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Union Budget 2023: इन उपायों से इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स में बढ़ेगी लोगों की दिलचस्पी, इंडस्ट्री ने दी सरकार को सलाह

Union Budget 2023: हर व्यक्ति के पास एक टर्म लाइफ कवर होना जरूरी है। खासकर उस व्यक्ति के लिए यह बहुत जरूरी है, जिसकी कमाई से परिवार का खर्च चलता है। लेकिन, ज्यादातर लोग टैक्स सेविंग के लिए लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसीज खरीदते हैं

MoneyControl Newsअपडेटेड Dec 06, 2022 पर 3:17 PM
Union Budget 2023: इन उपायों से इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स में बढ़ेगी लोगों की दिलचस्पी, इंडस्ट्री ने दी सरकार को सलाह
सरकार को लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी के लिए अलग से डिडक्शन का प्रावधान करना चाहिए। इससे लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी का आकर्षण बढ़ेगा।

Union Budget 2023: सरकार आम लोगों की पहुंच इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स (Insurance Products) तक बढ़ाना चाहती है। अभी देश में कुछ ही लोगों के पास बीमा उत्पाद हैं। सरकार का फोकस लाइफ इंश्योरेंस (Life Insurance Policy) और हेल्थ पॉलिसी (Health Policy) ज्यादा से ज्यादा लोगों को उपलब्ध कराने पर है। इंश्योरेंस इंडस्ट्री (Insurance Industry) सरकार से इसके लिए जरूरी कदम उठाने की सलाह दे चुकी है। फाइनेंशियल ईयर 2023-24 का बजट पेश होने से पहले इंडस्ट्री ने सरकार को एक बार फिर इस बारे में सलाह दी है। उसका मानना है कि इस बार बजट में फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) को लाइफ इंश्योरेंस के लिए इनकम टैक्स में डिडक्शन का अलग से प्रावधान करना चाहिए। एन्युटी इनकम को टैक्स से छूट देनी चाहिए। हेल्थ इंश्योरेंस (Health Insurance) प्रीमियम पर टैक्स डिडक्शन बढ़ाना चाहिए। इसके अलावा होम इंश्योरेंस (Home Insurance) पर भी टैक्स छूट देनी चाहिए।

सेक्शन 80 सी की लिमिट बढ़ाने की जरूरत

हर व्यक्ति के पास एक टर्म लाइफ कवर होना जरूरी है। खासकर उस व्यक्ति के लिए यह बहुत जरूरी है, जिसकी कमाई से परिवार का खर्च चलता है। लेकिन, ज्यादातर लोग टैक्स सेविंग के लिए लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसीज खरीदते हैं। लेकिन, लाइफ इंश्योरेंस का असली मकसद प्रोटेक्शन होना चाहिए। इसलिए सरकार को लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी के लिए अलग से डिडक्शन का प्रावधान करना चाहिए। इससे लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी का आकर्षण बढ़ेगा। अभी इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80सी के तहत एक फाइनेंशियल ईयर में 1.5 लाख रुपये तक का डिक्डक्शन मिलता है। लेकिन, इस सेक्शन के तहत निवेश के कई ऑप्शंस आते हैं। इनमें पीपीएफ, सुकन्या सम़ृद्धि, ईएलएसएस, बच्चों की ट्यूशन फीस, होम लोन प्रिंसिपल सहित कई तरह के ऑप्शंस शामिल हैं।

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