Union Budget 2023: इस साल दुनिया के ज्यादातर दूसरे स्टॉक मार्केट्स के मुकाबले इंडियन मार्केट का प्रदर्शन अच्छा रहा है। इंडियन स्टॉक मार्केट्स को बढ़ावा देने के लिए सरकार कुछ कदम बजट में उठा सकती है। 900 स्टॉक ब्रोकर्स का प्रतिनिधित्व करने वाली एसोसिएशन ऑफ नेशनल एक्सचेंजेज मेंबर्स ऑफ इंडिया (ANMI) ने अगले यूनियन बजट (Budget 2023) से अपनी उम्मीदों के बारे में सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) को बताया है। एएनएमआई का मानना है कि अगर सरकार उसकी मांगों को मान लेती है तो स्टॉक्स में निवेश करने में लोगों की दिलचस्पी बढ़ेगी। अभी अमेरिका जैसे दुनिया के विकसित देशों के मुकाबले इंडिया में इक्विटी में निवेश करने में लोगों की दिलचस्पी काफी कम है। शेयर बाजार में लोगों की दिलचस्पी बढ़ने से मार्केट्स को मजबूती मिलेगी। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी, 2023 को यूनियन बजट पेश करेंगी।
सेबी रजिस्टर्ड इंटरमीडियरीज को इंडस्ट्री का दर्जा देने की जरूरत
एएमएमआई ने सेबी में रजिस्टर्ड मार्केट इंटरमीडियरीज को इंडस्ट्री का स्टेटस देने की मांग की है। इनकम के क्लासिफिकेशन के मौजूदा नियमों में बदलाव करने और STT और CTT में फिर से रिबेट की शुरुआत करने भी मांग की है। ANMI के प्रेसिडेंट कमलेश शान ने कहा है कि सरकार को इकोनॉमिक ग्रोथ बढ़ाने के लिए शेयरों में निवेश को प्रोत्साहित करने की जरूरत है। ज्यादा लोगों के निवेश के लिए आगे आने से मार्केट का वॉल्यूम बढ़ेगा, शेयरों में लिक्विडिटी बढ़ेगी और कंपनियों को बाजार से पूंजी जुटाने में भी मदद मिलेगी।
इनकम की एक से ज्यादा परिभाषा से होती है उलझन
एएनएमआई ने कहा है कि इनकम टैक्स एक्ट में अभी इनकम की एक से ज्यादा परिभाषा है। यहां इनकम का मतलब कैपिटल मार्केट ट्रांजेक्शन से होने वाली इनकम से है। इससे अलग-अलग ट्रेड पर होने वाले प्रॉफिट और लॉस के क्लासिफिकेशन को लेकर प्रॉब्लम होती है। उदाहरण के लिए इंट्रा-डे कैश मार्केट ट्रेडिंग से होने वाली इनकम को स्पेक्युलेटिव इनकम माना जाता है। लेकिन, इंट्रा-डे डेरिवेटिव ट्रेड से होने वाली इनकम को बिजनेस इनकम माना जाता है।
एसोसिएशन ने कहा है कि सेक्शन 45 के तहत लिस्टेड शेयरों में जिनमें डिलीवरी नहीं ली जाती है, उनमें होने वाले ट्रेड पर इनकम या लॉस को स्पेक्युलेटिव नहीं माना जाना चाहिए। डिलीवरी के बगैर शेयरों के सेल और पर्चेज से होने वाले इनकम को बिजनेस इनकम माना जाना चाहिए। इससे इनवेस्टर्स और शेयर ब्रोकर्स खुलकर शेयरों में ट्रांजेक्शंस कर सकेंगे। इससे मार्केट में मजबूती आएगी।
एसटीसीजी पर एक लाख रुपये का टैक्स एग्जेम्प्शन देने की जरूरत
एसटीटी चुकाने के बाद भी शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस का कैलकुलेशन होता है। इसलिए एसटीसीजी पर एक लाख रुपये का टैक्स एग्जेम्प्शन मिलना चाहिए। इससे मार्केट में पार्टिसिपेशन बढ़ेगा। साथ ही शेयरों में निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा। अभी डिविडेंड 5000 रुपये से ज्यादा नहीं होने पर टीडीएस का नियम लागू नहीं होता है। हालांकि, यह सिर्फ इंडिविजुअल रिसिपिएंट शेयरहोल्डर्स के लिए है। एएनएमआई का कहना है कि टीडीएस से छूट के लिए डिविडेंड की सीमा को 5000 रुपये से बढ़ाकर 10,000 रुपये कर देनी चाहिए।