Union Budget 2023: फाइनेंस सेक्रेटरी टीवी सोमनाथान पर ग्रोथ बढ़ाने और बजट घाटा कम करने की है बड़ी जिम्मेदारी

Union budget 2023: सोमनाथन को आर्थिक एवं वित्तीय मामलों का व्यापक अनुभव है। सरकार के फाइनेंस की गहरी समझ रखने वाला उनके जैसा शायद ही कोई दूसरा अफसर है। उन्होंने इकोनॉमिक्स में डॉक्टोरेट किया है। वह चार्टर्ड/कॉस्ट अकाटेंट के साथ एक कंपनी सेक्रेटरी भी हैं

अपडेटेड Dec 23, 2022 पर 6:59 PM
सोमनाथन का ट्रैक रिकॉर्ड शानदार रहा है। 1987 की सिविल सर्विसेज एग्जाम में वह दूसरे पायदान पर आए थे। उन्हें तमिलनाडु कैडर मिला था।

Union Budget 2023: फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण की बजट टीम पर इस बार बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। यह बजट ऐसे वक्त आ रहा है, जब अमेरिका, यूरोप, इंग्लैंड जैसी दुनिया की बड़ी इकोनॉमी पर मंदी का खतरा मंडरा रहा है। इधर, इंडिया में इकोनॉमी की सेहत अपेक्षाकृत बेहतर है। ऐसे में यूनियन बजट 2023 में इस ग्रोथ को और तेज करने के उपाय करने की जरूरत है। लेकिन, कुछ एक्सपर्टस का कहना है कि सरकार को बजट में अपनी आर्थिक स्थिति ठीक करने पर फोकस करना चाहिए। बजट टीम के सबसे सीनियर मेंबर टीवी सोमनाथन (TV Somanathan) के अनुभव को देखते हुए इकोनॉमिक ग्रोथ और फिस्कल कंसॉलिडेशन के उपायों के बीच बैलेंस बनाना सरकार के लिए मुश्किल नहीं होगा। फाइनेंस सेक्रेटरी होने के नाते सोमनाथन पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) की सोच के हिसाब से बजट को आकार देने की खास जिम्मेदारी है।

पीएमओ में रह चुके हैं टीवी सोमनाथन

सोमनाथन को पिछले साल 29 अप्रैल को फाइनेंस सेक्रेटरी नियुक्त किया गया था। नियम के हिसाब से फाइनेंस मिनिस्ट्री के तहत आने वाले पांच सेक्रेटरी में से सबसे सीनियर को फाइनेंस सेक्रेटरी नियुक्त किया जाता है। सोमनाथन का ट्रैक रिकॉर्ड शानदार रहा है। 1987 की सिविल सर्विसेज एग्जाम में वह दूसरे पायदान पर आए थे। उन्हें तमिलनाडु कैडर मिला था। उन्हें प्रधानमंत्री का बहुत भरोसमंद अफसर माना जाता है। वह कंपनी मामलों के मंत्रालय में संयुक्त सचिव रह चुके हैं। 2015-207 के बीच वह प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में रह चुके हैं। सोमनाथन अपने साथियों के बीच लोकप्रिय हैं।


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कोरोना की महामारी के दौरान इकोनॉमी को सहारा देने में बड़ी भूमिका

सोमनाथन के नेतृत्व में वित्त मंत्रालय ने अपना पूंजीगत खर्च रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचाया है। राज्यों के स्तर पर पूंजीगत खर्च बढ़ाने के लिए उन्होंने कई नए तरीके निकाले हैं। इस वित्त वर्ष के लिए बजट में पूंजीगत खर्च के लिए 7.5 लाख करोड़ रुपये का टारगेट तय किया गया था। माना जाता है कि इसमें सोमनाथन का बड़ा हाथ था। दरअसल, कोरोना की महामारी के बाद पटरी पर लौट रही इंडियन इकोनॉमी को सरकार के सपोर्ट की जरूरत थी। सरकार के पूंजीगत खर्च बढ़ाने का असर भी दिखा है।

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बजट 2022 तैयार करने में भी सबसे ज्यादा रोल

कोरोना के दौरान इकोनॉमी को सहारा देने के लिए सरकार ने कई बड़े उपाए किए थे। इनमें 'पीएम गरीब कल्याण योजना' और आत्मनिर्भर जैसी महत्वाकांक्षी योजनाएं शामिल थी। सरकार ने 2020 में इनका ऐलान किया था। बताया जाता है कि इन योजनाएं को आकार देने में सोमनाथन की बड़ी भूमिका थी। बजट 2022 के लिए निर्मला सीतारमण की स्पीच लिखने में भी उनकी बड़ी भूमिका बताई जाती है।

आर्थिक और वित्तीय मामलों का व्यापक अनुभव

सोमनाथना को आर्थिक एवं वित्तीय मामलों का व्यापक अनुभव है। सरकार के फाइनेंस की गहरी समझ रखने वाला उनके जैसा शायद ही कोई दूसरा अफसर है। उन्होंने इकोनॉमिक्स में डॉक्टोरेट किया है। वह चार्टर्ड/कॉस्ट अकाटेंट के साथ एक कंपनी सेक्रेटरी भी हैं। इकोनॉमिक्स, फाइनेंस और पब्लिक पॉलिसी पर जर्नल्स और न्यूजपेपर्स में उनके 80 से ज्यादा पेपर्स और आर्टिकल्स प्रकाशित हो चुके हैं। उन्होंने दो किताबें और कुछ चैप्टर्स भी लिखे हैं।

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