Union Budget 2023: रियल एस्टेट सेक्टर को यूनियन बजट 2023 (Budget 2023) से बहुत उम्मीदें हैं। उसने कहा है कि 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट में फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) रियल एस्टेट सेक्टर के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर स्टेटस, टैक्स छूट और इनसेंटिव सहित कई बड़े ऐलान कर सकती हैं। वित्त मंत्री SWAMIH फंड को भी बढ़ा सकती हैं। अटके प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए यह फंड बनाया गया है। अभी यह फंड 5,000 करोड़ रुपये का है। रियल एस्टेट सेक्टर का कहना है कि इस फंड को बढ़ाकर 50,000 करोड़ रुपये किया जा सकता है। इससे अटके प्रोजेक्ट्स को पूरा करने में मदद मिलेगी। इससे घर खरीदारों का भरोसा भी बढ़ेगा। यह बजट अगले साल लोकसभा चुनावों से पहले नरेंद्र मोदी सरकार का आखिरी पूर्ण बजट होगा।
हाउस प्रॉपर्टी पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस के नियमों में बदलाव की जरूरत
हाउस प्रॉपर्टी को बेचने पर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेंस (LTCG) टैक्स 20 फीसदी है। लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस के लिए प्रॉपर्टी के लिए होल्डिंग पीरियड 24 महीने है। वित्त मंत्री को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स घटाने की जरूरत है। साथ ही होल्डिंग पीरियड को भी घटाकर 12 महीने करना चाहिए। इससे लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स का बोझ घटेगा। ग्लोबल रियल एस्टेट कंसल्टेंसी फर्म CBRE के सीईओ (इंडिया, साउथ एशिया, मीडिल ईस्ट एंड अफ्रीका) अंशुमान मैग्जीन ने कहा, "हम चाहते हैं कि SWAMIH फंड को बढ़ाकर 50,000 रुपये किया जाए। कोरोना की महामारी के बाद अटके पड़े प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए मदद की जरूरत है।"
होम लोन इंटरेस्ट डिडक्शन लिमिट बढ़ाने से होगा फायदा
नेशनल रियल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल (NAREDCO) ने सरकार से सेक्शन 24(B) के तहत होम लोन पर इंटरेस्ट डिडक्शन की लिमिट बढ़ाने की मांग की है। अभी यह लिमिट सालाना 2 लाख रुपये है। उसने नेशनल रेंटल इनकम से जुड़े सेक्शन 23(5) को भी हटाने की मांग की है। उसने कहा है कि सरकार को रेंटिल हाउसिंग के लिए इनसेंटिव का ऐलान करना चाहिए। इसके लिए सेक्शन 80-IBA के प्रावधानों में संशोधन किया जाना चाहिए।
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NARDECO के मुताबिक, वित्त मंत्री को कुछ खास नियमों और टैक्सेशन ब्लॉक्स को खत्म करने की जरूरत है। उसने कहा है कि घरों की डिमांड बढ़ाने के लिए सरकार को पर्सनल इनकम टैक्स में रिलीफ बढ़ाने की जरूरत है। सरकार सेक्शन 24बी के तहत होम लोन पर इंट्रेस्ट डिडक्शन की मौजूदा 2 लाख रुपये की लिमिट को बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर सकती है। इससे घरों की मांग बढ़ेगी। देश में घरों की कमी दूर करने में भी इससे मदद मिलेगी। सेक्शन 80सी के तहत डिडक्शन की लिमिट को भी मौजूदा 1.5 लाख रुपये से बढ़ाने की जरूरत है।