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Union Budget 2023: बैंकिंग सेक्टर में बड़े रिफॉर्म्स की जरूरत, क्या फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण उठाएंगी ये कदम?

Union Budget 2023: 1 फरवरी, 2023 को पेश होने वाले बजट में फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण बैंकिंग सेक्टर की ग्रोथ का रोडमैप पेश कर सकती हैं। ऐसे दो मुख्य क्षेत्र हैं, जिनके लिए बैंकिंग सेक्टर को बजट में ऐलान होने की उम्मीद है। पहला है सरकारी बैंकों को नई पूंजी का आवंटन। दूसरा है सरकारी बैंकों के निजीकरण के उपाय

Curated By: Rakesh Ranjanअपडेटेड Dec 14, 2022 पर 10:30 AM
Union Budget 2023: बैंकिंग सेक्टर में बड़े रिफॉर्म्स की जरूरत, क्या फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण उठाएंगी ये कदम?
बैंकों का नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPAs) 31 मार्च, 2022 को घटकर 7.6 फीसदी पर आ गया था। यह पिछले 6 साल में सबसे कम एनपीए है। बैंकों के कैपिटल-टू-रिस्क वेटेड एसेट रेशियो (CRAR) में भी सुधार देखने को मिला है।

Union Budget 2023: बैंकिंग सेक्टर (Banking Sector) के लिए खराब वक्त खत्म हो चुका है। कई बड़े राइट-ऑफ के बाद बैंकों की बुक्स साथ-सुथरी दिख रही हैं। पिछले कुछ सालों में नई पूंजी मिलने से बैंकों के कैपिटल एडेक्वेसी रेशियो (CAR) में सुधार आया है। अब बैंकिंग सेक्टर को ग्रोथ के लिए नए पॉजिटिव संकेतों का इंतजार है। हालांकि, ग्लोबल और डोमेस्टिक इकोनॉमी के लिए अब भी कई चुनौतियां दिख रही हैं। इंटरेस्ट रेट बढ़ रहे हैं। ग्लोबल इकोनॉमी पर मंदी का खतरा मंडरा रहा है। बढ़ती बेरोजगारी का असर बैंकों की एसेट क्वालिटी पर पड़ने की आशंका है। दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों के राहत पैकेज वापस लेने से लिक्विडिटी में भी कमी आई है। अगर इंडियन इकोनॉमी की ग्रोथ उम्मीद के मुताबिक नहीं रहती है तो क्वालिटी एसेट पर फिर से दबाव बन सकता है। छोटे ग्राहकों और कंपनियों को दिए लोन के रिपेमेंट में दिक्कत आ सकती है।

इन दो बड़े मसलों पर फोकस जरूरी

उपर्युक्त स्थिति को देखते हुए उम्मीद है कि 1 फरवरी, 2023 को पेश होने वाले बजट में फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण बैंकिंग सेक्टर की ग्रोथ का रोडमैप पेश कर सकती हैं। ऐसे दो मुख्य क्षेत्र हैं, जिनके लिए बैंकिंग सेक्टर को बजट में ऐलान होने की उम्मीद है। पहला है सरकारी बैंकों को नई पूंजी का आवंटन। दूसरा है सरकारी बैंकों के निजीकरण के उपाय। लेकिन, ऐसा लगता है कि सीतारमण अगले बजट में इन दोनों मसलों को छूने से बच सकती हैं। वह बैंकों की बेहतर वित्तीय सेहत को देखते हुए नई पूंजी देने का ऐलान नहीं करेंगी। सरकार फाइनेंशियल ईयर 2015-16 से 2020-21 के बीच सरकारी बैंकों को 3.3 लाख करोड़ रुपये की पूंजी उपलब्ध करा चुकी है। इस साल 1 फरवरी को पेश बजट में भी फाइनेंस मिनिस्टर ने सरकारी बैंकों को नई पूंजी देने का ऐलान नहीं किया था।

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