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Union Budget 2023-24: इलेक्शंस नजदीक होने से निजीकरण और विनिवेश पर घट सकता है निर्मला सीतारमण का फोकस

Union Budget 2023-24: फाइनेंशियल ईयर में 2022-23 में सरकार ने विनिवेश के लिए 65,000 करोड़ रुपये का टारगेट तय किया था। यह फाइनेंशियल ईयर 2021-22 के 78,000 करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान (Revised Estimate) से कम था

Curated By: Rakesh Ranjanअपडेटेड Dec 15, 2022 पर 6:09 PM
Union Budget 2023-24: इलेक्शंस नजदीक होने से निजीकरण और विनिवेश पर घट सकता है निर्मला सीतारमण का फोकस
2014 से अब तक सरकार डिसइनवेस्टमेंट के जरिए 4.5 लाख करोड़ रुपये जुटा चुकी है।

Union Budget 2023-24: अगले यूनियन बजट (Union Budget) में सरकार डिसइनवेस्टमेंट (Disinvestment) का टारगेट घटा सकती है। सरकारी बैंकों और इंश्योरेंस कंपनियों के निजीकरण (Bank privatisation) को भी टाल सकती है। इसकी वजह यह है कि लोकसभा चुनाव में 14-15 महीने रह गए हैं। सरकार के सूत्रों ने यह जानकारी दी है। दरअसल, केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की नजरें अगले लोकसभा चुनावों पर हैं। सरकार ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहती है, जिससे विपक्षी दलों को उस पर निशाना साधने का मौका मिल जाए। खासकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी, 2023 को पेश होने वाले बजट में ऐसे कदम उठाने से परहेज करेंगी। इसका मतलब है कि इस बार सरकारी कंपनियों के निजीकरण और उनमें हिस्सेदारी बेचने जैसे मसले फोकस में नहीं रहेंगे।

डिसइनवेस्टमेंट की लिस्ट छोटी रहने की उम्मीद

सरकार के एक सूत्र ने बताया, "डिसइनवेस्टमेंट वाली कंपनियों की लिस्ट छोटी हो रही है। 2014 से अब तक सरकार डिसइनवेस्टमेंट के जरिए 4.5 लाख करोड़ रुपये जुटा चुकी है। प्राइवेटाइजेशन के बगैर सरकार किसी PSU में अपनी 51 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी नहीं बेच सकती है। फिलहाल, बड़ी कंपनियों का कंट्रोल निजी हाथों में सौंपना सरकार के प्लान में नहीं है।" सूत्रों का कहना है कि अगले वित्त वर्ष में बैंकों का निजीकरण भी सरकार के एजेंडा में शामिल नहीं होगा। सूत्रों का यह भी कहना है कि फिलहाल सरकार का फोकस उन कंपनियों पर होगा, जिनमें हिस्सेदारी बेचने का प्लान पहले से है।

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