Union Budget 2023 : निर्मला सीतारमण के बजट से खेत-खलिहानों में बढ़ेगी हरियाली, जानिए सरकार का प्लान

बजट 2023 : अगले फाइनेंशियल ईयर में सब्सिडी खासकर फर्टिलाइजर सब्सिडी पर सरकार के खर्च में कमी आने की उम्मीद है। इससे सरकार के लिए एग्रीकल्चर सेक्टर के लिए आवंटन बढ़ाना आसान होगा। इस बार भी बजट में एग्री-इनपुट्स पर सरकार का फोकस रहने की उम्मीद है

अपडेटेड Jan 18, 2023 पर 1:02 PM
सरकार अगले फाइनेंशियल ईयर में फर्टिलाइजर सब्सिडी में कमी करने पर विचार कर रही है। इसे घटाकर 1.4-1.5 लाख करोड़ रुपये किया जा सकता है।

Budget 2023: फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) के पिछले बजटों में भी कृषि सेक्टर (Agri Sector) पर सरकार का फोकस देखने को मिला है। इस बार भी कृषि खासकर एग्री-इनपुट सेक्टर पर सरकार का जोर बने रहने की उम्मीद है। इस फानेंशियल ईयर में फर्टिलाइजर सब्सिडी (Fertilizer Subsidy) पर सरकार का खर्च करीब 2.3 से 2.5 लाख करोड़ रुपये रहने की उम्मीद है। इसकी वजह रॉ मैटेरियल और इंपोर्टेड फर्टिलाइजर्स की कीमतों में उछाल है। अधिकारियों का कहना है कि सरकार अगले फाइनेंशियल ईयर में फर्टिलाइजर सब्सिडी में कमी करने पर विचार कर रही है। इसे घटाकर 1.4-1.5 लाख करोड़ रुपये किया जा सकता है। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को यूनियन बजट पेश करेंगी।

अगले फाइनेंशियल ईयर में सब्सिडी खर्च में आएगी कमी

कमोडिटी और फर्टिलाइजर्स की कीमतें साल 2022 में पीक (उच्चतम) लेवल पर पहुंचने के बाद अब नीचे आ रही हैं। सरकार ने संशोधित गैस प्रोक्योरमेंट पॉलिसी भी पेश की है। इसमें मैन्युफैक्चरर्स को गैस का कुछ हिस्सा स्पॉट प्राइसेज पर खरीदने की इजाजत दी गई है। इससे भी सरकार के खर्च में कुछ कमी आने की उम्मीद है। इन वजहों से सब्सिडी पर सरकार के खर्च में कमी आ सकती है। यह फाइनेंशियल ईयर 2022-23 के मुकाबले करीब 35-40 फीसदी कम रह सकता है।


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हालांकि, सब्सिडी पर सरकार के खर्च में कमी का सीमित असर फर्टिलाइजर्स मैन्युफैक्चरर्स पर पड़ने की उम्मीद है। हालांकि, इससे सरकार को अपनी वित्तीय स्थिति ठीक करने में मदद मिलेगी। उदाहरण के लिए यूरिया बनाने वाली कंपनियों को होने वाले नुकसान की भरपाई सरकार करेगी। सरकार उत्पादन लागत और मैक्सिमम रिटेल प्राइस (MRP) के बीच फर्क का भुगतान कंपनियों को करेगी।

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आत्मनिर्भरता पर फोकस

फर्टिलाइजर्स, एग्रोकेमिकल्स और फीडस्टॉक के मामले में इंडिया की निर्भरता आयात पर है। उम्मीद है कि बजट 2023 में सरकार एग्री-इनपुट्स के मामले में आत्मनिर्भरता पर फोकस करेगी। अगर सरकार देश में फर्टिलाइजर्स का उत्पादन बढ़ाने, सप्लाई-चेन में निवेश बढ़ाने और फीडस्टॉक के इंपोर्ट ड्यूटी/टैक्स स्ट्रक्चर को तर्कसंगत बनाने की कोशिश करती है तो इससे घरेलू और एक्सपोर्ट आधारित एग्री-केम कंपनियों को फायदा होगा। उन्हें चाइना प्लस वन सोर्सिंग अपॉर्चुनिटी का भी फायदा मिलेगा।

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किसानों की आय दोगुनी करने पर फोकस

पिछले कुछ सालों में सरकार ने मिनिमम सपोर्ट प्राइस (MSP) बढ़ाए हैं। इसका मकसद किसानों की इनकम बढ़ाना है। लेकिन, किसानों की इनकम दोगुना करने का लक्ष्य अब तक हासिल नहीं हुआ है। उम्मीद है कि सरकार यूनियन बजट 2023 में किसानों की इनकम और रोजगार के मौके बढ़ाने पर फोकस करेगी। साथ ही किसानों को कर्ज की उपलब्धता पर भी फोकस रहेगा।

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बैलेंस्ड न्यूट्रिशन पर जोर

कॉम्पलेक्स फर्टिलाइजर्स और नैनो यूरिया फर्टिलाइजर्स के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए सरकार के सपोर्ट की जरूरत है। इससे फसलों को बैलेंस्ड न्यूट्रिशन मिलेगा। इससे उपज बढ़ेगी। साथ ही सब्सिडी पर होने वाले सरकार के खर्च में कमी आएगी।

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