Union Budget 2023: बैंकिंग सेक्टर (Banking Sector) के लिए खराब वक्त खत्म हो चुका है। कई बड़े राइट-ऑफ के बाद बैंकों की बुक्स साथ-सुथरी दिख रही हैं। पिछले कुछ सालों में नई पूंजी मिलने से बैंकों के कैपिटल एडेक्वेसी रेशियो (CAR) में सुधार आया है। अब बैंकिंग सेक्टर को ग्रोथ के लिए नए पॉजिटिव संकेतों का इंतजार है। हालांकि, ग्लोबल और डोमेस्टिक इकोनॉमी के लिए अब भी कई चुनौतियां दिख रही हैं। इंटरेस्ट रेट बढ़ रहे हैं। ग्लोबल इकोनॉमी पर मंदी का खतरा मंडरा रहा है। बढ़ती बेरोजगारी का असर बैंकों की एसेट क्वालिटी पर पड़ने की आशंका है। दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों के राहत पैकेज वापस लेने से लिक्विडिटी में भी कमी आई है। अगर इंडियन इकोनॉमी की ग्रोथ उम्मीद के मुताबिक नहीं रहती है तो क्वालिटी एसेट पर फिर से दबाव बन सकता है। छोटे ग्राहकों और कंपनियों को दिए लोन के रिपेमेंट में दिक्कत आ सकती है।
