Union Budget 2023: इनकम टैक्स की न्यू रीजीम को अट्रैक्टिव बनाने के लिए ये बदलाव कर सकती हैं निर्मला सीतारमण

Union budget 2023: एक्सपर्ट्स का कहना है कि इनकम टैक्स की न्यू रीजीम में कई कमियां हैं। इसलिए इसमें टैक्सपेयर्स ने दिलचस्पी नहीं दिखाई है। अगर सरकार इसमें कुछ बदलाव करती है तो इसमें टैक्सपेयर्स दिलचस्पी दिखा सकते हैं। उम्मीद है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण यूनियन बजट 2023 में इसमें कुछ बदलाव करेंगी

अपडेटेड Jan 13, 2023 पर 2:56 PM
सरकार ने बजट 2020 में इनकम टैक्स की नई रीजीम की शुरुआत की थी। इसमें टैक्सपेयर्स ने ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई है। इसे अट्रैक्टिव बनाने की जरूरत है।

Union Budget 2023: सरकार ने बजट 2020 में इनकम टैक्स की नई रीजीम की शुरुआत की थी। इसमें टैक्सपेयर्स ने ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई है। इसे अट्रैक्टिव बनाने की जरूरत है। नई टैक्स रीजीम में कम टैक्स और ज्यादा स्लैब ऑफर किया गया था। लेकिन, एग्जेम्प्शंस वापस ले लिया गया था। अगर कोई टैक्सपेयर इस रीजीम को अपनाता है तो उसे करीब 70 एग्जेम्प्शंस और डिडक्शन का फायदा नहीं मिलता है। अगर कोई टैक्सपेयर अपना टैक्स घटाने के लिए इनवेस्टमेंट करता है तो नई रीजीम में उसका फायदा नहीं मिलता है। इनमें HRA अलाउन्स, होम लोन के इंटेरेस्ट पर डिडक्शन, सेक्शन 80सी, 80डी और 80सीसीडी तहत मिलने वाले डिडक्शंस शामिल हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इनवेस्टमेंट्स और सोशल सिक्योरिटी से जुड़े कुछ डिडक्शंस का फायदा न्यू टैक्स रीजीम में भी मिलना चाहिए। इससे इसमें टैक्सपेयर्स की दिलचस्पी बढ़ेगी।

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बेसिक एग्जेम्प्शंस लिमिट 5 लाख रुपये करने की जरूरत


EY के मुताबिक, टैक्सपेयर्स को एक फाइनेंशियल ईयर में 2.5 लाख रुपये तक के डिडक्शंस की इजाजत होनी चाहिए। बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट को बढ़ाकर 5 लाख रुपये करना चाहिए। अभी यह 2.5 लाख रुपये है। इसका मतलब है कि सालाना 2.5 लाख रुपये तक की इनकम वाले व्यक्ति को इनकम टैक्स से छूट हासिल है। एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि 50,000 रुपये के स्टैंडर्ड डिडक्शन का फायदा न्यू टैक्स रीजीम में भी दी जानी चाहिए।

टैक्स स्लैब्स में भी बदलाव होना चाहिए

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इनकम टैक्स स्लैब्स में भी बदलाव करने की जरूरत है। कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि टैक्स का पीक रेट (सबसे ज्यादा रेट) घटाकर 25 फीसदी करना चाहिए। कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिर्फ 20 लाख रुपये सालाना से ज्यादा इनकम वाले लोगों के लिए टैक्स का 30 फीसदी का पीक रेट होना चाहिए। अभी 15 लाख रुपये से ज्यादा इनकम वाले लोग पीक टैक्स रेट के दायरे में आते हैं।

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होम लोन के इंटरेस्ट पर डिडक्शन लिमिट बढ़ाई जाए

होम लोन लेने वाले और घर का किराया चुकाने वाले लोगों को भी टैक्स में रियायत देने की जरूरत है। इंटरेस्ट रेट्स बढ़ने के बाद होम लोन लेने वाले लोगों की EMI भी बढ़ गई है। न्यू रीजीम में होम लोने लेने वाले लोगों को इंटरेस्ट पेमेंट पर किसी तरह का डिडक्शन नहीं मिलता है। हाउसिंग सेक्टर इकोनॉमिक रिकवरी के लिए बहुत अहम है। इस सेक्टर में रोजगार के मौके पैदा करने की भी काफी क्षमता है।

रियल्टी सेक्टर ने बढ़ते इनफ्लेशन को देखते हुए होम लोग लेने वाले लेगों के लिए इंटरेस्ट पर मिलने वाला डिडक्शन बढ़ाने की मांग की है। अभी होम लोने के इंटरेस्ट पेमेंट पर 2 लाख रुपये तक के डिडक्शन की इजाजत है। बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट को बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने से भी डिमांड बढ़ाने में मदद मिलेगी। इससे टैक्सपेयर्स के हाथ में खर्च के लिए ज्यादा पैसे बचेंगे।

इनकम टैक्स की ओल्ड रीजीम में 2.5 लाख रुपये की सालाना इनकम पर टैक्स नहीं लगता है। 2.5 से 5 लाख रुपये की इनकम पर 5 फीसदी टैक्स लगता है। 5 से 10 लाख रुपये की इनकम पर 20 फीसदी टैक्स लगता है। 10 लाख रुपये से ज्यादा इनकम पर 30 फीसदी टैक्स लगता है।

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