Budget 2022:5G टेक्नोलॉजी के विकास पर रह सकता है वित्त मंत्री का फोकस

J Sagar Associates के Tony Verghese का कहना है कि टेलिकॉम सेक्टर में तमाम सुधार उपायों के एलान के साथ ही बजट में 5G टेक्नोलॉजी और उससे संबंधित उपकरणों के उत्पादन पर वित्त मंत्री का क्या नजरिया होगा इस पर सभी की नजरें रहेंगी.

अपडेटेड Jan 29, 2022 पर 12:59 PM
इस बजट में स्पेस टेक्नोलॉजी के साथ इस टेक्नोलॉजी से संबंधित कलपुर्जों के उत्पादन पर फोकस हो सकता है.

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन गुरुवार को यूनियन बजट पेश करेगी। एक्सपर्ट्स की FM से मांग है कि तमाम चुनौतियों से गुजर रहे टेलीकॉम सेक्टर से जुड़े कुछ मुद्दों पर उनका खास फोकस होना चाहिए। Boston Consulting Group के मैनेजिंग और सीनियर डायरेक्टर विकास जैन का कहना है कि पिछले 2 साल के दौरान भारत में टेलिकॉम सेक्टर ने अपनी मजबूती, प्रतिबद्धता और जरुरत का औचित्य स्थापित किया है लेकिन देश में अभी टेक इंडस्ट्रीज के सामने तमाम तरह की चुनौतियां उभऱकर सामने आ रही हैं। वर्तमान में इस इंडस्ट्रीज के लिए नए तरह के टैलेंट और स्किल की जरुरत है। देश में टेलिकॉम सेक्टर के सामने अनौपचारिक इकोनॉमी स्वरोजगार और देश के अब तक वंचित रहे हिस्सों तक अपनी सेवाएं पहुंचाने की व्यापक संभावनाएं है। इससे देश की इकोनॉमी में बड़े बदलाव हो सकते हैं।

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इसके अलावा टेलिकम्यूनिकेशंस में 5G,डिजिटल मीडिया, मैन्यूफैक्चरिंग जैसे सेक्टर में टेक्नोलॉजी के बड़े मात्रा में उपयोग की व्यापक संभावना है । जिसको ध्यान में रखते हुए यूनियन बजट में वित्त मंत्री को टेक्नोलॉजी के विकास पर खास फोकस करना चाहिए।


J Sagar Associates(JSA) के Tony Verghese का कहना है कि टेलिकॉम सेक्टर में तमाम सुधार उपायों के एलान के साथ ही बजट में 5G टेक्नोलॉजी और उससे संबंधित उपकरणों के उत्पादन पर वित्त मंत्री का क्या नजरिया होगा इस पर सभी की नजरें रहेंगी। उन्होंने आगे कहा कि इस साल के दौरान स्पेट्रक्म ऑक्शन की भी संभावना है। इसके साथ ही सेटलाइट सर्विसेस सेक्टर भी खोला जा सकता है। जिसको ध्यान में रखते हुए इस बात की उम्मीद है कि इस बजट में स्पेस टेक्नोलॉजी के साथ इस टेक्नोलॉजी से संबंधित कलपुर्जों के उत्पादन पर फोकस हो सकता है।

इस बात की संभावना है कि BSNL और MTNL से संबंधित मुद्दे भी विचार का मुद्दा हो सकते हैं। ध्यान रखने की बात है कि उनके रिवाइवल की योजना वास्तव में कामयाब नहीं रही है और ये कंपनियां जरुरी स्पेट्रक्म तक अपनी पहुंच के बावजूद अपनी टेक्नोलॉजी को अपग्रेड करने में असफल रही हैं।

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