Union Budget 2023: अगले यूनियन बजट से पहले सरकार के पूंजीगत खर्च को लेकर काफी चर्चा हो रही है। कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि देश और दुनिया की इकोनॉमी को देखते हुए सरकार को पूंजीगत खर्च पर अपना फोकस बढ़ाए रखना चाहिए। उधर, कुछ इकोनॉमिस्ट्स का मानना है कि सरकार के लिए अगले फाइनेंशियल ईयर में ज्यादा खर्च करना मुमकिन नहीं होगा। इस बीच, प्रमुख उद्योग चैंबर ASSOCHAM के प्रेसिडेंट सुमंत सिन्हा ने CNBC-TV18 से कहा है कि अगर सरकार पूंजीगत खर्च पर फोकस बनाए रखना चाहती है तो उसे मार्केट से कम उधार लेने के साथ ही इंटरेस्ट रेट कम रखना होगा। JK Paper के मैनेजिंग डायरेक्टर हर्षपति सिंघानिया का मानना है कि अगले यूनियन बजट (Budget 2023) का फोकस ग्रोथ पर होगा।
सोलर मैन्युफैक्चरिंग सहित कुछ सेक्टर पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत
सिन्हा ने बताया कि इंटरेस्ट रेट कम रहने और सरकार के कम कर्ज लेने से पूंजीगत खर्च जारी रखना मुमकिन होगा। उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि सरकार ने कई सेक्टर के लिए PLI स्कीम की शुरुआत कर बहुत अच्छा कदम उठाया है। लेकिन, कुछ ऐसे सेक्टर हैं, जिन पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। सिर्फ PLI से काम नहीं चलेगा। सोलर मैन्युफैक्चरिंग इसका एक उदाहरण है। इसलिए सरकार को कुछ खास सेक्टरों के लिए पीएलआई बढ़ाने पर विचार करना चाहिए। दरअसल, इंडिया के पास सप्लाई के मामले में चीन का विकल्प बनने का शानदार मौका है।"
हेल्थ और एजुकेशन जैसे सोशल सेक्टर पर ज्यादा खर्च जरूरी
सिंघानिया ने कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अगले बजट में सरकार का फोकस ग्रोथ पर होगा। सरकार का फोकस इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी होगा। साथ ही सर्विस एरिया भी प्रायरिटी में होगा। उन्होंने कहा, "इडिया ने डिजिटल स्पेस में बड़ी कामयाबी हासिल की है। मेरा मानना है कि बजट में सरकार का फोकस इस पर रहने के साथ ही सोशल सेक्टर-हेल्थ और एजुकेशन पर रहेगा। ये किसी भी इकोनॉमी की ग्रोथ के लिए बहुत जरूरी हैं।"
वित्त मंत्री दे चुकी हैं पूंजीगत खर्च जारी रखने के संकेत
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले महीने कहा था कि सरकार का फोकस पूंजीगत खर्च पर बना रहेगा। इस वित्त वर्ष में सरकार ने पूंजीगत खर्च के लिए 7.5 लाख करोड़ रुपये का टारगेट तय किया है। यह फाइनेशियल ईयर 2021-22 के संशोधित अनुमान से 24 फीसदी ज्यादा है। हालांकि, पिछले हफ्ते चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर वी अनंत नागेशवरन ने कहा था कि सरकार के लिए पूंजीगत खर्च की मौजूदा रफ्तार को बनाए रखना मुश्किल होगा। उन्होंने कहा था कि पब्लिक सेक्टर के लिए कैपिटल इनवेस्टमेंट को मौजूदा स्तर पर बनाए रखने की जरूरत नहीं है। पूंजीगत खर्च में वृद्धि जारी रहेगी, लेकिन यह उतनी नहीं रहेगी जैसी अभी है। लेकिन, मौजूदा हालात को देखते हुए उम्मीद है कि पूंजीगत खर्च पर सरकार फोकस बनाए रखेगी।