Union Budget 2023: इंडिया में केंद्र सरकार और राज्य सरकारों का फिस्कल डेफिसिट फाइनेंशियल ईयर 2022-23 में GDP का 9.9 फीसदी रहने का अनुमान है। IMF के मुताबिक, इसके मुकाबले उभरते बाजारों और मिडिल इनकम देशों का एवरेज फिस्कल डेफिसिट 6.2 फीसदी है। फाइनेंशियल ईयर 2018-19 में केंद्र और राज्यों का कुल फिस्कल डेफिसिट जीडीपी का 6.4 फीसदी था। इससे जाहिर होता है कि कोरोना की महामारी की वजह से सरकारों का फिस्कल डेफिसिट तेजी से बढ़ा है। ज्यादातार देशों के मामले में यही स्थिति है।
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फिस्कल डेफिसिट इतना ज्यादा होने पर सरकार के आर्थिक पैकेज का ऐलान करने की गुंजाइश सीमित हो जाती है। अब सवाल यह है कि कितना जल्द सरकार को फिस्कल डेफिसिट को सामान्य स्तर पर लाने की कोशिश करनी होगी। ऊपर के चार्ट से यह पता चलता है कि जीडीपी के फीसदी के रूप में सरकार का रेवेन्यू थाईलैंड और फिलीपींस जैसे देशों से थोड़ा ही कम है, जबकि इन देशों में प्रति व्यक्ति आय ज्यादा है। इंडिया में जीडीपी के फीसदी के रूप में सरकार का खर्च ज्यादा है। इसकी वजह सिर्फ आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों के लिए कोरोना की महामारी के दौरान सरकार की तरफ से दी गई आर्थिक सहायता नहीं है। फाइनेंशियल ईयर 2028-19 में भी जीडीपी के फीसदी के रूप में सरकारी खर्च 26.3 फीसदी था।
चीन में जीडीपी में सरकारी खर्च की हिस्सेदारी ज्यादा है, लेकिन वहां सरकार का रेवेन्यू भी ज्यादा है। IMF का अनुमान है कि फाइनेंशियल ईयर 2023-24 में फिस्कल डेफिसिट का टारगेट जीडीपी का 6.2 फीसदी हो सकता है। यह इस फाइनेंशियल ईयर में फिस्कल डेफिसिट के 6.4 फीसदी के अनुमान से थोड़ा ही कम होगा।