मार्केट को राहत देते हुए प्रतिभूति लेनदेन कर (securities transactions tax (STT) में कोई बदलाव नहीं किया गया है। वोट-ऑन-अकाउंट ये सरकार को चुनाव के बाद नई सरकार के कार्यभार संभालने तक भारत की संचित निधि से धन निकालने की अनुमति देता है। इसमें एसटीटी में कोई बदलाव नहीं किया। ऐसी आशंका थी कि तेजी से बढ़ रहे F&O बाजार को धीमा करने के लिए STT टैक्स को संशोधित किया जाएगा। वास्तव में बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (Securities and Exchange Board of India) ने पार्टिसिपेंट्स को यह याद दिलाया था कि 10 में से 9 ट्रेडर्स F&O में पैसा गंवा देते हैं।

लेकिन अंतरिम बजट में इस पर कोई घोषणा नहीं होने से, 1 करोड़ रुपये के टर्नओवर पर ऑप्शन की बिक्री पर STT 6,250 रुपये और फ्यूचर्स बिक्री पर 1 करोड़ रुपये के टर्नओवर पर STT 1,250 रुपये रहेगा।

STT को 2004 में पेश किया गया था। यह विभिन्न प्रकार की सिक्योरिटीज से जुड़े लेनदेन पर लगाया जाता है। सभी शेयर बाजार लेनदेन जिनमें इक्विटी या इक्विटी डेरिवेटिव, जैसे फ्यूचर एंड ऑप्शन शामिल हैं इन पर STT लागू होगा जैसा कि म्यूचुअल फंड लेनदेन में लागू होता है।


पिछले बजट में STT को अपरिवर्तित रखा गया था लेकिन मार्च 2023 में वित्त विधेयक (Finance Bill in March 2023) में संशोधन के माध्यम से कर दरों को उस वर्ष बाद में संशोधित किया गया था।

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बता दें कि 18.24 लाख करोड़ रुपये के प्रत्यक्ष कर संग्रह (direct tax collection) के अनुमान में STT की हिस्सेदारी महज 1.5 प्रतिशत है।

यह कुल टैक्स का बहुत छोटा प्रतिशत लगता है। लेकिन इसके साथही वस्तु एवं सेवा कर (GST), स्टाम्प शुल्क और एक्सचेंज लेनदेन शुल्क जैसी सहायक रेवन्यू धाराएं भी हैं। मनीकंट्रोल के साथ बातचीत में Crosseas Capital Services के प्रबंध निदेशक राजेश बहेती ने पहले कहा था कि STT में कोई भी और बढ़ोतरी प्रॉपरायटरी ट्रेडर्स के लिए अच्छी नहीं हो सकती है, जिनके पास एफएंडओ वॉल्यूम का 40-45 प्रतिशत हिस्सा होता है।

मनीकंट्रोल के साथ ब्रोकिंग फर्म Tradejini के त्रिवेश डी ने पहले कहा था कि जब STT बढ़ाया जाता है, तो यह ऑप्शन खरीदारों को उतना प्रभावित नहीं करता है जितना कि यह हाई फ्रिक्वेंसी वाले ट्रेडर्स और नियमित रूप से ऑप्शन बेचने वालों को प्रभावित करता है। ये ग्रुप्स बाजार स्थितियों में बदलाव के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। इन पर सबसे अधिक असर पड़ने की संभावना होती है।

त्रिवेश ने कहा, STT वृद्धि का वास्तविक प्रभाव तब दिखाई देता है जब मंदी का बाजार होता है।

उन्होंने कहा था, "मेरा दृढ़ विश्वास है कि भारत को उसके द्वारा उत्पादित और उपभोग की गई वस्तुओं के लिए मूल्य पर असर डालने वाले देश के रूप में खुद को स्थापित करने के लिए लेनदेन की कम लागत बनाए रखना जरूरी है।"

 

 

 

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