Union Budget 2023: नौकरी करने वाले लोगों को 80C डिडक्शन बढ़ने के अलावा मिल सकती है कई रिलीफ

Union Budget 2023: पिछले कुछ बजटों ने इनकम टैक्स के लिहाज से टैक्सपेयर्स को निराश किया है। इधर, बढ़ती महंगाई, रोजगार के मोर्चे पर अनिश्चितता और EMI के बढ़ते बोझ ने आम आदमी पर काफी असर डाला है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण यूनियन बजट 2023 में नौकरीपेशा वर्ग को राहत दे सकती हैं

अपडेटेड Jan 13, 2023 पर 5:17 PM
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर वित्तमंत्री इनकम टैक्स के मोर्चे पर लोगों को राहत देती हैं तो उनके हाथ में खर्च के लिए ज्यादा पैसे बचेंगे। इससे इकोनॉमी में डिमांड बढ़ाने में मदद मिलेगी।

Union Budget 2023: पिछले कुछ बजटों ने इनकम टैक्स के मामले में नौकरीपेशा वर्ग को मायूस किया है। तेजी से बढ़ती महंगाई, रोजगार के मोर्चे पर अनिश्चितिता और EMI के बढ़ते बोझ ने लोगों की मुश्किलें बढ़ाई हैं। सवाल है कि क्या यूनियन बजट 2023 (Budget 2023) में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) आम आदमी खासकर टैक्सपेयर्स की मुश्किल घटाने वाले उपायों का ऐलान करेंगी? ज्यादातर लोगों का मानना है कि 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट में वित्तमंत्री आम आदमी को राहत देने वाले उपायों का ऐलान कर सकती हैं। एक्सपर्ट्स का भी कहना है कि अगले साल लोकसभा चुनावों से पहले आम आदमी को राहत दे सकती हैं। लोकसभा चुनावों से पहले यह केंद्र की मोदी सरकार का आखिरी पूर्ण बजट होगा।

टैक्स कम होने से लोगों के हाथ में बचेंगे ज्यादा पैसे

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर वित्तमंत्री इनकम टैक्स के मोर्चे पर लोगों को राहत देती हैं तो उनके हाथ में खर्च के लिए ज्यादा पैसे बचेंगे। इससे इकोनॉमी में डिमांड बढ़ाने में मदद मिलेगी। इकोनॉमिक ग्रोथ की तेज रफ्तार बनाए रखने के लिए इकोनॉमी में डिमांड जरूरी है। अमेरिका, इंग्लैंड और यूरोप की अर्थव्यवस्था पर जब मंदी का खतरा मंडरा रहा है तब इंडियन इकोनॉमी अच्छी रफ्तार से बढ़ रही है।


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बढ़ सकती है स्टैंडर्ड डिडक्शन की लिमिट

इनकम टैक्स की ओल्ड रीजीम में नौकरी करने वाले लोगों को 50,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है। ज्यादातर टैक्सपेयर्स ओल्ड रीजीम का इस्तेमाल करते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि स्टैंडर्ड डिडक्शन की लिमिट में पिछले कई सालों से बदलाव नहीं हुआ है। इस दौरान लोगों का खर्च बहुत बढ़ा है। ऐसे में स्टैंडर्ड डिडक्शन की लिमिट को बढ़ाने की जरूरत है। इससे बड़ी संख्या में लोगों को फायदा होगा। उन पर टैक्स का बोझ घटेगा। इससे उनके हाथ में ज्यादा पैसे बचेंगे।

80सी की डिडक्शन लिमिट भी बढ़ने की उम्मीद

डेलॉयट इंडिया की पार्नटर आरती रावते ने कहा, "बढ़ती महंगाई को देखते हुए टैक्सपेयर्स कुछ राहत की उम्मीद कर रहे हैं।" सरकार को स्टैंडर्ड डिडक्शन की लिमिट बढ़ानी चाहिए। साथ ही इसका फायदा न्यू टैक्स रीजीम का इस्तेमाल करने वाले लोगों को भी मिलना चाहिए। नौकरीपेशा लोगों को इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80सी के तहत सालाना 1.5 लाख रुपये डिडक्शन का फायदा मिलता है। इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) ने कहा है कि यूनियन बजट 2023 में सेक्शन 80सी के तहत डिडक्शन लिमिट को बढ़ाकर 2.5 लाख रुपये करना चाहिए।

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इंडिया में टैक्स का रेट सबसे ज्यादा

एक्सपर्ट्स का कहना है कि एग्जेम्प्शंस और डिडक्शंस की लिमिट बढ़ाने से लोगों को रिटायरमेंट सेविंग्स बढ़ाने में मदद मिलती है। फिनकेयर एसएफबी के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (रिटेल बैंकिंग) आशीष मिश्रा ने कहा, "ये टूल सोशल सिक्योरिटी का फायदा समाज के बड़े वर्गों तक पहुंचाने में मददगार है।" अभी PPF, NSC, 5-साल का टर्म डिपॉजिट, LIC प्रीमियम, EPF, ELSS और यूलिप सहित करीब एक दर्जन इंस्ट्रूमेंट्स पर सेक्शन 80सी के तहत डिडक्शन का फायदा मिलता है।

अभी इनकम टैक्स के लिए सबसे कम स्लैब में टैक्स रेट 5 फीसदी है। सबसे ज्यादा टैक्स वाले स्लैब में टैक्स सेस और सरचार्ज मिलाकर 42.74 फीसदी तक पहुंच जाता है। 42.74 फीसदी का टैक्स रेट दुनिया में सबसे ज्यादा है। हांगकांग में टैक्स का सबसे ज्यादा रेट 15 फीसदी है। श्रीलंका में यह 18 फीसदी है। बांग्लादेश में 25 फीसदी है और सिंगापुर में 22 फीसदी है। फाइनेंशियल ईयर 2016-17 के बाद इनकम टैक्स रेट में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है।

अभी 10 लाख रुपये से ज्यादा इनकम वाले लोग 30 फीसदी टैक्स स्लैब में आते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट को 2.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये किया जा सकता है। उनका यह भी कहना है कि सरकार को टैक्स के सबसे ज्यादा रेट को घटाकर 15 फीसदी करना चाहिए। सबसे ज्यादा टैक्स स्लैब को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये करना चाहिए।

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