Union Budget 2023: इंटरेस्ट रेट घटाने से ग्राहको को सस्ती कीमत पर मिलेगी बिजली

Union Budget 2023: रिन्यूएबल एनर्जी कंपनियों को कम इंटरेस्ट रेट पर लोन मिलने से वे ग्राहकों को सस्ती बिजली उपलब्ध करा सकेंगी। इंटरेस्ट रेट 1 फीसदी बढ़ने पर ग्राहक को मिलने वाली बिजली प्रति यूनिट 15 पैसे तक महंगी हो जाती है। सरकार यूनियन बजट में रिन्यूएबल एनर्जी कंपनियों को सस्ते रेट पर बिजली उपलब्ध कराने का ऐलान कर सकती है

अपडेटेड Dec 26, 2022 पर 5:49 PM
अमेरिका में हाइड्रोजन की जेनरेशन कॉस्ट 3-4 डॉलर है। सरकार कंपनियों को करीब इतनी ही सब्सिडी देती है। इससे एक तरह से कंपनियों के लिए कॉस्ट करीब जीरो हो जाती है।

Union Budget 2023: लोन का इंटरेस्ट रेट घटाने से कंपनियों खासकर रिन्यूएबल एनर्जी फर्मों को फायदा होगा। ASSOCHAM के प्रेसिडेंट सुमंत सिन्हा (Sumant Sinha) ने यह कहा है। उन्होंने कहा कि इंडिया में कंपनियों को लोन पर 8-10 फीसदी इंटरेस्ट रेट चुकाना पड़ता है। इसके मुकाबले पश्चिमी देशों में इंटरेस्ट रेट 3-4 फीसदी है। उन्होंने कहा कि उन सेक्टर की कंपनियों के लिए इंटरेस्ट रेट में कमी करने की जरूरत है, जिनके बिजनेस के लिए इंटरेस्ट रेट बहुत मायने रखता है। उन्होंने कहा कि सरकार अगले यूनियन बजट में इस बारे में ऐलान करने के बारे में सोच सकती है। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी, 2023 को यूनियन बजट (Union Budget) पेश करेंगी। इसमें वह कंपनियों के लिए कर्ज को सस्ता करने उपाय का ऐलान कर सकती हैं।

पश्चिमी देशों में लोन का इंटरेस्ट रेट बहुत कम

सिन्हा ReNew Power के चेयरमैन भी हैं। उन्होंने कहा, "इंटरेस्ट रेट में कमी लाने की जरूरत है। यह हमारे जैसे रेट सेंसेटिव सेक्टर के लिए बहुत मायने रखता है। दुनिया के दूसरे हिस्सों के मुकाबले यह बहुत ज्यादा है। इंडिया में रेट 8 से 9.5 फीसदी के बीच है। पश्चिमी देशों में यह 3 से 4 फीसदी है।" उन्होंने कहा कि इंटरेस्ट रेट 1 फीसदी बढ़ने से पावर के टैरिफ पर करीब 15 पैसे असर पड़ता है। इसलिए अगर लोन सस्ता मिलेगा तो इंडस्ट्री ग्राहकों को भी सस्ती बिजली उपलब्ध कर सकेगी।


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सोलर मॉड्यूल के लिए पीएलआई आवंटन बढ़ाने की जरूरत

उन्होंने कहा कि सरकार को सोलर मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग के लिए PLI आवंटन बढ़ाने की जरूरत है। इसका ऐलान फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण कर सकती हैं। फाइनेंशियल ईयर 2022-23 के लिए यह आवंटन 19,500 करोड़ रुपये है। इसमें अच्छी वृद्धि करने की जरूरत है। हमें उम्मीद है कि हमारे सेक्टर के लिए वित्त मंत्री अगले यूनियन बजट में ग्रीन हाइड्रोजन पॉलिसी का ऐलान करेंगी। अगर हमें इस मामले में ग्लोबल कंपनियों का मुकाबला करना है तो हमें हाइड्रोजन मैन्युफैक्चरिंग को सब्सिडी देने की जरूरत है। अमेरिका में हाइड्रोजन की जेनरेशन कॉस्ट 3-4 डॉलर है। सरकार कंपनियों को करीब इतनी ही सब्सिडी देती है। इससे एक तरह से कंपनियों के लिए कॉस्ट करीब जीरो हो जाती है।

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रिन्यूएबल एनर्जी इंडस्ट्री की मदद से इंडिया बनेगा हाइड्रोजन मैन्युफैक्चरिंग का हब

पिछले साल स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेशनल हाइड्रोजन मिशन लॉन्च किया था। इसका मकसद इंडिया को ग्रीन हाइड्रोजन का हब बनाने के साथ ही क्लाइमे टारगेट हासिल करना है। सरकार इलेक्ट्रोलाइजर्स के लिए भी पीएलआई स्कीम का ऐलान कर सकती है। इसका इस्तेमाल हाइड्रोजन के उत्पादन में होता है। इस इक्विपमेंट की घरेलू उपबल्धता से इंडिया को हाइड्रोजन मैन्युफैक्चरिंग का हब बनाने में मदद मिलेगी।

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