Union Budget 2023: बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (Fixed Deposit) पर टैक्स छूट चाहते हैं। उन्होंने इस बारे में फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण को बताया है। उनका मानना है कि एफडी पर टैक्स छूट मिलने से इसमें इनवेस्टर्स की दिलचस्पी बढ़ेगी। उन्होंने 5 लाख रुपये तक के एफडी को टैक्स के दायरे से बाहर रखने की मांग की है। अभी एफडी पर मिलने वाला इंटरेस्ट टैक्स के दायरे में आता है। इस वजह से एफडी पर मिलने वाला शुद्ध रिटर्न कम हो जाता है। पिछले कुछ समय से लोगों की दिलचस्पी बैंकों के एफडी में घट रही है। इसकी वजह यह है कि म्यूचुअल फंड्स की स्कीमों सहित दूसरे इनवेस्टमेंट ऑप्शन के मुकाबले इसका रिटर्न अट्रैक्टिव नहीं रह गया है।
पिछले कुछ सालों में FD में घट रही लोगों की दिलचस्पी
बैंकों के हितों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) ने अपनी इस मांग के बारे में फाइनेंस मिनिस्ट्री को लेटर लिखा है। इसमें बताया गया है कि म्यूचुअल फंड्स, नेशनल सेविंग्स स्कीम और कुछ इंश्योरेंस स्कीम के मुकाबले एफडी का आकर्षण घटा है। हालांकि, बैंकों की फिक्स्ड डिपॉजिट स्कीम लंबे समय तक लोगों की पसंदीदा स्कीम रही हैं। लेकिन, पिछले कुछ सालों में इसमें लोगों की दिलचस्पी घटी है।
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टैक्स के बाद शुद्ध रिटर्न बहुत कम रह जाता है
अभी बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट का इंटरेस्ट रेट 3 फीसदी से लेकर 7.5 फीसदी तक है। टैक्स के बाद यह रिटर्न और कम हो जाता है। इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के मुताबिक, बैंक एफडी से मिलने वाला इंटरेस्ट अमाउंट टैक्स के दायरे में आता है। इस पर इनवेस्टर्स के टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। हायर टैक्स स्लैब में आने वाले इनवेस्टर्स को एफडी में पैसा रखने से ज्यादा नुकसान उठाना पड़ता है। एफडी से मिलने वाला इंटरेस्ट 40,000 रुपये से ज्यादा होने पर टीडीएस के दायरे में आता है। सीनियर सिटीजंस के लिए यह लिमिट 50,000 रुपये है।
बैंकों की दलील है कि अगर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 5 लाख रुपये तक के एफडी पर मिलने वाले इंटरेस्ट को टैक्स के दायरे से बाहर कर देती हैं तो इससे उन्हें फायदा होगा। ऐसा होने पर बैंक एफडी में इनवेस्टर्स की दिलचस्पी बढ़ेगी। कई इनवेस्टर्स म्यूचुअल फंड्स सहित निवेश के दूसरे ऑप्शन के मुकाबले बैंक एफडी को ज्यादा सुरक्षित मानते हैं। लेकिन, टैक्स की वजह से शुद्ध रिटर्न कम होने से इसमें निवेश नहीं करना चाहते।