Union Budget 2023-24: अगले यूनियन बजट (Union Budget) में सरकार डिसइनवेस्टमेंट (Disinvestment) का टारगेट घटा सकती है। सरकारी बैंकों और इंश्योरेंस कंपनियों के निजीकरण (Bank privatisation) को भी टाल सकती है। इसकी वजह यह है कि लोकसभा चुनाव में 14-15 महीने रह गए हैं। सरकार के सूत्रों ने यह जानकारी दी है। दरअसल, केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की नजरें अगले लोकसभा चुनावों पर हैं। सरकार ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहती है, जिससे विपक्षी दलों को उस पर निशाना साधने का मौका मिल जाए। खासकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी, 2023 को पेश होने वाले बजट में ऐसे कदम उठाने से परहेज करेंगी। इसका मतलब है कि इस बार सरकारी कंपनियों के निजीकरण और उनमें हिस्सेदारी बेचने जैसे मसले फोकस में नहीं रहेंगे।
डिसइनवेस्टमेंट की लिस्ट छोटी रहने की उम्मीद
सरकार के एक सूत्र ने बताया, "डिसइनवेस्टमेंट वाली कंपनियों की लिस्ट छोटी हो रही है। 2014 से अब तक सरकार डिसइनवेस्टमेंट के जरिए 4.5 लाख करोड़ रुपये जुटा चुकी है। प्राइवेटाइजेशन के बगैर सरकार किसी PSU में अपनी 51 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी नहीं बेच सकती है। फिलहाल, बड़ी कंपनियों का कंट्रोल निजी हाथों में सौंपना सरकार के प्लान में नहीं है।" सूत्रों का कहना है कि अगले वित्त वर्ष में बैंकों का निजीकरण भी सरकार के एजेंडा में शामिल नहीं होगा। सूत्रों का यह भी कहना है कि फिलहाल सरकार का फोकस उन कंपनियों पर होगा, जिनमें हिस्सेदारी बेचने का प्लान पहले से है।
इन कंपनियों में हिस्सेदारी बेचने का प्लान पूरा नहीं हो सका
इस साल मई में सरकार ने भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) में हिस्सेदारी बेचने के प्लान को टाल दिया था। उसने कोविड की महामारी के असर और जियोपॉलिटिकल तनाव को इसकी वजह बताया था। दरअसल, यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद सप्लाई चेन में रुकावट आई थी। इससे कमोडिटी की कीमतों में उछाल आया था। उधर, सरकार राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (RINL) में हिस्सेदारी बेचना तो चाहती है, लेकिन उसे एंप्लॉयीज यूनियन के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। HLL Life Care में हिस्सेदारी बेचने के सरकार के प्लान का विरोध केरल सरकार कर रही है।
इस फाइनेंशियल ईयर के लिए डिसइनवेस्टमेंट टारगेट 65,000 करोड़ रुपये
इस वित्त वर्ष डिसइनवेस्टमेंट की कंपनियों की लिस्ट में RINL, BPCL और LIC का आईपीओ शामिल था। हेलीकॉप्टर सेवाएं देने वाली Pawan Hans में भी सरकार ने हिस्सेदारी बेचने का प्लान बनाया था। फाइनेंशियल ईयर में 2022-23 में सरकार ने विनिवेश के लिए 65,000 करोड़ रुपये का टारगेट तय किया था। यह फाइनेंशियल ईयर 2021-22 के 78,000 करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान (Revised Estimate) से कम था।