Budget 2023: इनकम टैक्स रेट में कमी, ज्यादा स्टैंडर्ड डिडक्शन, सेविंग्स बढ़ाने के उपाय...से आम आदमी को राहत दे सकती हैं वित्त मंत्री

Union Budget 2023: करीब ढाई साल तक कोरोना की महामारी ने आम लोगों की जिंदगी पर बहुत असर डाला है। आर्थिक गतिविधियां फिर से पटरी पर लौट आई हैं। लेकिन, परिवारों की वित्तीय स्थिति अब भी पटरी पर नहीं लौटी है। ऐसे में सरकार बजट में आम लोगों को राहत देने के लिए उपायों का ऐलान कर सकती है

अपडेटेड Dec 28, 2022 पर 2:45 PM
सरकार को स्टैंडर्ड डिडक्शन की लिमिट अगले बजट में बढ़ाने का ऐलान करना चाहिए। इससे नौकरी करने वाले लोगों को बहुत फायदा होगा। अभी सालाना 50,000 रुपये के स्टैंडर्ड डिडक्शन की इजाजत है। इसे बढ़ाकर कम से कम 1 लाख रुपये करने की जरूरत है।

Union Budget 2023: फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी, 2023 को यूनियन बजट पेश करने जा रही हैं। यह बजट ऐसे वक्त आ रहा है, जब कोरोना की महामारी के बाद आर्थिक गतिविधियां फिर से पटरी पर लौट आई हैं। हालांकि, मार्च 2020 में शुरू हुई कोरोना की महामारी ने लोगों पर इतना खराब असर डाला है, जिसकी भरपाई अब भी नहीं हो पाई है। खासकर कोरोना की दूसरी लहर ने परिवारों को बहुत चोट पहुंचाई है। कई ऐसे परिवार हैं, जिसने अपने सदस्यों को खो दिया है। साथ ही कोरोना से संक्रमित अपने लोगों के इलाज पर लोगों को बहुत खर्च करना पड़ा है। इसका सीधा असर उनकी वित्तीय स्थिति पर पड़ा है। ऐसे परिवारों को सरकार की मदद की जरूरत है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ऐसे लोगों को राहत देने के लिए यूनियन बजट (Budget 2023) में कई तरह के उपाय कर सकती हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि वित्त मंत्री के इन उपायों से कोरोना से प्रभावित परिवारों की जिंदगी फिर से पटरी पर लौट सकती है।

इनकम टैक्स रेट्स में कमी

वित्त मंत्री इनकम टैक्स रेट में कमी का ऐलान कर सकती हैं। अगर ऐसा स्थायी रूप से करना मुमकिन न हो तो वह अगले दो साल के लिए लोगों को टैक्स में राहत दे सकती हैं। लोगों पर टैक्स का बोझ कम होने से उनके हाथ में ज्यादा पैसे बचेंगे। अभी सालाना 10 लाख रुपये तक की इनकम वाले लोगों के लिए टैक्स रेट 30 फीसदी है। बढ़ती महंगाई के बीच सालाना 10 लाख रुपये की इनकम बहुत ज्यादा नहीं है। सरकार कम से कम दो साल के लिए लोगों के लिए टैक्स के रेट को घटाकर 10 फीसदी कर सकती है। इससे लोगों को बहुत राहत मिलेगी।

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इनकम टैक्स से छूट की आय सीमा बढ़ाई जाए

अभी इनकम टैक्स से छूट के लिए आय की सीमा सालाना 2.5 लाख रुपये है। इसे बढ़ाकर कम से कम दोगुना करने की जरूरत है। सरकार ने पिछले कई सालों से इस सीमा को नहीं बढ़ाया है, जबकि इस दौरान महंगाई काफी बढ़ गई है। महंगाई बढ़ने से लोगों का खर्च भी बढ़ा है। इधर, कोरोना की महामारी की वजह से लोग दबाव का सामना कर रहे हैं। इसलिए सरकार को टैक्स से छूट के लिए इनकम की सीमा बढ़ाने की जरूरत है। इससे बड़ी संख्या में लोगों खासकर नौकरी करने वाले लोगों को राहत मिलेगी, जो किसी तरह अपने परिवार का गुजारा कर रहे हैं।

न्यू टैक्स रीजीम को अट्रैक्टिव बनाया जाए

सरकार ने फाइनेंशियल ईयर 2019-20 के बजट में इनकम टैक्स के न्यू रीजीम को पेश किया था। लेकिन, इसे टैक्सपेयर्स का अच्छा रिस्पॉन्स नहीं मिला है। अब भी ज्यादातर टैक्सपेयर्स ओल्ड रीजीम में दिलचस्पी दिखाते हैं। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण को नई टैक्स रीजीम को आकर्षक बनाने के उपाय अगले यूनियन बजट में करने चाहिए। यह उन लोगों के लिए काफी फायदेमंद है जो डिडक्शन और एग्जेम्प्शन का दावा नहीं करते हैं। लेकिन, अभी इसे अपनाने वालों को ज्यादा फायदा नहीं होता है।

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जरूरी हैं सेविंग्स बढ़ाने के उपाय

अगले यूनियन बजट में सरकार को परिवारों की सेविंग्स बढ़ाने के उपाय करने चाहिए। अभी सेक्शन 80सी के तहत करीब एक दर्जन ऐसे खर्च और सेविंग्स ऑप्शन शामिल हैं, जिस पर इनकम टैक्स एक्ट में सालाना 1.5 लाख रुपये तक के डिडक्शन की इजाजत है। सरकार ने पिछले 6-7 साल से इसमें किसी तरह का बदलाव नहीं किया है। वित्त मंत्री को अगले यूनियन बजट में इस लिमिट को बढ़ाकर कम से कम 3 लाख रुपये सालाना करने की जरूरत है। इससे लोगों को ज्यादा सेविंग्स करने में मदद मिलेगी।

स्टैंडर्ड डिक्शन बढ़ाने से करोड़ों लोगों को फायदा

सरकार को स्टैंडर्ड डिडक्शन की लिमिट अगले बजट में बढ़ाने का ऐलान करना चाहिए। इससे नौकरी करने वाले लोगों को बहुत फायदा होगा। अभी सालाना 50,000 रुपये के स्टैंडर्ड डिडक्शन की इजाजत है। इसे बढ़ाकर कम से कम 1 लाख रुपये करने की जरूरत है। सरकार को खासकर पिछले दो साल में कोरोना की महामारी का परिवारों की आर्थिक स्थिति पर पड़े असर को ध्यान में रखकर यह फैसला करना चाहिए। अगर सरकार स्थायी रूप से इस लिमिट को नहीं बढ़ा सकती तो उसे अगले 2-3 सालों के लिए इस लिमिट को बढ़ा देना चाहिए।

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