Union Budget 2023: रॉ मैटेरियल पर इंपोर्ट ड्यूटी हटाने से बढ़ेगी आर्टिफिशियल डायमंड उद्योग की चमक

Union Budget 2023: जेम एंड ज्वैलरी इंडस्ट्री का कहना है कि आर्टिफिशियल डायमंड का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में इसके रॉ मैटेरियल पर इंपोर्ट ड्यूटी हटाने से इंडिया को बहुत फायदा होगा। इसके अलावा सरकार को निर्यात बढ़ाने के लिए ज्वेलरी रिपेयर पॉलिसी का ऐलान करना चाहिए

अपडेटेड Jan 09, 2023 पर 5:39 PM
साल 2025 तक दुनिया में जेम्स एंड ज्वेलरी के एक्सपोर्ट में Lab-Grown Diamond (LGD) की हिस्सेदारी 10 फीसदी तक पहुंच जाएगी।

Union Budget 2023: जेम एंड ज्वेलरी इंडस्ट्री (Gem and Jewelry Industry) ने सरकार से मदद मांगी है। उसने कहा है कि यूनियन बजट (Budget 2023) में सरकार को लैब में विकसित होने वाले डायमंड्स के रॉ मैटेरियल पर इंपोर्ट ड्यूटी हटा देना चाहिए। साथ ही इस सेक्टर के सपोर्ट और निर्यात बढ़ाने के लिए ज्वेलरी रिपेयर पॉलिसी का ऐलान करना चाहिए। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी, 2023 को यूनियन बजट पेश करेंगी। इंडस्ट्री ने सरकार को स्पेशल नोटिफायड जोंस में बिकने वाले डायमंड्स पर प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन शुरू करने की सलाह दी है। उसने सरकार को प्रस्तावित DESH विधेयक पेश करने की भी सलाह दी। यह स्पेशल इकोनॉमिस जेंस के लिए मौजूदा कानूनों की जगह लेगा।

इंडस्ट्री ने डायमंड पैकेज की भी मांग की

जेम एंड ज्वेलरी इंडस्ट्री ने बजट से सरकार में 'डायमंड पैकेज' की भी मांग की है। उसने कहा है कि अमेरिका और यूरोप में हाई इनफ्लेशन और इकोनॉमिक क्राइसिस और चीन में बार-बार लॉकडाउन की वजह से डायमंड के एक्सपोर्ट पर असर पड़ा है। इससे सूरत में डायमंड इंडस्ट्री में रोजगार को मौकों पर भी असर पड़ा है। दुनियाभर में रफ डायमंड के पारंपिरक स्रोतों का डिपॉजिट घटने का खतरा मंडरा रहा है। इससे डायमंड एक्सट्रैक्शन की कॉस्ट भी काफी बढ़ जाएगी। इंडस्ट्री का कहना है कि ऐसे में लैब में तैयार होने वाला डायमंड फायदेमंद विकल्प नजर आता है।


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LGD के क्षेत्र में इंडिया के लिए हैं बड़ी संभावनाएं

कृत्रिम या लैब में तैयार किए जाने वाले डायमंड (LGD) को बनाने के लिए खास स्टैंडर्ड और आधुनिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाता है। आर्टिफिशियल डायमंड नेचुरल डायमंड की तरह दिखते हैं। इनका केमिकल कंपोजिशन और ऑप्टिकल क्वालिटीज भी नेचुरल डायमंड जैसी होती है। LGD को तैयार करने के लिए ए सीड का इस्तेमाल होता है। यह इसके लिए अहम रॉ मैटेरियल है। एक अनुमान के मुताबिक, साल 2025 तक दुनिया में जेम्स एंड ज्वेलरी के एक्सपोर्ट में एलजीडी की हिस्सेदारी 10 फीसदी तक पहुंच जाएगी। इसलिए यह इकोनॉमिक ग्रोथ में मददगार साबित हो सकता है। LGD की वजह से इंपोर्ट पर निर्भरता घटेगी, जिससे विदेशी मुद्रा का इस्तेमाल भी घटेगा।

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ज्वेलरी रिपेयर पॉलिसी का भी ऐलान करे सरकार

कामा ज्वेलरी के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर कोलिन शाह ने कहा, "अगर सीड पर ड्यूटी हटा दी जाती है तो LGD से रोजगार के मौके भी बढ़ेंगे।" ज्वेलरी रिपेयर पॉलिसी के बारे में उन्होंने कहा कि यूएई, हांगकांग और तुर्की जैसे देश इंडिया के मुख्य कॉम्पटिटर हैं। इसकी वजह यह है कि इन देशों में रिपेयर के लिए ज्वेलरी को री-इंपोर्ट करने और फिर उसे विदेश भेजने के लिए के लिए बहुत आसान पॉलिसी है।

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