Union budget 2024 : ज्यादा बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट, हेल्थ पॉलिसी पर अधिक डिडक्शन सहित ये राहत चाहते हैं टैक्सपेयर्स

Union budget 2024 : वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने दिसंबर में अंतरिम बजट में बड़े ऐलान नहीं होने के संकेत दिए थे। लेकिन, टैक्स के नियमों में कुछ बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। वित्त वर्ष 2019 के अंतरिम बजट में सरकार ने सालाना 5 लाख रुपये तक इनकम वाले लोगों के लिए टैक्स रिबेट बढ़ा दिया था। अंतरिम बजट में स्टैंडर्ड डिडक्शन भी बढ़ाकर 50,000 रुपये कर दिया गया था

अपडेटेड Jan 12, 2024 पर 4:52 PM
Union budget 2024 : पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ने एनपीएस में प्राइवेट नौकरी करने वाले लोगों के कंट्रिब्यूशन की लिमिट बढ़ाकर 12 फीसदी करने की मांग की है। अभी यह लिमिट 10 फीसदी है।

Union budget 2024 : वित्तमंत्री Nirmala Sitharaman 1 फरवरी को यूनियन बजट (Union Budget 2024) पेश करेंगी। यह अंतरिम बजट होगा। अप्रैल-मई में लोकसभा चुनावों के बाद जो नई सरकार बनेगी वह पूर्ण बजट पेश करेगी। वित्तमंत्री ने दिसंबर में अंतरिम बजट में बड़े ऐलान नहीं होने के संकेत दिए थे। लेकिन, टैक्स के नियमों में कुछ बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। वित्त वर्ष 2019 के अंतरिम बजट में सरकार ने सालाना 5 लाख रुपये तक इनकम वाले लोगों के लिए टैक्स रिबेट बढ़ा दिया था। अंतरिम बजट में स्टैंडर्ड डिडक्शन भी बढ़ाकर 50,000 रुपये कर दिया गया था। इसलिए 1 फरवरी को पेश होने वाले अंतरिम बजट से टैक्सपेयर्स, म्यूचुअल फंड्स हाउसेज और इंश्योरेंस कंपनियों की कई उम्मीदें हैं।

बजट 2024 : बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट 50,000 रुपये बढ़ाने की जरूरत

सरकार ने यूनियन बजट 2023 में टैक्स रिबेट के लिए इनकम की लिमिट 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 7 लाख रुपये कर दी थी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार को इनकम टैक्स की नई और पुरानी दोनों ही रीजीम में बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट बढ़ाने की जरूरत है। इससे टैक्सपेयर्स की टैक्स लायबिलिटी में कमी आएगी। मुंबई के चार्टर्ड अकाउंटेंट चिराग चौहान ने कहा, "ओल्ड और नई रीजीम में बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट और 50,000 रुपये बढ़ाने की जरूरत है। पिछले बजट में सरकार ने इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स को कई राहत दी थी। अंतरिम बजट होने के बावजूद सरकार चुनावों से पहले इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स को कुछ राहत दे सकती है।"


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बजट 2024 : हेल्थ इंश्योरेंस पर डिडक्शन बढ़ाया जाए

हेल्थ इंश्योरेंस पर डिडक्शन की लिमिट बढ़ाने की जरूरत है। अभी कोई व्यक्ति खुद और अपने परिवार के लिए हेल्थ पॉलिसी के प्रीमियम पर सालाना 25,000 रुपये का डिडक्शन क्लेम कर सकता है। यह डिडक्शन इनकम टैक्स एक्ट, 1916 के सेक्शन 80डी के तहत मिलता है। सीनियर सिटीजन को हेल्थ पॉलिसी पर सालाना 50,000 रुपये का डिडक्शन क्लेम करने की इजाजत है। कोरोना की महामारी के बाद इंश्योरेंस कंपनियों ने हेल्थ पॉलिसी का प्रीमियम काफी बढ़ा दिया है। इसलिए हेल्थ पॉलिसी डिडक्शन की लिमिट 25,000 रुपये से बढ़ाकर 50,000 रुपये करने की जरूरत है। सीनियर सिटीजन के लिए लिमिट 50,000 रुपये से बढ़ाकर 75,000 रुपये सालाना करने की जरूरत है।

बजट 2024 : बिजनेसेज और सेल्फ एंप्लॉयड को स्विच करने की इजाजत मिले

यूनियन बजट 2023 में नई टैक्स रीजीम को डिफॉल्ट रीजीम बनाने का ऐलान हुआ था। नौकरी करने वाले लोगों को इनकम टैक्स की पुरानी और नई रीजीम के बीच स्विच करने की इजाजत हर साल है। लेकिन, सेल्फ-एंप्लॉयड इंडिविजुअल्स और बिजनेसेज नई टैक्स रीजीम को सेलेक्ट कर सकते हैं। उसके बाद उन्हें ओल्ड टैक्स रीजीम में स्विच करने की इजाजत जिंदगी में सिर्फ एक बार मिलेगी। टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार को नौकरी करने वाले लोगों और सेल्फ-एंप्लॉयड लोगों के बीच इस भेदभाव को खत्म करना चाहिए। सेल्फ-एंप्लॉयड लोगों के लिए नई रीजीम और पुरानी रीजीम में स्विच करने की इजाजत मिलनी चाहिए।

बजट 2024 : एनपीएस में कंट्रिब्यूशन की लिमिट बढ़ाई जाए

पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ने एनपीएस में प्राइवेट नौकरी करने वाले लोगों के कंट्रिब्यूशन की लिमिट बढ़ाकर 12 फीसदी करने की मांग की है। अभी यह लिमिट 10 फीसदी है। इसका मतलब है कि एंप्लॉयी अपनी बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते का 10 फीसदी एनपीएस में कंट्रिब्यूट कर सकता है। सरकारी कर्मचारियों के लिए यह लिमिट 14 फीसदी है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि पीएफआरडीए की यह मांग सही है। एनपीएस में कंट्रिब्यूशन के लिए अलग-अलग सीमा नहीं होनी चाहिए।

बजट 2024 : म्यूचुअल फंड के लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स के नियम एक जैसे हों

पिछले साल के बजट में सरकार ने डेट म्यूचुअल फंड्स के कैपिटल गेंस टैक्स के नियमों में बदलाव किया था। नया नियम 1 अप्रैल, 2023 से लागू हो गया है। इसके मुताबिक, डेट म्यूचुअल फंड में निवेश से कैपिटल गेंस को इनवेस्टर्स के टैक्सेबल इनकम में जोड़ दिया जाएगा। फिर उस पर टैक्सपेयर्स के स्लैब के हिसाब से टैक्स लगेगा। इससे डेट म्यूचुअल फंड्स में निवेश कितने समय के लिए किया गया है, इसका कोई मतलब नहीं रह गया है। इक्विटी फंड के मामले में नियम अलग हैं। एक साल से पहले यूनिट्स बेचने पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस लागू होता है। इसका टैक्स रेट 15 फीसदी है। एक साल से ज्यादा अवधि के बाद यूनिट्स बेचने पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स लागू होता है। इसका रेट 10 फीसदी है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि डेट म्यूचुअल फंड और इक्विटी म्यूचुअल फंड के टैक्स नियमों में यह अंतर दूर होना चाहिए।

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