Union Budget 2023 : पिछले कुछ महीनों के दौरान ब्याज दरों में कई बढ़ोतरी से वे बॉरोअर्स खासे प्रभावित हुए हैं, जिन्होंने फ्लोटिंग रेट पर होम लोन जैसे कर्ज ले रखे हैं। हालांकि, आरबीआई की तरफ आगे ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंकाएं बनी हुई हैं। ऐसे में, होमबायर्स वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) की तरफ से आम बजट 2023 में कुछ राहत की उम्मीदें लगाए बैठे हैं। बजट से क्या चाहते हैं होमबायर्स...
होम लोन इंटरेस्ट पर टैक्स डिडक्शन बढ़े
इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के सेक्शन 24बी के तहत वर्तमान में होमबायर्स होम लोन पर चुकाए जा रहे इंटरेस्ट पर डिडक्शन क्लेम कर सकता है। सेल्फ ऑक्युपाइड प्रॉपर्टी के लिए एक वित्त वर्ष में अधिकतम डिडक्शन 2 लाख रुपये हो सकता है। ऐसे मे सेक्शन 24बी के तहत होम लोन इंटरेस्ट पर टैक्स रिबेट बढ़ाई जानी चाहिए। इससे विशेष रूप से अफोर्डेबिल सेगमेंट में हाउसिंग डिमांड बढ़ेगी। ध्यान रखने की बात है कि यह अधिकतम डिडक्शन लिमिट वित्त वर्ष 2016-17 से बनी हुई है।
हाउसिंग लोन के मूल धन पर टैक्स डिडक्शन का अलग सेक्शन
होमबायर्स इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80सी के तहत अपने होमलोन के मूलधन के रिपेमेंट पर इनकम टैक्स डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं। इसके तहत एक वित्त वर्ष में अधिकतम 1.5 लाख रुपये का डिडक्शन क्लेम किया जा सकता है। हालांकि, सेक्शन 80सी में पीपीएफ, ईएलएसएस, लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम और सुकन्या समृद्धि अकाउंट को इसमें जोड़ दिया गया है। ऐसे में सेक्शन 80सी के तहत टैक्स डिडक्शन लिमिट बढ़ने से होम लोन बॉरोअर्स का फायदेमंद हो सकता है।
अफोर्डेबिल हाउसिंग प्राइस बैंड में बदलाव
वर्तमान में, 45 लाख रुपये के प्राइस बैंड को अफोर्डेबल हाउसिंग माना जाता है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि अफोर्डेबिल हाउसिंग मानने के लिए 45 लाख रुपये का मौजूदा प्राइस बैंड भारत के कई शहरों के लिए सही नहीं है। इसे बढ़ाकर 75 लाख रुपये या उससे ज्यादा करना चाहिए।
कैपिटल गेन्स के नियमों में लचीलापन
Income-tax Act के सेक्शन 54 के तहत, मौजूदा घर को बेचने से हुए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स को एक नई प्रॉपर्टी को खरीदने या निर्माण में इस्तेमाल किया जा सकता है। यदि एग्जम्प्शन के लिए एक निर्माणाधीन प्रॉपर्टी में निवेश किया जाता है तो वह मकान की बिक्री के तीन साल के भीतर प्रॉपर्टी का निर्माण पूरा होने पर ही इसे क्लेम किया जा सकता है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स में यूनिट्स की संख्या, ऊंचाई और सुविधाएं बढ़ती जा रही है, जिससे निर्माण पूरा होने की टाइमलाइन बढ़ती जा रही है। ऐसे निर्माणाधीन प्रॉपर्टीज डेडलाइन बढ़ती जा रही हैं। इसलिए, इन पेचीदगियों को दूर करने की जरूरत है। ऐसे कैपिटल गेन्स में इस तीन साल की टाइमलाइन को बढ़ाए जाने की जरूरत है।