Union Budget 2023: सरकार आम लोगों की पहुंच इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स (Insurance Products) तक बढ़ाना चाहती है। अभी देश में कुछ ही लोगों के पास बीमा उत्पाद हैं। सरकार का फोकस लाइफ इंश्योरेंस (Life Insurance Policy) और हेल्थ पॉलिसी (Health Policy) ज्यादा से ज्यादा लोगों को उपलब्ध कराने पर है। इंश्योरेंस इंडस्ट्री (Insurance Industry) सरकार से इसके लिए जरूरी कदम उठाने की सलाह दे चुकी है। फाइनेंशियल ईयर 2023-24 का बजट पेश होने से पहले इंडस्ट्री ने सरकार को एक बार फिर इस बारे में सलाह दी है। उसका मानना है कि इस बार बजट में फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) को लाइफ इंश्योरेंस के लिए इनकम टैक्स में डिडक्शन का अलग से प्रावधान करना चाहिए। एन्युटी इनकम को टैक्स से छूट देनी चाहिए। हेल्थ इंश्योरेंस (Health Insurance) प्रीमियम पर टैक्स डिडक्शन बढ़ाना चाहिए। इसके अलावा होम इंश्योरेंस (Home Insurance) पर भी टैक्स छूट देनी चाहिए।
सेक्शन 80 सी की लिमिट बढ़ाने की जरूरत
हर व्यक्ति के पास एक टर्म लाइफ कवर होना जरूरी है। खासकर उस व्यक्ति के लिए यह बहुत जरूरी है, जिसकी कमाई से परिवार का खर्च चलता है। लेकिन, ज्यादातर लोग टैक्स सेविंग के लिए लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसीज खरीदते हैं। लेकिन, लाइफ इंश्योरेंस का असली मकसद प्रोटेक्शन होना चाहिए। इसलिए सरकार को लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी के लिए अलग से डिडक्शन का प्रावधान करना चाहिए। इससे लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी का आकर्षण बढ़ेगा। अभी इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80सी के तहत एक फाइनेंशियल ईयर में 1.5 लाख रुपये तक का डिक्डक्शन मिलता है। लेकिन, इस सेक्शन के तहत निवेश के कई ऑप्शंस आते हैं। इनमें पीपीएफ, सुकन्या सम़ृद्धि, ईएलएसएस, बच्चों की ट्यूशन फीस, होम लोन प्रिंसिपल सहित कई तरह के ऑप्शंस शामिल हैं।
यह भी पढ़ें : बजट 2023: निर्मला सीतारमण कैपिटल गेंस टैक्स के नियमों में बदलाव कर सकती हैं, जानिए अभी क्या हैं नियम
इंश्योरेंस इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों का कहना है कि सरकार के पास दो विकल्प हैं। पहला, वह लाइफ इंश्योरेंस पर डिडक्शन के लिए अलग प्रावधान कर दे। दूसरा, अगर वह अलग से डिडक्शन का प्रावधान नहीं कर सकती है तो उसे सेक्शन 80 सी की लिमिट को 1.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर देनी चाहिए। इससे लोगों की दिलचस्पी लाइफ इंश्योरेंस प्लान में बढ़ेगी।
एन्युटी या पेंशन स्कीम से इनकम को टैक्स छूट मिले
एन्युटी या पेंशन इनकम को टैक्स से छूट मिलनी चाहिए। इससे पेंशन प्लान में लोगों की दिलचस्पी बढ़ेगी। पेंशन इनकम के प्रिसिंपल कंपोनेंट को टैक्स-फ्री बनाने की जरूरत है। जिस तरह बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट प्रोडक्ट्स में सिर्फ इंटरेस्ट पर टैक्स लगता है, उसी तरह लाइफ इंश्योरेंस एन्युटी/पेंशन प्रोडक्ट्स में सिर्फ इंटरेस्ट पर टैक्स लगना चाहिए न कि प्रिसिपल रिपेमेंट पर।
हेल्थ इंश्योरेंस पर डिडक्शन बढ़ाने की जरूरत
सरकार को इस बार बजट में हेल्थ इंश्योरेंस पर डिडक्शन बढ़ाने का ऐलान करना चाहिए। अभी सेक्शन 80डी के तहत 60 साल से कम उम्र के व्यक्ति को एक फाइनेंशियल ईयर में हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम के 25000 रुपये तक पर डिडक्शन मिलता है। सीनियर सिटीजंस के लिए यह लिमिट 50,000 रुपये है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि कोरोना की महामारी के बाद हॉस्पिटलाइजेशन बढ़ा है। इसलिए सरकार को हेल्थ पॉलिसी पर डिडक्शन को बढ़ाने की जरूरत है। सीनियर सिटीजंस की लिमिट को बढ़ाकर 1 लाख रुपये की जा सकती है। 60 साल से कम उम्र के लोगों के डिडक्शन की लिमिट बढ़ाकर 50,000 रुपये की जा सकती है।
होम इंश्योरेंस के प्रीमियम पर भी मिले छूट
फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतामरण को होम इंश्योरेंस के प्रीमियम पर भी टैक्स छूट देनी चाहिए। पिछले कुछ सालों में मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई सहित देश के कई हिस्सों में बड़ी बाढ़ आई थी। इससे जानमाल को नुकसान पहुंचा था। इसे देखते हुए सरकार को होम इंश्योरेंस के प्रीमियम पर टैक्स छूट का ऐलान करना चाहिए।