Union Budget 2023: अगले यूनियन बजट (Budget 2023) में सरकार ग्रीन एनर्जी (Green Energy) का इस्तेमाल बढ़ाने के लिए इनसेंटिव का ऐलान कर सकती है। सरकार पेट्रोल, डीजल, कोयला जैसे ऊर्जा के पारंपरिक स्रोतों पर निभर्रता धीरे-धीरे घटाना चाहती है। जलवायु परिवर्तन (Climate Change) की समस्या को देखते हुए यह बहुत जरूरी है। अनुमान है कि फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट में ग्रीड-स्केल बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम्स (BESS) को प्रोत्साहित करने के लिए 21,650 करोड़ रुपये की स्कीम सहित कई उपायों का ऐलान कर सकती हैं। ऐसे प्रोजेक्ट्स के वायबिलिटी गैप फंडिंग के लिए भी 3,765 करोड़ रुपये का आवंटन बजट में हो सकता है। इसके अलावा बीईएसएस बनाने में इस्तेमाल होने वाले पार्ट्स के आयात पर ड्यूटी घटाने का भी ऐलान हो सकता है।
सरकारी कंपनियों को रिन्यूएबल एनर्जी पर निवेश बढ़ाने को कहा जा सकता है
सरकार Fossil Fuels के इस्तेमाल में कमी लाने के लिए सरकारी ऑयल कंपनियों (ONGC, GAIL, HPCL, BPCL, IOC, NTPC) को रिन्यूएबल एनर्जी के लिए निवेश बढ़ाने को कह सकती है। अभी इन कंपनियों के निवेश का बड़ा हिस्सा Fossil Fuels पर खर्च होता है। रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स के मुकाबले Fossil Fuels प्रोजेक्ट पर उनका निवेश करीब 11 गुना है। 2020 में पब्लिक फाइनेंस इंस्टीट्यूशंस (PFI) का Fossil Fuel आधारित प्रोजेक्ट्स में निवेश रिन्यूएबल प्रोजेक्ट्स के मुकाबले करीब छह गुना ज्यादा था। सालाना आधार पर निवेश में यह फर्क करीब 5.53 लाख करोड़ रुपये है।
हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स में राज्यों को हिस्सेदारी लेने के लिए मदद देगी सरकार
माना जा रहा है कि मौजूद स्थिति को देखते हुए सरकार ग्रीन एनर्जी के इस्तेमाल पर फोकस बढ़ाना चाहती है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण यूनियन बजट में राज्यों के 14 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स में 26 फीसदी हिस्सेदारी हासिल करने के लिए अतिरिक्त 10,000 करोड़ रुपये का आवंटन कर सकती हैं। कुल 13.25 गीगावॉट्स क्षमता के ये प्रोजेक्ट्स जम्मू-कश्मीर, उत्तरपूर्वी और पहाड़ी राज्यों में स्थित हैं। हाइड्रोपावर में ऊर्जा के पारंपरिक संसाधनों का इस्तेमाल नहीं होता है। अगल बजट में सरकार एनर्जी-एफिशिएंट टेक्नोलॉजीज के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए कर्ज पर इंटरेस्ट रेट में बड़ी रियायत का भी ऐलान कर सकती है।
एनर्जी एफिशिएंट टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के उपाय होंगे
सरकार एनर्जी एफिशिएंट टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने वाले स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज को कर्ज में मदद करना चाहती है। उन्हें प्रति प्रोजेक्ट 15 करोड़ रुपये या लोन अमाउंट के 75 फीसदी हिस्से पर क्रेडिट गारंटी दी जा सकती है। जानकारों का कहना है कि हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स के लिए इक्विटी सपोर्ट पर 1.3 लाख करोड़ रुपये खर्च हो सकते हैं। इससे बड़ी संख्या में रोजगार के मौके पैदा करने में मदद मिलेगी।