Union Budget 2023: सरकार पिछले कई सालों से बॉन्ड बाजार (Debt Market) को डेवलप करने की कोशिश कर रही है। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने पिछले बजट में बॉन्ड बाजार के लिए बड़े ऐलान किए थे। उन्होंने सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड्स (Sovereign green bonds) लॉन्च करने का ऐलान किया था। उम्मीद है कि मार्च से पहले सरकार इसे लॉन्च कर देगी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकारी और कंपनियों के बॉन्ड्स में रिटेल इनवेस्टर्स की दिलचस्पी बढ़ाने की कोशिश करनी चाहिए। इससे उन्हें फिक्स्ड रिटर्न एसेट का एक भरोसेमंद विकल्प मिलेगा।
इनवेस्टर्स के लिए एफडी का अच्छा विकल्प बन सकता है बॉन्ड
एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार को कंपनियों को भी बॉन्ड्स के जरिए मार्केट से पैसे जुटाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। इससे इंडस्ट्री को कर्ज के लिए एक अच्छा ऑप्शन उपलब्ध होगा। कर्ज के लिए बैंकों पर उनकी निर्भरता में भी कमी आएगी। अभी कंपनियां बॉन्ड्स के जरिए मार्केट से पैसे जुटाती हैं, लेकिन इनमें रिटले इनवेस्टर्स ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाते हैं। उन्हें कंपनियों के बॉन्ड में पैसे लगाने के मुकाबले बैंकों की फिक्स्ड डिपॉजिट स्कीम में पैसा रखना आसान लगता है।
बॉन्ड इश्यू से कंपनियां भी जुटा सकेंगी कर्ज
फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण 1 फरवरी, 2023 को यूनियन बजट पेश करेंगी। उम्मीद है कि वह बॉन्ड मार्केट को मजबूत बनाने, इसमें रिटेल निवेशकों का पार्टिसिपेशन बढ़ाने और कंपनियों को बॉन्ड्स से पैसे जुटाने को प्रोत्साहित करने के लिए उपायों का ऐलान कर सकती हैं। कोरोना की महामारी के बाद आर्थिक गतिविधियां फिर से सामान्य हो गई हैं। कंपनियों का कामकाज भी काफी हद तक पटरी पर लौट चुका है। ऐसे में उनकी पूंजी की जरूरत भी बढ़ गई है। इसलिए उम्मीद है कि वित्त मंत्री बजट में कुछ ठोस कदमों का ऐलान करेंगी।
रिटेल इनवेस्टर्स के लिए लिक्विडिटी बढ़ाने से होगा फायदा
सरकार बॉन्ड्स में लिक्विडिटी बढ़ाने के भी उपाय कर सकती है। अभी बॉन्ड्स में लिक्विडिटी कम होने से रिटेल इनवेस्टर्स इसमें निवेश करने में दिलचस्पी नहीं दिखाते हैं। अगर लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए सरकार बड़े कदम उठाती है तो इससे बॉन्ड में निवेश के लिए रिटेल इनवेस्टर्स को आकर्षित करने में मदद मिलेगी। बॉन्ड्स में निवेश के बारे में रिटेल इनवेस्टर्स की जागरूकता बढ़ाने की भी जरूरत है। म्यूचुअल फंड्स को लेकर निवेशकों की जागरूकता बढ़ाने की लगातार कोशिशों के बाद नतीजें दिखने लगे हैं।
रिटेल इनेवस्टर्स की जागरूकता बढ़ाने की जरूरत
म्यूचुअल फंड्स हाउसेज का एसेट अंडर मैनेजमेंट 40 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया है। इसके लिए सरकार और प्राइवेट लेवल पर काफी कोशिश कई गई। इसी तरह बॉन्ड्स में निवेश को लेकर भी कोशिश करने की जरूरत है। बॉन्ड्स में निवेश के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए मास मीडिया का इस्तेमाल किया जा सकता है। सरकारी बॉन्ड्स में निवेश करने में किसी तरह का रिस्क नहीं है, जिससे ऐसे निवेशकों को आकर्षित करना मुश्किल नहीं होगा, जो सेफ्टी को ज्यादा प्रायरिटी देते हैं।