बजट 2023: आपके लिए भी बजट में बहुत कुछ है, ध्यान से पढ़िए यह खबर

Budget 2023: फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने एक तरफ इनकम टैक्स में राहत दी है तो दूसरी तरफ फिस्कल डेफिसिट का टारगेट घटाया है। उन्होंने कैपिटल एक्सपेंडिचर में 2.5 लाख करोड़ रुपये की वृद्धि की है। इसका मतलब है कि उन्होंने आम आदमी की सुध लेने के साथ इकोनॉमी की ग्रोथ पर फोकस बनाए रखा है

अपडेटेड Feb 01, 2023 पर 4:18 PM
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टैक्स और इकोनॉमी की समझ रखने वाले लोगों का मानना है कि वित्तमंत्री ने आम लोगों की जरूरतों और इंडस्ट्री की जरूरतें पूरी करने के बीच बहुत अच्छा संतुलन बैठाया है।

बजट 2023: अगर आपको यह लगता है कि आपके लिए वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) के यूनियन बजट (Union Budget 2023) में बहुत कुछ नहीं है, तो आपको इस खबर को ध्यान से पढ़ने की जरूरत है। वित्तमंत्री इनकम टैक्स में बड़ी राहत दी है। हां, यह सही है कि यह राहत उन्हीं लोगों को मिलेगी जो इनकम टैक्स की नई रीजीम का इस्तेमाल करेंगे। इनकम टैक्स की ओल्ड रीजीम का इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए किसी तरह की राहत नहीं दी गई है। इनकम टैक्स की नई रीजीम के इस्तेमाल से अगर हमें और आपको फायदा हो रहा होगा, तो इसके इस्तेमाल में क्या हर्ज है। अगले फाइनेंशियल ईयर से आप इनकम टैक्स की नई रीजीम का इस्तेमाल इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के लिए कर सकते हैं।

टैक्स और इकोनॉमी की समझ रखने वाले लोगों का मानना है कि वित्तमंत्री ने आम लोगों की जरूरतों और इंडस्ट्री की जरूरतें पूरी करने के बीच बहुत अच्छा संतुलन बैठाया है। एक तरफ उन्होंने सरकार की वित्तीय स्थिति ठीक करने का संकल्प दिखाया है तो दूसरी तरफ इनकम टैक्स की न्यू रीजीम को अट्रैक्टिव बनाकर लोगों पर टैक्स का बोझ घटाया है। आखिर आप भी इनकम टैक्स में राहत की उम्मीद ही तो कर रहे थे।

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कारोबार करने वाले लोग इस बात से खुश है कि इस बजट में उन्हें वित्तमंत्री ने किसी तरह का झटका नहीं दिया है। इसका मतलब है कि अगले फाइनेंशियल ईयर में उनकी मुसीबत बढ़ने नहीं जा रही है। फाइनेंस मिनिस्टर ने एग्रीकल्चर और फॉर्म सेक्टर पर भी अपना फोकस बनाए रखा है। एग्रीकल्चर सेक्टर के लिए आवंटन बढ़ाया है। खेती और किसानी में मदद करने के लिए कुछ नई स्कीमों का ऐलान भी किया है।

बजट डॉक्युमेंट्स को ध्यान से देखने पर पता चलता है कि इसमें सबके लिए कुछ न कुछ है। सरकार ने इकोनॉमी की ग्रोथ बढ़ाने के लिए कैपिटल ऐक्सपेंडिचर पर अपना फोकस बनाए रखा है। इसके लिए अगले फाइनेंशियल ईयर के लिए 10 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। पिछले बजट में सरकार ने 7.5 लाख करोड़ रुपये का आवंटन कैपिटल एक्सपेंडिचर के लिए किया था। कैपिटल एक्सपेंडिचर बढ़ने का मतलब है कि सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज्यादा खर्च करेगी। रोजगार के ज्यादा मौके पैदा होंगे। बुनियादी सुविधाएं बेहतर होंगी। इन दोनों की जरूरत आपको भी है।

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प्रमुख उद्योग चैंबर के डायरेक्टर जनरल चंद्रजीत बनर्जी ने कहा, "यह ऐसा बजट है जो अगले 25 साल के अमृतकाल को ध्यान में रखता है। बजट का फोकस कंजम्प्शन और इनवेस्टमेंट डिमांड बढ़ाने पर है। कैपिचल एक्सपेंडिचर बढ़ने से इनवेस्टमेंट डिमांड बढ़ेगी। वित्तमंत्री ने फिस्कल डेफिसिट को कम करने पर भी फोकस बनाए रखा है।"

शार्दुल अमरचंद मंगलदास एंड कंपनी के पार्टनर रजत बोस ने कहा, "इस बजट में आम आदमी को सबसे पहले रखा गया है। इकोनॉमिक ग्रोथ की रफ्तार अच्छी बने रहने से युवाओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी साथ ही उन्हें तरक्की के मौके भी मिलेंगे। टूरिज्म और ग्रीन एनर्जी पर फोकस बनाए रखने से रोजगार के मौके पैदा करने में मदद मिलेगी।"

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