Union Budget 2023: सरकार को अपनी वित्तीय स्थिति (Fiscal Consolidation) में सुधार करने की कोशिशों के बावजूद पूंजीगत खर्च (Capital Expenditure) पर अपना फोकस रखना चाहिए। RBI स्टाफ ने यह कहा है। इस फाइनेंशियल ईयर की पहली छमाही में सरकार की वित्तीय स्थिति की समीक्षा से जुड़े एक आर्टिकल में यह बात कही गई है। यह आर्टिकल 20 दिसंबर को प्रकाशित हुआ है। इसमें कहा गया है कि इकोनॉमिक ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिए राज्यों को अपना पूंजीगत खर्च बढ़ाना चाहिए। इसमें यह भी कहा है कि राज्यों का पूंजीगत खर्च कम बना हुआ है। यूनियन बजट 2023 (Budget 2023) से ठीक पहले पूंजीगत खर्च पर फोकस बनाए रखने की RBI स्टाफ की इस सलाह को बहुत अहम माना जा रहा है। हालांकि, यह आर्टिकल RBI का विचार व्यक्त नहीं करता है।
सरकार के पूंजीगत खर्च का असर इकोनॉमी पर पड़ता है
इस आर्टिकल को RBI के डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक एंड पॉलिसी रिसर्च के मेंबर्स ने लिखा है। इसमें कहा गया है कि राज्यों के एक्सपेंडिचर की क्वालिटी का असर मध्यम से लंबी अवधि में इकोनॉमी पर पड़ता है। इसलिए इस फाइनेंशियल ईयर की बाकी अवधि में इसे बढ़ाने की जरूरत है। हालांकि, इस आर्टिकल में बताई गईं बातें RBI के विचार नहीं हैं। RBI स्टाफ की यह टिप्पणी अगले यूनियन बजट से ठीक पहले आई है। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण 1 फरवरी, 2023 को यूनियन बजट पेश करेंगी।
इस वित्त वर्ष के लिए 7.5 लाख करोड़ है पूंजीगत खर्च का टारगेट
सरकार ने कोरोना की महामारी के दौरान अपना पूंजीगत खर्च काफी बढ़ाया है। इस फाइनेंशियल ईयर के लिए बजट में पूंजीगत खर्च के लिए रिकॉर्ड 7.5 लाख करोड़ रुपये का टारगेट रखा गया है। यह फाइनेंशियल ईयर 2021-22 के संशोधित अनुमान से 24 फीसदी ज्यादा है। इस फाइनेंशियल ईयर के पूंजीगत खर्च के सरकार के टारगेट में राज्यों को 1 लाख करोड़ रुपये का इंटरेस्ट-फ्री लोन भी शामिल है। यह लोन 50 साल के लिए है। 19 दिसंबर को फाइनेंस मिनिस्ट्री की तरफ से संसद को दी गई जानकारी के मुताबिक केंद्र सरकार के इस 1 लाख करोड़ रुपये के पूल से अभी पश्चिम बंगाल और ओडिशा को कोई पैसा नहीं मिला है।
अगले फाइनेंशियल ईयर के पूंजीगत खर्च के टारगेट पर लगी हैं नजरें
फाइनेंशियल ईयर 2023-24 का यूनियन बजट आने में कुछ ही हफ्ते बचे हैं। इसलिए इस पर सबकी नजरें लगी हुई हैं कि सरकार अगले फाइनेंशियल ईयर के लिए पूंजीगत खर्च का कितना टारगेट तय करती है। पिछले महीने वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि सरकार पूंजीगत खर्च पर अपना फोकस बनाए रखेगी। हालांकि, कुछ दिन पहले चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर वी अनंत नागेश्वरन ने सरकार के पूंजीगत खर्च जारी रखने को लेकर संदेह जताया था। उन्होंने कहा था कि पब्लिक सेक्टर के लिए इतना ज्यादा पूंजीगत खर्च को जारी रखना न तो अच्छा है और न ही जरूरी है।