बजट 2023: कई शहरों में बड़ी संख्या में हाउसिंग प्रोजेक्ट्स अटके पड़े हैं। ऐसे हाउसिंग यूनिट्स की संख्या करीब 5 लाख हो सकती है। इन्हें खरीदने वाले ग्राहक मुश्किल में हैं। ज्यादातर लोगों ने बैंक से लोन लेकर घर खरीदा है। उन्हें हर महीने EMI चुकानी पड़ती है। लेकिन, घरों की डिलीवरी कब मिलेगी, यह उन्हें पता नहीं है। ऐसे ग्राहकों को उम्मीद है कि सरकार यूनियन बजट 2023 (Union Budget 2023) में ऐसी स्कीम का ऐलान करेगी, जिससे पिछले कई सालों से अटके हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को पूरा किया जा सकेगा। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को यूनियन बजट 2023 पेश करेंगी।
होम लोन इंटरेस्ट पर टैक्स रिबेट बढ़ाएगी सरकार
घर खरीदने वाले ग्राहकों का यह भी कहना है कि इंटरेस्ट रेट्स बढ़ने से वे मुश्किल में आ गए हैं। उन्हें उम्मीद है कि वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) बजट 2023 में उनकी मुश्किल दूर कर सकती हैं। वह होम लोन के इंटरेस्ट पर टैक्स रिबेट को मौजूदा 2 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर कम से कम 7 लाख रुपये कर सकती हैं।
रेरा-रजिस्टर्ड प्रोजेक्ट्स में घर खरीदने वालों को मिले इनसेंटिव
होमबायर्स का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था Forum for People's Collectives Efforts के अभय उपाध्याय ने कहा, "पिछले एक साल में होम लोन का इंटरेस्ट रेट तेजी से बढ़ा है। इसका सीधा असर घर खरीदने वाले लोगों के बजट पर पड़ा है। हमें उम्मीद है कि सरकार इस बारे में गंभीरता से सोचेगी और सबवेंशन स्कीम का ऐलान करेगी या इंटरेस्ट अमाउंट पर पूरा डिडक्शन का ऐलान करेगी।" RERA-रजिस्टर्ड प्रोजेक्ट्स में घर खरीदने वाले ग्राहकों को भी प्रोत्साहन दिए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इससे ग्राहक सिर्फ रेरा-रजिस्टर्ड घर खरीदने में दिलचस्पी दिखाएंगे। साथ ही रियल एस्टेट कंपनियां भी रेरा में रजिस्ट्रेशन कराने के लिए प्रोत्साहित होंगी।
अटके पड़े हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को जल्द पूरा करने की जरूरत
नोएडा एक्सटेंशन फ्लैट ओनर्स वेल्फेयर एसोसिएशन (NEFOWA) के प्रेसिडेंट अखिलेश कुमार ने कहा कि सरकार का फोकस उन फ्लैट्स को पूरे करने पर होना चाहिए, जो कई सालों से अटकी पड़ी हैं। ग्राहक उनके जल्द पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं। कुछ ग्राहक तो पिछले 12 साल से अपने फ्लैट की डिलीवरी मिलने का इंतजार कर रहे हैं। इसकी वजह यह है कि बिल्डर्स ने बीच में ही प्रोजेक्ट्स पर काम बंद कर दिए हैं। इन ग्राहकों ने फ्लैट का पूरा पैसा भी चुका दिया है।
बगैर रजिस्ट्रेशन हो रही फ्लैट की डिलीवरी
दूसरा अहम मसला रजिस्ट्रेशन से जुड़ा है। सिर्फ नोएडा में 70,000 से ज्यादा ऐसे फ्लैट्स हैं, जिनके खरीदारों को रजिस्ट्रेशन के बगैर डिलीवरी लेने को मजबूर किया गया है। अखिलेश कुमार ने कहा कि इसकी वजह यह है कि बिल्डर पर अथॉरिटीज का पैसा बकाया है। सवाल है कि बिल्डर की गलती की सजा घर खरीदारों को क्यों मिलनी चाहिए। खासकर तब जब उन्होंने फ्लैट का 100 फीसदी पैसा चुका दिया है। आखिरकार यह लड़ाई तो बिल्डर और अथॉरिटीज के बीच है।