Union Budget 2023: हेल्थ पॉलिसी पर डिडक्शन की ज्यादा लिमिट और टैक्स से छूट की आय सीमा बढ़ने... से सीनियर सिटीजंस को मिलेगी बड़ी राहत

Union Budget 2023: सीनियर सिटीजंस (Senior Citizens) यानी 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों के लिए टैक्स से छूट के लिए इनकम की मौजूदा 3 लाख रुपये की सीमा बढ़ाकर 5 लाख रुपये की जा सकती है। अभी 80 साल से ज्यादा उम्र के सीनियर सिटीजंस को सालाना 5 लाख रुपये तक की इनकम पर टैक्स से छूट मिलती है

अपडेटेड Dec 21, 2022 पर 12:10 PM
एक सीनियर सिटीजन खुद और अपनी पत्नी के लिए अच्छे कवर वाली हेल्थ पॉलिसी लेना चाहता है तो उसका प्रीमियम 50,000 रुपये से ऊपर चला जाता है। इसलिए फाइनेंस मिनिस्टर को सेक्शन 80डी की लिमिट को बढ़ाकर 1 लाख रुपये कर देना चाहिए।

Union Budget 2023: इस बजट से लोगों खासकर टैक्सपेयर्स को बहुत उम्मीदें हैं। उनका मानना है कि 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले यह सरकार का आखिरी पूर्ण बजट है। इसलिए फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी, 2023 को आम लोगों को टैक्स में राहत देने के कई उपाय कर सकती हैं। टैक्स एक्सपर्ट्स ने फाइनेंस मिनिस्टर को कई सलाह दी हैं। इनमें टैक्स से छूट के लिए इनकम की मौजूदा सीमा बढ़ाने, सेक्शन 80सी की लिमिट बढ़ाने, कैपिटल गेंस टैक्स के नियमों में बदलाव, घर खरीदारों के लिए टैक्स बेनेफिट बढ़ाने और न्यू टैक्स रीजीम में राहत बढ़ाने की सलाह शामिल हैं। सीनियर सिटीजंस के लिए भी वित्त मंत्री टैक्स बेनेफिट बढ़ा सकती हैं।

सीनियर सिटीजंस (Senior Citizens) यानी 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों के लिए टैक्स से छूट के लिए इनकम की मौजूदा 3 लाख रुपये की सीमा बढ़ाकर 5 लाख रुपये की जा सकती है। अभी 80 साल से ज्यादा उम्र के सीनियर सिटीजंस को सालाना 5 लाख रुपये तक की इनकम पर टैक्स से छूट मिलती है।

इलाज के सभी खर्च पर डिडक्शन की इजाजत मिलनी चाहिए


अभी सीनियर सिटीजंस हेल्थ पॉलिसी के 50,000 रुपये तक के सालाना प्रीमियम पर टैक्स डिडक्शन का दावा कर सकते हैं। इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80D के तहत इसकी इजाजत है। अगर बुजुर्गों के बच्चे उनके लिए प्रीमियम का पेमेंट करते हैं तो वे इस डिडक्शन को क्लेम कर सकते हैं। सरकार उन सीनियर सिटीजंस को भी टैक्स बेनेफिट देती हैं, जिन्होंने कोई हेल्थ पॉलिसी नहीं खरीदी है। ऐसे लोग एक फाइनेंशियल ईयर में इलाज पर हुए 50,000 रुपये तक के खर्च पर डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं।

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ऑप्टिम मनी मैनेजर्स के फाउंडर पंकज मथपाल का कहना है, "जब देश में इलाज पूरी तरह फ्री नहीं है, यहां तक कि सरकार हॉस्पिटल में भी पैसे देने पड़ते हैं तो सरकार को बगैर किसी लिमिट के इलाज के पूरे खर्च पर 100 फीसदी डिडक्शन की इजाजत देनी चाहिए।" अभी रेगुलर हेल्थ पॉलिसीज हॉस्पिटल के OPD पर हुए खर्च को कवर नहीं करती हैं। इनमें फार्मेंसी बिल, डॉक्टर की कंसल्टेशन फीस और डॉयग्नॉस्टिक टेस्ट्स शामिल होते हैं। फाइनेंस मिनिस्टर को इन खर्चों पर डिडक्शन की इजाजत देनी चाहिए। कई सीनियर सिटीजंस को डायबिटीज और ब्लड प्रेशर जैसी क्रॉनिक बीमारियां होती हैं। इसके लिए उन्हें दवाएं लेनी पड़ती हैं। समय-समय पर डॉक्टर से दिखाना और टेस्ट्स भी कराने पड़ते हैं। इन खर्चों पर डिडक्शन की इजाजत होनी चाहिए।

हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर 80D की लिमिट बढ़ाई जाए

कोरोना की महामारी इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80डी की लिमिट बढ़ाने की मांग बढ़ रही है। कोरोना की महामारी के बाद हेल्थ इंश्योरेंस का प्रीमियम काफी बढ़ गया है। कई लोगों ने स्वेच्छा से भी अपनी हेल्थ पॉलिसी की लिमिट बढ़ाई है। अपनाधन फाइनेंशियल सर्विसेज की फाउंडर प्रीति जेंडे ने कहा, "अगर एक सीनियर सिटीजन खुद और अपनी पत्नी के लिए अच्छे कवर वाली हेल्थ पॉलिसी लेना चाहता है तो उसका प्रीमियम 50,000 रुपये से ऊपर चला जाता है। इसलिए फाइनेंस मिनिस्टर को सेक्शन 80डी की लिमिट को बढ़ाकर 1 लाख रुपये कर देना चाहिए।"

सेविंग्स और एफडी पर इंटरेस्ट डिडक्शन बढ़ाकर 1 लाख किया जाए

सीनियर सिटीजंस को बैंक और पोस्ट ऑफिस फिक्स्ड डिपॉजिट्स पर मिलने वाले इंटरेस्ट पर 50,000 रुपये तक के डिडक्शन की इजाजत है। यह डिडक्शन सेक्शन 80टीटीबी के तहत मिलता है। वियाल्टो पार्टनर्स के पार्टनर कुलदीप कुमार ने कहा, "बढ़ता इनफ्लेशन लोगों की सेविंग्स चट कर रहा है। बुजुर्गों की इनकम के स्रोत भी सीमित होते हैं। इसलिए इस लिमिट को बढ़ाकर 1 लाख रुपये करने की जरूरत है।"

पेंशन को टैक्स-फ्री किया जाए

यह मांग लंबे समय से हो रही है। न सिर्फ सीनियर सिटीजंस बल्कि लाइफ इंश्योरेंस कंपनियां भी पेंशन को टैक्स-फ्री करने की मांग कर रही हैं। अभी रिटायरमेंट कॉर्पस से सीनियर सिटीजंस को मिलने वाली पेंशन इनकम या एन्युटी टैक्स के दायरे में आती है। यह नियम नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) कॉर्पस और लाइफ इंश्योरेंस की पेंशन पॉलिसीज से खरीदी गई एन्युटी पर भी लागू होता है। रिटायर व्यक्ति को पेंशन की पूरी रकम (प्रिंसिपल और इंटरेस्ट) पर टैक्स लगता है। अगर फाइनेंस मिनिस्टर यूनियन बजट 2023 में कम से कम प्रिंसिपल कंपोनेंट को टैक्स के दायरे से बाहर करने का ऐलान करती हैं तो इससे सीनियर सिटीजंस को बहुत राहत मिलेगी।

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