Union Budget 2023: कोरोना की महामारी के बाद आर्थिक गतिविधियां बढ़ने से MSME की सेहत में भी सुधार आ रहा है। लेकिन, कारोबार के लिए कर्ज हासिल करने में उन्हें अब भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। FISME के महासचिव अनिल भारद्वाज ने यह बात कही है। मनीकंट्रोल से बातचीत में उन्होंने एमएसएमई से जुड़े कई मसलों पर खुलकर चर्चा की। उन्होंने अगले यूनियन बजट (Union Budget) से एमएसएमई सेक्टर की उम्मीदों के बारे में भी बताया। माना जा रहा है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी, 2023 को पेश होने वाले यूनियन बजट (Budget 2023) में एमएसएमई सेक्टर के लिए कई बड़े ऐलान कर सकती हैं।
मौजूदा माहौल में 6 फीसदी की ग्रोथ खराब नहीं
भारद्वाज ने कहा कि यह सच है कि इकोनॉमी कोरोना की महामारी के बाद आई सुस्ती से बाहर निकल रही है। लेकिन इकोनॉमिक ग्रोथ उतनी रहने की उम्मीद नहीं है, जितना हमने अनुमान लगाया था। हमने जीडीपी में करीब 8 फीसदी ग्रोथ का अनुमान लगाया था। हालांकि, 6 फीसदी की ग्रोथ भी खराब नहीं है। खासकर यह देखते हुए कि दुनिया की कई बड़ी इकोनॉमी पर मंदी का खतरा मंडरा रहा है। इसका असर हमारे एक्सपोर्ट पर भी पड़ रहा है। इसलिए सभी चीजों को ध्यान में रखने पर ऐसा लगता है कि हमारी इकोनॉमी अच्छा कर रही है। एमएसएमई का प्रदर्शन भी अच्छा है।
रिफॉर्म्स से होगा एमएसएमई सेक्टर को फायदा
अगले यूनियन बजट से उम्मीदों के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि फाइनेंस मिनिस्टर के साथ हमारी दो मुलाकातें हुई थीं। हमने कहा था कि रिफॉर्मस और कुछ खास पॉलिसीज से एमएसएमई सेक्टर को बड़ा फायदा हो सकता है। मौजूदा वक्त में हम सरकार से यह उम्मीद नहीं कर सकते कि वह हमें ज्यादा आर्थिक मदद देगी। हम सिर्फ रिफॉर्म्स पर जोर दे रहे हैं। बैंक गारंटी की जगह हम स्योरिटी बॉन्ड के इस्तेमाल की मांग करते रहे हैं। दूसरी चीज है पब्लिक प्रोक्योरमेंट एरिया। हमने सरकार की खरीद में क्वालिटी पर फोकस करने की सलाह दी है।
क्रेडिट रेटिंग की जरूरत खत्म होनी चाहिए
उन्होंने कहा कि हमने बैंकिंग और फाइनेंस में रिफॉर्म्स की जरूरत बताई है। कई एमएसएमई खासकर बड़े स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज को क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों से लोन की रेटिंग करानी पड़ती है। इसमें काफी कॉस्ट शामिल होती है। दुनिया में कहीं भी एमएसएमई के लिए इस तरह की रेटिंग अनिवार्य है। हमारा मानना है कि बैंक एमएसएमई का आंकलन करने में सक्षम हैं।