Union Budget 2023: फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण के अगले यूनियन बजट से टैक्सपेयर्स को बहुत उम्मीदें हैं। उनकी दलील है कि महंगाई की वजह से उन्हें बहुत दिक्कत आ रही है। ऐसे में सरकार इनकम टैक्स के नियमों में बदलाव कर उन्हें राहत दे सकती है। इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) ने वित्त मंत्री को इनकम टैक्स एक्ट के 80C की लिमिट बढ़ाने की सलाह दी है। उसने कहा है कि सरकार को 80सी की मौजूदा 1.5 लाख रुपये को बढ़ाकर 2.5 लाख रुपये कर देना चाहिए। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी, 2023 को यूनियन बजट (Budget 2023) पेश करेंगी। यह 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार का आखिरी पूर्ण बजट होगा।
पिछले 7-8 साल से नहीं बढ़ी है लिमिट
इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80सी को बढ़ाने की मांग लंबे समय से हो रही है। फाइनेंशियल ईयर 2014-15 में सरकार ने इस लिमिट को 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये की थी। 80सी के तहत ऐसे करीब एक दर्जन ऐसे इंस्ट्रूमेंट्स और खर्च आते हैं, जिन पर एक फाइनेंशियल ईयर में मैक्सिम 1.5 लाख रुपये का इनकम टैक्स डिडक्शन क्लेम किया जा सकता है। यह ध्यान में रखना जरूरी है कि यह डिडक्शन इनकम टैक्स की सिर्फ ओल्ड रीजीम का इस्तेमाल करने वाले टैक्सपेयर्स को मिलता है।
पीपीएफ में कंट्रिब्यूशन की लिमिट भी बढ़ाने की मांग
ICAI ने कहा है कि सरकार को अगले यूनियन बजट में 80सी की लिमिट बढ़ाने के साथ ही PPF में निवेश की लिमिट बढ़ाने का भी ऐलान करना चाहिए। उसने कहा है कि पीपीएफ का इस्तेमाल नौकरीपेशा लोगों से लेकर कारोबार से जुड़े लोग भी करते हैं। अभी इसमें सालाना 1.5 लाख रुपये के कंट्रिब्यूशन पर टैक्स डिडक्शन की इजाजत है। इसे बढ़ाकर कम से कम 3 लाख रुपये की जा सकती है। पिछले कई साल से यह लिमिट बढ़ाई नहीं गई है। पिछले कुछ सालों में महंगाई बढ़ने से पैसे की वैल्यू घटी है। ऐसे में पीपीएफ की लिमिट बढ़ाने की जरूरत है।
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पीपीएफ के लिए अलग से डिडक्शन का प्रावधान किया जाए
एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि चूंकि लंबे समय से पीपीएफ बड़ी संख्या में लोगों के लिए रिटायरमेंट प्लानिंग का अच्छा माध्यम है। इसलिए सरकार को इस पर टैक्स डिडक्शन के लिए अलग से प्रावधान करना चाहिए। अभी यह 80सी के तहत आता है। चूंकि पहले से 80सी के तहत लाइफ इंश्योरेंस स्कीम, बच्चों की ट्यूशन फीस, म्यूचुअल फंड्स की टैक्स स्कीमें आदि आती है, जिससे पीपीएफ में पर्याप्त कंट्रिब्यूशन की गुंजाइश नहीं बचती है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट में इस बारे में ऐलान कर सकती हैं।