Union Budget 2023: कोई देश तब तक तेजी से ग्रोथ नहीं कर सकता, जब तक आबादी के बड़े हिस्से को एफोर्डेबल हेल्थ सर्विसेज उपलब्ध न हों। आम आदमी को सस्ते इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सरकार को हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने की जरूरत है। अभी बेहतर सुविधाओं के लिए लोग प्राइवेट अस्पताल जाना पसंद करते हैं। लेकिन, वहां इलाज का खर्च बहुत ज्यादा है। ऐसे में सरकार को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए निवेश बढ़ाने की जरूरत है। प्रमुख उद्योग चैंबर PHDCCI ने कहा है कि सरकार को अगले यूनियन बजट में हेल्थ बजट को 30-40 फीसदी बढ़ाना चाहिए। पीएचडीसीआई का मानना है कि सरकार अगले यूनियन बजट (Budget 2023) में इसका ऐलान कर सकती हैं। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी, 2023 को यूनियन बजट पेश करेंगी। माना जा रहा है कि वित्त मंत्री कई सेक्टर के लिए आवंटन में अच्छी बढ़ोतरी करेंगी।
पिछले बजट में 16% बढ़ा था आवंटन
PHDCCI के प्रेसिडेंट साकेत डालमिया ने कहा कि हेल्थ के लिए 2021-22 और 2022-23 के बीच बजट अनुमान में करीब 16 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। सरकार को अगले यूनियन बजट में आवंटन में अच्छी बढ़ोतरी करने की जरूरत है। सरकार को हेल्दी लिविंग पर फोकस करना होगा। उन्होंने कहा, "स्कूली पाठ्यक्रम में भी हेल्दी लिविंग को शामिल करने की जरूरत है। लोकल बॉडीज, चैंबर्स और एसोसिएशंस को डायबिटीज जैसी बीमारियों के बारे में जागरूकता प्रोग्राम शुरू करने चाहिए।"
हेल्थ पॉलिसी के दायरे में वेलनेस टेस्ट्स को शामिल करने की जरूरत
सिनर्जी इनवायरोनिक्स के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर अजय पोद्दार ने कहा कि जल्द और सही डायग्नोसिस सबसे जरूरी है। इससे संक्रमण को जल्द बढ़ने से रोकने में मदद मिलेगी। साथ ही हेल्थ मैनेजमेंट में भी आसानी होगी। उन्होंने कहा हमें मल्टी-डिजिज डायग्नॉस्टिक प्लेटफॉर्म की जरूरत है। सरकार को ऐसे मैकेनिज्म और पॉलिसी बनानी चाहिए जिससे हेल्थ इंश्योरेंस के तहत वेलनेस टेस्ट्स और आयुश ट्रीटमेंट को भी शामिल किया जाए। रिसर्च पर ज्यादा खर्च करने से हेल्थकेयर कॉस्ट को प्रति व्यक्ति 1,000 रुपये तक सालाना घटाया जा सकता है।
आबादी के 75 फीसदी हिस्से के पास हेल्थ पॉलिसी नहीं
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी, 2023 को पेश होने वाले बजट से पहले इंडस्ट्री के अलग-अलग सेक्टर से कई दौर की बातचीत कर चुकी हैं। इसमें हेल्थ सेक्टर भी शामिल है। इस सेक्टर के प्रतिनिधियों ने उन्हें अपनी उम्मीदों के बारे में बताया है। NMIMS के हैदराबाद कैंपस के डायरेक्टर सिद्धार्थ घोष ने कहा कि इंडिया में स्वास्थ्य पर प्रति व्यक्ति होने वाला खर्च दुनिया में सबसे कम है। आबादी के 75 फीसदी हिस्से के पास कोई हेल्थ पॉलिसी नहीं है। उम्मीद है कि अगले यूनियन बजट में सरकार हालात में बदलाव लाने के लिए कदम उठाएगी।