Union Budget 2023: गोल्डमैन सैक्स का मानना है कि यूनियन बजट 2023 (Budget 2023) में सरकार किसी बड़े रिफॉर्म्स का ऐलान नहीं करेगी। लेकिन, 'मेक इन इंडिया' (Make in India) और 'डायरेक्ट टैक्स कोड' (Direct Tax Code) पर सरकार का फोकस हो सकता है। सब्सिडी के लिए बजट आवंटन में भी बदलाव देखने को मिल सकते हैं। खासकर फर्टिलाइजर्स सब्सिडी के बजट आवंटन में बदलाव देखने को मिल सकता है। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी, 2023 को यूनियन बजट पेश करेंगी। यह बजट ऐसे वक्त आ रहा है, जब सरकार पर फिस्कल डेफिसिट में कमी लाने का दबाव है। साथ ही सरकार को इकोनॉमिक ग्रोथ की रफ्तार तेज करने के उपाय भी बजट में करने होंगे। अमेरिका, इंग्लैंड और यूरोप की इकनॉमी पर मंदी का खतरा मंडरा रहा है। इधर, इंडियन इकोनॉमी की ग्रोथ रेट अच्छी बनी हुई है।
वेल्फेयर स्कीम के लिए आवंटन बढ़ने की उम्मीद
गोल्डमैन सैक्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सरकार अगले साल लोकसभा चुनावों के देखते हुए वेल्फेयर स्कीम पर खर्च बढ़ा सकती है। सब्सिडी में भी कमी की जा सकती है, क्योंकि कमोडिटी की कीमतें नीचे आई हैं। सरकार मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने वाले उपायों का भी ऐलान कर सकती है। इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकार का फोकस जारी रहेगा। डिफेंस के लिए बजट आवंटन बढ़ाया जा सकता है।
यूनियन बजट 2023 आने में बाकी हैं सिर्फ कुछ हफ्ते, इसकी खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
ग्रामीण इलाकों पर भी होगा फोकस
इस रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रूरल और वेल्फेयर फर खर्च बढ़ा सकती हैं। फाइनेंशियल ईयर 2018-2019, फाइनेंशियल ईयर 2013-14 और फाइनेंशियल ईयर 2008-09 में भी सरकार ने लोकसभा चुनावों को देखते हुए बजट में ग्रामीण इलाकों और कल्याणकारी योजनाओं के लिए बजट आवंटन बढ़ाया था। गोल्डमैन सैक्स का यह भी कहना है कि ग्रामीण इलाकों में रोजगार बढ़ाने और हाउसिंग सेक्टर पर भी सरकार फोकस बढ़ा सकती है।
ज्यादा टैक्स क्लेक्शन को सरकार को मिलेगी मदद
उभरते बाजारों में इंडिया सबसे ज्यादा कर्ज-जीडीपी रेशियो वाले देशों में शामिल है। ऐसे में सरकार को फोकस फिस्कल कंसॉलिडेशन पर रहने की भी उम्मीद है। गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस फाइनेंशियल ईयर में फिस्कल डेफिसिट के 6.4 फीसदी के टारगेट को पूरा कर लेगी। इस फाइनेंशियल ईयर में डिसइनवेस्टमेंट टारगेट हासिल होने को लेकर कुछ अनिश्चितता है। लेकिन, डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्स कलेक्शंस बजट अनुमान से ज्यादा रहने की उम्मीद है। इससे सरकार को अपनी वित्तीय स्थिति को ठीक करने में मदद मिलेगी।