Union Budget 2023: यह फिस्कल कंसॉलिडेशन के लिए सही वक्त नहीं, MPC मेंबर अशिमा गोयल की सलाह

union budget 2023: सरकार ने कोरोना की महामारी के दौरान इकोनॉमी को सपोर्ट देने के लिए अपना पूंजीगत खर्च बहुत बढ़ाया था। इससे सरकार का फिस्कल डेफिसिट बहुत बढ़ गया। कई एक्सपर्ट्स का कहना है कि अब सरकार को अपनी वित्तीय स्थिति ठीक करने पर फोकस करना चाहिए। लेकिन, अशिमा गोयल की राय इस मामले में अलग है

अपडेटेड Dec 29, 2022 पर 7:49 PM
मॉनेटरी पॉलिसी में सख्ती की वजह से ग्लोबल इकोनॉमी में स्लोडाउन के हालात बने हैं। इसका असर इंडियन इकोनॉमी पर भी पड़ने का अनुमान है। इसके संकेत अभी से दिखने शुरू हो गए हैं।

Budget 2023: सरकार को इस वक्त फिस्कल कंसॉलिडेशन (Fiscal Consolidation) पर बहुत ज्यादा फोकस नहीं करना चाहिए। RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की सदस्य अशिमा गोयल (Ashima Goyal) ने यह कहा है। वह MPC के तीन बाहरी सदस्यों में से एक हैं। उनका मानना है कि अभी ग्लोबल इकोनॉमी पर स्लोडाउन का खतरा मंडरा रहा है। ऐसे में फिस्कल कंसॉलिडेशन के लिए यह सही वक्त नहीं है। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण 1 फरवरी, 2023 को यूनियन बजट पेश करेंगी। यह बजट ऐसे वक्त आ रहा है, जब अमेरिका, यूरोप और इंग्लैंड जैसी बड़ी इकोनॉमी पर मंदी का खतरा मंडरा रहा है। इधर, इंडिया में इकोनॉमी की स्थिति अपेक्षाकृत अच्छी है। गोयल ने कहा कि फाइनेंशियल ईयर 2025-26 तक फिस्कल डेफिसिट को जीडीपी के 4.5 फीसदी तक लाने पर फोकस बनाए रखना सबसे बेहतर होगा।

फिस्कल डेफिसिट का टारगेट इस वित्त वर्ष 6.4 फीसदी

गोयल ने यह बात तब कही है, जब फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण के बजट पेश करने में करीब एक महीना का समय बचा है। कई इकोनॉमिस्ट्स का मानना है कि सरकार अगले फाइनेंशियल ईयर में 6 फीसदी फिस्कल डेफिसिट का टारगेट तय कर सकती है। पिछले हफ्ते International Monetary Fund ने कहा था कि सरकार को अपनी वित्तीय स्थिति को ठीक करने पर फोकस बढ़ाना चाहिए। इस फाइनेंशियल ईयर के लिए सरकार ने फिस्कल डेफिसिट का 6.4 फीसदी का टारगेट तय किया है।


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सरकार पर खर्च में कमी करने का दबाव

सरकार पर करोना की महामारी के दौरान अपने बढ़े खर्च को वापस लेने का दबाव है। इधर, मॉनेटरी पॉलिसी में सख्ती की वजह से ग्लोबल इकोनॉमी में स्लोडाउन के हालात बने हैं। इसका असर इंडियन इकोनॉमी पर भी पड़ने का अनुमान है। इसके संकेत अभी से दिखने शुरू हो गए हैं। अक्टूबर में इंडिया का मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट 17 फीसदी गिरा है। नवंबर में इसमें सिर्फ 0.6 फीसदी की मामूली वृद्धि देखने को मिली है।

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ग्लोबल इकोनॉमी में सुस्ती का असर भारत पर भी

विदेश में इंडियन गुड्स की मांग में तब कमी आई है, जब घरेलू बाजार में इनवेस्टमेंट साइकिल में अभी तेजी आनी बाकी है। गोयल का मानना है कि ऐसे हालात में सरकार को पूंजीगत खर्च पर अपना फोकस बनाए रखना चाहिए। सरकार को इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी खर्च जारी रखना चाहिए। RBI ने फाइनेंशियल ईयर 2023-24 में जीडीपी की ग्रोथ 6.5 फीसदी रहने का अनुमान जताया है। गोयल का कहना है कि 7 फीसदी की ग्रोथ बेहतर होगी, जबकि 6 फीसदी की ग्रोथ ज्यादा व्यावहारिक होगी।

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