Union Budget 2023: यूनियन बजट 2023 (Budget 2023) में सरकार इकोनॉमिक ग्रोथ के लिए पूंजीगत खर्च पर अपना फोकस बनाए रखेगी। मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए भी नए ऐलान हो सकते हैं। सरकार का जोर फिस्कल कंसॉलिडेशन पर भी होगा। Wright Research की सोनम श्रीवास्तव ने मनीकंट्रोल से बातचीत में यह अनुमान जताया है। उन्होंने यूनियन बजट 2023 के बारे में विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि फाइनेंस मिनिस्टर सरकार का कैपिटल एक्सपेंडिचर बढ़ाकर जीडीपी के करीब 3.5 फीसदी तक कर सकती हैं। अभी यह जीडीपी का 2.9 फीसदी है। उन्होंने पर्सनल इनकम टैक्स रेट में भी बदलाव की उम्मीद जताई। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी को बजट पेश करेंगी।
पर्सनल इनकम टैक्स के रेट्स में बदलाव कर सकती है सरकार
श्रीवास्तव ने कहा कि सरकार इकोनॉमी में डिमांड बढ़ाने के लिए पर्सनल इनकम टैक्स रेट्स को तर्कसंगत बनाने का ऐलान कर सकती हैं। सरकार का फोकस इज ऑफ डूइंग पर होने की भी उम्मीद है। सरकार का फोकस मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने पर भी होगा। रोजगार के ज्यादा मौके पैदा करने वाले सेक्टर को PLI स्कीम के दायरे में लाया जा सकता है। सबसे अहम यह है कि लोकलुभावन ऐलानों के बजाय वित्त मंत्री का जोर फिस्कल कंसॉलिडेशन पर रहने की उम्मीद है। वित्त मंत्री डिसइनवेस्टमेंट पर फोकस बढ़ाएगी और सब्सिडी में कमी करेगी।
मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस बने रहने की उम्मीद
उन्होंने कहा कि सरकार पहले से मैन्युफैक्चरिंग, कैपिटल गुड्स, डिफेंस, रेलवे और सरकारी बैंकों पर जोर दे रही है। उम्मीद है कि यूनियन बजट 2023 में भी इन सेक्टर पर सरकार का फोकस बना रहेगा। जिन सेक्टर के पीएलआई स्कीम के दायरे में आने की उम्मीद है, उनसे जुड़ी कंपनियों के शेयरों में बजट से पहले तेजी दिख सकती है। हमें इंफ्रास्ट्रक्चर, डिफेंस और रेलवे से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में रौनक रहने की उम्मीद है। बजट में सब्सिडी से जुड़े ऐलान होने की उम्मीद को देखते हुए शुगर, फर्टिलाइजर्स, टेक्सटाइल्स और पेपर कंपनियों के शेयरों में हलचल दिख सकती है।
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इनफ्लेशन में अब आएगी गिरावट
श्रीवास्तव ने कहा कि 2023 में इनफ्लेशन, इंटरेस्ट रेट, डॉलर, कैपिटल एक्सपेंडिचर और मैन्युफैक्चरिंग-इंफ्रास्ट्रक्चर मार्केट का रुख तय करेंगे। ऐसा लगता है कि इनफ्लेशन दुनियाभर में अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच चुका है। अब इसमें गिरावट देखने को मिलेगी। इंटरेस्ट रेट्स में भी अब कमी देखने को मिल सकती है। इंटरेस्ट रेट्स के उच्चतम स्तर पर पहुंच जाने के बाद अमेरिकी डॉलर की चमक फीकी पड़ सकती है। इससे रुपया सहित उभरते देशों की करेंसी में रिकवरी आएगी। अगले साल लोकसभा चुनावों को देखते हुए मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकार को फोकस बना रहेगा। मैन्युफैक्चरिंग में रोजगार के मौके बढ़ाने की काफी गुंजाइश है।