Union Budget 2023: एक जैसे प्रोडक्ट्स के लिए टैक्स के एकसमान नियम चाहता है फानेंशियल मार्केट

Union Budget 2023: म्यूचुअल फंड हाउसेज का कहना है कि उन्हें टैक्स सेविंग्स के लिए ईएलएसएस की तरह डेट आधारित स्कीमें लॉन्च करने की इजाजत मिलनी चाहिए। अगर टैक्स के लिहाज से देखें तो फिक्स्ड इनकम प्रोडक्ट्स ज्यादा बेहतर हैं, क्योंकि ये स्टेबल रिटर्न ऑफर करते हैं

अपडेटेड Dec 09, 2022 पर 6:00 PM
मार्केट पार्टिसिपेंट्स का कहना है कि सभी फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स के लिए एक जैसा नो-योर-कस्टमर (KYC) प्रोसेस होना चाहिए।

Union Budget 2023: फाइनेंशियल मार्केट्स (Financial Products) को उम्मीद है कि फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) बजट में उनकी मांगें पूरी करेंगी। उसने कहा है कि म्यूचुअल फंड की स्कीम, इंश्योरेंस प्रोडक्ट और बैंक डिपॉजिट एक जैसे मकसद पूरा करते हैं तो उनके लिए टैक्स के नियम भी एक जैसे होने चाहिए। फाइनेंशियल मार्केट्स ने अपनी मांगों के बारे में फाइनेंस मिनिस्ट्री को बताया है। इसमें अलग-अलग फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स से जुड़े टैक्स के नियमों को तर्कसंगत बनाने की मांग की गई है। इसमें कहा गया है कि म्यूचुअल फंड्स की ऐसी स्कीमों को टैक्स से छूट मिलनी चाहिए, जो इंश्योरेंस के यूलिप्स (ULIPs) और पेंशन प्रोडक्ट्स से बहुत ज्यादा मिलते हैं।

सेक्शन 80सी का दायरा बढ़ाने से होगा फायदा

फाइनेंशियल मार्केट्स की बजट से उम्मीदों के बारे में जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि लोग फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स में सिर्फ रिटर्न के लिए इनवेस्ट नहीं करते हैं बल्कि उनकी नजरें टैक्स के बाद मिलने वाले रिटर्न पर होती हैं। इसलिए जो प्रोडक्ट्स एक समान मकसद पूरे करते हैं, उनके टैक्स के नियम भी एक जैसे होने चाहिए। म्यूचुअल फंड हाउसेज का मानना है कि टैक्स से छूट के लिए रिटायरमेंट स्कीमों को भी इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80सी के तहत लाया जाना चाहिए।


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बीमा कंपनियां टैक्स छूट को हथियार की तरह करती है इस्तेमाल

अभी टैक्स छूट वाले प्रोडक्ट्स के तहत इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स, पेंशन फंड्स, एनपीएस, ELSS आते हैं। 80सी सेक्शन के तहत टैक्स छूट की कुल सीमा 1,50,000 रुपये है। एनपीएस के लिए अतिरिक्त 50,000 रुपये की छूट मिलती है। इंश्योरेंस कंपनियां अपनी पॉलिसी बेचने के लिए टैक्स छूट को हथियार की तरह इस्तेमाल करती हैं। आम तौर पर फाइनेंशियल ईयर की आखिरी तिमाही में इंश्योरेंस कंपनियों का बिजनेस बढ़ जाता है। इसकी वजह यह है कि फाइनेंशियल ईयर खत्म होने से पहले लोग टैक्स डिडक्शन वाले फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स में इनवेस्टमेंट करते हैं। इसी तरह 31 मार्च से पहले ELSS की बिक्री भी बढ़ जाती है।

डेट आधारित सेविंग्स स्कीम लॉन्च होनी चाहिए

म्यूचुअल फंड हाउसेज का कहना है कि उन्हें टैक्स सेविंग्स के लिए ईएलएसएस की तरह डेट आधारित स्कीमें लॉन्च करने की इजाजत मिलनी चाहिए। एक फंड मैनेजर ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर बताया, "अगर टैक्स के लिहाज से देखें तो फिक्स्ड इनकम प्रोडक्ट्स ज्यादा बेहतर हैं, क्योंकि ये स्टेबल रिटर्न ऑफर करते हैं। अगर ऐसे प्रोडक्ट्स पर भी टैक्स डिडक्शन की इजाजत मिल जाए तो इनमें काफी इनवेस्टमेंट देखने को मिलेगा।"

एक समान नो-योर-कस्मटर प्रोसेस जरूरी

मार्केट पार्टिसिपेंट्स का कहना है कि सभी फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स के लिए एक जैसा नो-योर-कस्टमर (KYC) प्रोसेस होना चाहिए। बैंक ज्यादा केवाईसी करते हैं, क्योंकि देश में आबादी के बड़े हिस्से के पास बैंक अकाउंट है। उनके दूसरे फाइनेंशियल प्रोडक्ट में निवेश करने के लिए बैंक केवाईसी का इस्तेमाल किया जा सकता है।

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