Union Budget 2023: ITC के शेयरों का प्रदर्शन इस साल (2022) में अच्छा रहा है। लेकिन, पिछले कुछ समय से शेयर पर दबाव दिख रहा है। इसकी कुछ वजह शेयरों की वैल्यूएशन हो सकती है। यह भी माना जा रहा है कि काफी समय तक तेज दौड़ लगाने के बाद यह शेयर थोड़ा ब्रेक ले रहा है। इसके कुछ दूसरे कारण भी हो सकते हैं। हाल में खबर आई है कि लूज सिगरेट्स पर रोक लगने जा रही है। यह भी कहा जा रहा है कि एयरपोर्ट्स, होटल्स और रेस्टॉरेंट्स के स्पेशल जोंस में तंबाकू के इस्तेमाल पर रोक लगेगी। लूज सिगरेट पर रोक लगाने का प्रस्ताव काफी समय से है। यह टूबैको प्रोडक्ट्स की मार्केटिंग और सेल से जुड़े नियमों में प्रस्तावित संशोधन का हिस्सा है। इसका ड्राफ्ट पिछले साल जनवरी में रिलीज किया गया था।
लूज सिगरेट पर प्रतिबंध का नहीं पड़ेगा असर
एनालिस्ट्स का कहना है कि लूज सिगरेट पर प्रतिबंध लगाने का तब तक ज्यादा फायदा नहीं मिलेगा, जब तक लोकल अथॉरिटीज इसे सख्ती से लागू नहीं करती हैं। कुछ राज्य पहले से इस पर प्रतिबंध लगा चुके हैं। इन राज्यों में प्रतिबंध का ज्यादा असर देखने को नहीं मिला। चूंकि, यह लोकल अथॉरिटी की प्रायरिटी लिस्ट में नहीं होता है, जिससे लूज सिगरेट की बिक्री बंद नहीं होती है। नियमों के लागू करने में व्यावहारिक दिक्कत को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि इसे आईटीसी के शेयरों में गिरावट की वजह नहीं माना जा सकता।
सिगरेट पर टैक्स बढ़ाने से परहेज करती रही सरकार
बजट से पहले हर साल एक बड़ा रिस्क देखने को मिलता है। पिछले कुछ सालों से किस्मत आईटीसी का साथ दे रही है। बजट में टैक्स के मोर्चे पर कोई चौंकाने वाला ऐलान सुनने को नहीं मिला है। हालांकि, फूड सब्सिडी और दूसरे तरह के खर्चों को देखते हुए सरकार पर रेवेन्यू बढ़ाने का काफी दबाव रहा है। क्या यह साल अलग होगा? हालांकि, यह अंदाजा लगाना मुश्किल हैं कि सरकार टैक्स बढ़ाएगी या नहीं, लेकिन हम परिदृश्य पर नजर डाल सकते हैं।
अगले बजट में टैक्स बढ़ने की उम्मीद नहीं
बीते सालों में सरकार के कदमों से यह संकेत मिलता है कि वह सिगरेट सेक्टर के लिए अचानक बड़ी अड़चन पैदा नहीं करना चाहती है। इससे इस सेक्टर के रेवन्यू पर असर पड़ेगा। साथ ही तंबाकू की खेती से जुड़े किसानों को भी नुकसान होगा। इसलिए उम्मीद है कि सरकार इस बार भी किसानों पर असर डालने वाला कोई कदम नहीं उठाएगी। खासकर तब जब लोकसभा चुनाव में करीब 16-17 महीने का समय रह गया है। ऐसा लगता है कि इंडस्ट्री लॉबी की तरफ से की गई कोशिशों का भी असर पड़ा है। इसलिए अगर सरकार अगले बजट में सिगरेट पर टैक्स बढ़ाती भी है तो वह उतना ज्यादा नहीं होगा कि इसके कंजम्प्शन पर असर डाल सके।
बिक्री में शहरी क्षेत्रों की ज्यादा हिस्सेदारी से आईटीसी की स्थिति मजबूत
यह सही है कि टैक्स बढ़ने का असर कंपनी पर पड़ेगा। आईटीसी (ITC) के लिए एक अच्छी बात यह है कि उसकी स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत है, क्योंकि इसकी ज्यादातर बिक्री शहरी इलाकों में है, जहां मांग पर ज्यादा असर नहीं पड़ा है। खासकर इसके प्रोडक्ट्स प्रीमियम कस्टमर्स के लिए बनाए जाते हैं। इसलिए कीमतों में वृद्धि का डिमांड पर थोड़ा असर दिख सकता है, लेकिन वह जल्द स्टैबलाइज हो जाएगा। दरअसल, टैक्स बढ़ने से आईटीसी को अपने प्रोडक्ट्स के प्राइसेज बढ़ाने का मौका मिल जाएगा। इससे मार्जिन के लिहाज से उसे फायदा हो सकता है।
सिगरेट पर टैक्स बढ़ने का रिस्क बना हुआ है, लेकिन यह इतना बड़ा नहीं है जिससे आईटीसी के शेयरों की दोबारा रेटिंग की जरूरत पड़े। जहां तक पॉलिसी के लेवल पर उठाए जाने वाले कदमों का सवाल है तो इससे तब तक ज्यादा मुश्किल नहीं आएगी जब तक केंद्र, राज्य और लोकल अथॉरिटी एक साथ मिलकर सिगरेट के इस्तेमाल को रोकने के लिए कोशिश नहीं करतें। टैक्स को लेकर आशंका खत्म होते ही फिर से इस शेयरों पर निवेशकों का भरोसा लौट सकता है। अगर सिगरेट को लेकर सरकार की पॉलिसी में बड़ा बदलाव आता है तो इसका असर इनवेस्टर्स पर पड़ सकता है।